मंत्री प्रवेश वर्मा की दिवाली पार्टी में हुक्का बना राजनीति का अखाड़ा

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (03 November 2026): दिल्ली की राजनीति में इन दिनों हुक्के को लेकर नया विवाद छिड़ गया है। दिवाली के मौके पर दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा (Parvesh Verma) के आवास पर आयोजित कार्यक्रम की एक तस्वीर सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। एक नवंबर की शाम आयोजित दिवाली कार्यक्रम में हुक्के के इस्तेमाल को लेकर आम आदमी पार्टी ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। वहीं, बीजेपी ने इसे ग्रामीण संस्कृति और पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था से जोड़ते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है।

आम आदमी पार्टी के विधायक संजीव झा (Sanjeev Jha) ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा, “सनातनी होने का नाटक करने वालों की असलियत देखिए। एक तरफ दिल्ली में बीजेपी सरकार ऑनलाइन शराब की डिलीवरी करवा रही है, तो दूसरी तरफ दिवाली पार्टी में मंत्री सूखा नशा कर रहे हैं।” उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस कार्यक्रम में शामिल लोगों का डोप टेस्ट कराया जाएगा या फिर मंत्री होने के कारण उन्हें छूट मिल जाएगी। आप नेताओं ने इस पूरे मामले को बीजेपी की कथनी और करनी के बीच अंतर बताते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की है।

वहीं, आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज (Saurabh Bharadwaj) ने भी इस मामले को लेकर बीजेपी पर सवाल उठाए। आप नेताओं ने पूछा कि क्या मंत्री के सरकारी आवास पर आयोजित यह हुक्का पार्टी करदाताओं के पैसे से हुई थी? पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) और बीजेपी पर भी निशाना साधा। आप ने सवाल उठाया कि जब बीजेपी पंजाब से नशा खत्म करने की बात करती है, तो दिल्ली में उसकी सरकार के मंत्री के कार्यक्रम में हुक्के का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है।

बीजेपी ने आम आदमी पार्टी के आरोपों पर पलटवार करते हुए इसे ग्रामीण परंपरा का अपमान बताया है। दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर (Praveen Shankar Kapoor) ने कहा कि प्रतिबंधित हुक्का बार और पारंपरिक देहाती हुक्के के बीच अंतर समझना जरूरी है। उन्होंने सौरभ भारद्वाज पर निशाना साधते हुए कहा कि वह खुद चिराग दिल्ली जैसे पारंपरिक गांव में पले-बढ़े हैं और उन्हें ग्रामीण संस्कृति की जानकारी होनी चाहिए। कपूर के मुताबिक, हुक्का बार में नशीले पदार्थों के इस्तेमाल और गांवों में पारंपरिक हुक्के के चलन को एक जैसा नहीं माना जा सकता। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि हुक्के का महत्व नहीं समझने वालों का कहीं चिराग दिल्ली गांव में हुक्का-पानी ही बंद न हो जाए।

बीजेपी प्रवक्ता ने हुक्के को दिल्ली देहात और जाट समाज की सामाजिक परंपरा का हिस्सा बताते हुए कहा कि ग्रामीण इलाकों में चौपाल और पंचायत के दौरान हुक्का आपसी भाईचारे, बराबरी और सामूहिक चर्चा का प्रतीक रहा है। पंचायत शुरू होने से पहले हुक्का तैयार करना और उसे एक-दूसरे को देना सामाजिक मेलजोल तथा आपसी सहमति की परंपरा से जुड़ा रहा है। इस तरह प्रवेश वर्मा के आवास पर हुक्के के इस्तेमाल से शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर नशे के विरोध और ग्रामीण सांस्कृतिक पहचान के सम्मान की बहस बन गया है। जहां AAP इसे बीजेपी सरकार पर हमला करने का मुद्दा बना रही है, वहीं BJP इसे देहाती परंपराओं के अपमान से जोड़कर जवाब दे रही है।


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