New Delhi News (29 September 2026): दिल्लीवासियों के लिए मंगलवार, 29 सितंबर 2026 से Barapullah Phase-III कॉरिडोर खोल दिया गया है। लंबे समय से निर्माणाधीन इस एलिवेटेड कॉरिडोर से Mayur Vihar Phase-I और Sarai Kale Khan के बीच सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। यह नया हिस्सा मौजूदा Barapullah नेटवर्क से जुड़कर करीब 9 किलोमीटर का लगातार एलिवेटेड मार्ग तैयार करता है। परियोजना का उद्देश्य पूर्वी दिल्ली को दक्षिणी दिल्ली से जोड़ने वाले प्रमुख मार्गों पर यातायात दबाव कम करना है।
Barapullah Phase-III परियोजना को वर्ष 2014 में मंजूरी मिली थी और 2015 में इसका निर्माण शुरू हुआ था। शुरुआती योजना के मुताबिक इसे 2017 तक पूरा किया जाना था, लेकिन जमीन अधिग्रहण, पेड़ों से जुड़ी मंजूरियों, यमुना क्षेत्र में निर्माण और कोरोना महामारी समेत कई कारणों से परियोजना में लगातार देरी हुई। निर्माण पूरा होने की समयसीमा कई बार आगे बढ़ी और निर्धारित जून 2026 की समयसीमा भी पूरी नहीं हो सकी। अब इसके उद्घाटन के साथ एक दशक से अधिक समय से चल रही इस परियोजना का महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है।
नए कॉरिडोर का मुख्य हिस्सा Mayur Vihar Phase-I से Sarai Kale Khan तक है। इसके दोनों तरफ के रैंप तैयार किए गए हैं, जिनमें एक Mayur Vihar की ओर से कॉरिडोर से जुड़ता है, जबकि दूसरा Sarai Kale Khan के पास मौजूदा Barapullah कॉरिडोर से कनेक्शन देता है। इस मार्ग से AIIMS और दक्षिण दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। सिग्नल कम होने के कारण व्यस्त समय में यात्रा अधिक सुगम हो सकती है।
यात्रा समय को लेकर अधिकारियों का अनुमान है कि Noida या पूर्वी दिल्ली से AIIMS तक पहुंचने में लगने वाला समय करीब 35-40 मिनट से घटकर लगभग 15 मिनट तक आ सकता है। हालांकि वास्तविक समय ट्रैफिक की स्थिति और वाहन की गति पर निर्भर करेगा। नए एलिवेटेड कॉरिडोर का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि वाहन चालकों को रास्ते में बार-बार ट्रैफिक सिग्नल पर रुकने की जरूरत कम पड़ेगी, जिससे खासकर पीक ऑवर में यातायात प्रवाह बेहतर होने की उम्मीद है।
परियोजना में केवल वाहन चालकों की सुविधा का ही ध्यान नहीं रखा गया है। कॉरिडोर में साइकिल चालकों के लिए अलग साइकिल ट्रैक और पैदल यात्रियों के लिए सुविधाएं भी शामिल की गई हैं। यमुना फ्लडप्लेन के ऊपर बनाए गए हिस्से को भी परियोजना की महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग उपलब्धियों में शामिल किया गया है। इस हिस्से में करीब 125 मीटर तक के पिलर स्पैन का इस्तेमाल किया गया है, ताकि सक्रिय नदी क्षेत्र में निर्माण का हस्तक्षेप कम रहे और नदी के प्राकृतिक प्रवाह पर प्रभाव को सीमित किया जा सके।
हालांकि परियोजना के उद्घाटन के साथ इसकी लागत और देरी को लेकर उठे सवाल भी चर्चा में हैं। शुरुआत में परियोजना की अनुमानित लागत करीब 1,260 करोड़ रुपये थी, जो संशोधित होकर लगभग 1,635 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। यानी लागत में 375 करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी हुई। परियोजना में कथित अनियमितताओं को लेकर दिल्ली की एंटी करप्शन ब्रांच ने पहले मामला भी दर्ज किया था। इन आरोपों की जांच चल रही है और आरोपों को जांच पूरी होने तक स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
Barapullah Phase-III के खुलने के साथ पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली के बीच सड़क संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कड़ी जुड़ गई है। इसके अलावा उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान Mukarba Chowk अंडरपास और दक्षिण दिल्ली में प्रस्तावित दो नए फ्लाईओवर से जुड़ी सड़क अवसंरचना योजनाओं का भी उल्लेख किया गया। अब नए कॉरिडोर के शुरू होने के बाद सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि वास्तविक ट्रैफिक परिस्थितियों में इससे यात्रियों को कितना समय बचता है और पूर्वी दिल्ली, Mayur Vihar तथा Sarai Kale Khan क्षेत्र के यातायात पर इसका कितना प्रभाव पड़ता है।
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