सत्य निकेतन हादसे के बाद नोएडा में जर्जर मकानों पर शिकंजा, 81 गांवों में तेज हुआ सर्वे

टेन न्यूज नेटवर्क

Noida News (13/09/2026): दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए इमारत हादसे के बाद नोएडा प्राधिकरण ने जर्जर और असुरक्षित भवनों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। प्राधिकरण के 10 वर्क सर्किल के अंतर्गत आने वाले 81 गांवों में भवनों की सुरक्षा स्थिति का सर्वे कराया जा रहा है। जांच के दौरान खतरनाक और रहने के लिहाज से असुरक्षित पाए जाने वाले भवनों को खाली कराने के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं।

भवनों की संरचना और सुरक्षा मानकों की जांच

सर्वे के दौरान भवनों की संरचना, निर्माण की स्थिति और सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है। जिन मकानों को रहने के लिए असुरक्षित पाया जा रहा है, उनके बाहर खाली करने संबंधी नोटिस चस्पा किए जा रहे हैं। भवन मालिकों और वहां रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए सामान्यतः 7 से 14 दिन का समय दिया जा रहा है।

प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के बाद भी यदि असुरक्षित भवन खाली नहीं किए गए तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर भवन को सील करने या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी की जा सकती है।

घनी आबादी वाले गांवों पर विशेष फोकस

अभियान के तहत सदरपुर, निठारी, मामूरा, सलारपुर और भंगेल जैसे घनी आबादी वाले इलाकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन क्षेत्रों में बिना पर्याप्त सुरक्षा मानकों के बहुमंजिला निर्माण और पुराने जर्जर भवनों की शिकायतें सामने आती रही हैं।

मामूरा में शुरुआती कार्रवाई के दौरान नौ से अधिक भवनों पर खाली करने के नोटिस लगाए जा चुके हैं। इसके अलावा सेक्टर-31 के सी-ब्लॉक में स्थित 128 जनता/EWS फ्लैटों को भी जर्जर स्थिति के कारण खाली कराने का नोटिस जारी किया गया है।

नोटिस की जानकारी पुलिस को भी भेजी जा रही

प्राधिकरण की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी वंदना त्रिपाठी के अनुसार, जिन भवनों पर नोटिस लगाए जा रहे हैं, उनकी जानकारी स्थानीय पुलिस को भी उपलब्ध कराई जा रही है। निर्धारित अवधि में भवन खाली नहीं होने की स्थिति में पुलिस की सहायता से लोगों को वहां से हटाया जा सकता है। इसके बाद भवन को सील करने अथवा ध्वस्त करने जैसी कार्रवाई की जाएगी।

2018 के सर्वे में चिन्हित हुए थे 1,757 भवन

नोएडा में जर्जर और अवैध निर्माण के खिलाफ सर्वे कोई पहली कार्रवाई नहीं है। वर्ष 2018 में शाहबेरी हादसे के बाद भी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में असुरक्षित एवं अवैध भवनों का सर्वे कराया गया था। उस दौरान करीब 1,757 भवन चिन्हित किए गए थे।

अब सत्य निकेतन हादसे के बाद प्राधिकरण ने पुराने मामलों की दोबारा समीक्षा के साथ नए भवनों की भी जांच शुरू कर दी है। अभियान का उद्देश्य संभावित हादसों को रोकना और असुरक्षित भवनों में रह रहे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि, कार्रवाई की जद में आने वाले परिवारों के पुनर्वास और उनके लिए सुरक्षित वैकल्पिक आवास की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर मांग की जा रही है कि भवन खाली कराने से पहले प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षित स्थान की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।


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