ACP मनस्वी वशिष्ठ मामले में दिल्ली हाईकोर्ट शुक्रवार को करेगा सुनवाई, बढ़ेगी मुश्किलें
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (04 November 2026): दिल्ली में पुलिस और वकीलों के बीच जारी विवाद अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। वकीलों को कथित तौर पर धमकाने, डराने और उनके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करने के आरोपों में एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और दिल्ली पुलिस के अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली जनहित याचिका पर हाईकोर्ट शुक्रवार को सुनवाई करेगा। बुधवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की खंडपीठ के समक्ष याचिका का तत्काल सुनवाई के लिए उल्लेख किया गया, जिस पर अदालत ने शुक्रवार की तारीख तय की।
अधिवक्ता करण बीर सिंह की ओर से दाखिल इस जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ पुलिस अधिकारियों ने अपने आधिकारिक पद और अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए वकीलों को धमकाया और उनकी पेशेवर गरिमा को ठेस पहुंचाई। याचिका में सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि एसीपी मनस्वी वशिष्ठ वकीलों को समूह में पुलिस थानों में आने पर हिरासत में लेने और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने की चेतावनी देती दिखाई दे रही हैं। वहीं, सब-इंस्पेक्टर विशाल यादव के कथित वीडियो में एक वकील को एके-47 से गोली मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है।
याचिकाकर्ता ने कहा है कि यदि वीडियो में सामने आए बयान सही साबित होते हैं तो यह आपराधिक धमकी, पुलिस शक्तियों के दुरुपयोग और वकीलों की पेशेवर स्वतंत्रता से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करते हैं। याचिका में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस कमिश्नर, स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस (विजिलेंस), एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और सब-इंस्पेक्टर विशाल यादव को पक्षकार बनाया गया है। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों के कथित कदाचार की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच, आवश्यक आपराधिक एवं विभागीय कार्रवाई तथा सोशल मीडिया पर मौजूद विवादित वीडियो हटाने से पहले मूल इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है।
इस पूरे विवाद के बीच एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को कथित तौर पर अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित किया जा चुका है। बताया गया कि सोमवार सुबह करीब 100 पुलिसकर्मी दिल्ली पुलिस मुख्यालय के गेट नंबर एक के बाहर एकत्र हुए थे। इस प्रदर्शन में एसीपी वशिष्ठ भी शामिल थीं और प्रदर्शनकारी पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार से मुलाकात की मांग कर रहे थे। याचिका में पुलिसकर्मियों की इस तरह की विरोध प्रदर्शन में भागीदारी की जांच पुलिस बल (अधिकारों पर प्रतिबंध) अधिनियम, 1966 और संबंधित सेवा एवं आचरण नियमों के तहत कराने की मांग भी की गई है।
दरअसल, विवाद की शुरुआत शाहदरा पुलिस थाने में अधिवक्ता ललित बंसल से जुड़े मारपीट के मामले को संभालने के तरीके को लेकर हुई थी। विभिन्न जिला अदालतों के वकीलों ने आरोप लगाया था कि मामले के सिलसिले में पुलिस थाने पहुंचने पर एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और थाना प्रभारी अरुण कुमार ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और धमकियां दीं। इसके विरोध में वकीलों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी। विवाद बढ़ने के बाद एसीपी वशिष्ठ और थाना प्रभारी अरुण कुमार का तबादला किया गया। अब इस पूरे मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।
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