तीन दशकों की समाजसेवा से बदली हजारों जिंदगियां, महेश सक्सेना का प्रेरणादायक सफर | नोएडा लोक मंच

टेन न्यूज नेटवर्क

Noida News (10/09/2026): नोएडा में समाजसेवा और जनहित के मुद्दों की आवाज के रूप में पिछले करीब तीन दशकों से सक्रिय नोएडा लोक मंच के महासचिव महेश सक्सेना ने TEN Talks पॉडकास्ट में अपने जीवन, संघर्ष और समाजसेवा के लंबे सफर को साझा किया। शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, पर्यावरण, आपदा राहत और सामाजिक कल्याण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले महेश सक्सेना ने बताया कि किस तरह एक सफल औद्योगिक करियर के बाद उन्होंने समाज के लिए काम करने को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया।

नोएडा में उन्हें कई लोग “गांधी ऑफ नोएडा” के नाम से भी संबोधित करते हैं। करीब 29 वर्षों से सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय महेश सक्सेना के नेतृत्व और प्रयासों से नोएडा लोक मंच ने कई जनहित से जुड़े प्रकल्पों और अभियानों को आगे बढ़ाया। नोएडा पब्लिक लाइब्रेरी, संस्कार अध्ययन केंद्र स्कूल, नोएडा दवा बैंक और सेक्टर-94 स्थित अंतिम निवास जैसे प्रकल्पों के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जरूरतों से जुड़े लोगों तक सहायता पहुंचाने का प्रयास किया गया।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई, गोल्ड मेडल और उद्योग की दुनिया

महेश सक्सेना मूल रूप से बुंदेलखंड के जालौन जिले के उरई से आते हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता कलेक्ट्रेट के राजस्व विभाग में क्लर्क थे। साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उन्होंने पढ़ाई को हमेशा प्राथमिकता दी। उन्होंने सरकारी स्कूलों से प्रारंभिक शिक्षा हासिल की और इसके बाद DAV कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 1971 में उन्होंने HBTI कानपुर से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने बताया कि वह अपनी शाखा में गोल्ड मेडलिस्ट रहे।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वर्ष 1972 में पटपड़गंज में अपनी फैक्ट्री शुरू की। इसके बाद उनका औद्योगिक सफर नोएडा तक पहुंचा और उन्होंने यहां भी उद्योग के क्षेत्र में काम किया। हालांकि, उद्योग की दुनिया में सफल होने के बावजूद उनके भीतर सामाजिक मुद्दों को लेकर संवेदनशीलता लगातार बनी रही।

भाई की मौत ने बदल दी जिंदगी की दिशा

महेश सक्सेना के मुताबिक, वर्ष 1994 उनके जीवन का ऐसा पड़ाव था जिसने उनकी सोच और प्राथमिकताओं को पूरी तरह बदल दिया। उनके छोटे भाई राजेश का बीमारी के चलते निधन हो गया। इस घटना ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने महसूस किया कि जीवन का उद्देश्य केवल पैसा कमाना और व्यक्तिगत सफलता हासिल करना नहीं हो सकता। इसी दौर में उन्होंने समाज के लिए कुछ अलग करने का निर्णय लिया। इसके बाद धीरे-धीरे उनका झुकाव सामाजिक कार्यों की ओर बढ़ता गया और उन्होंने अपना अधिक से अधिक समय जनहित के मुद्दों के लिए देना शुरू किया।

भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज से शुरू हुआ सामाजिक सफर

महेश सक्सेना ने बताया कि सामाजिक क्षेत्र में उनकी सक्रियता की शुरुआत भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान से हुई। वर्ष 1994 से 1997 के बीच उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ कई आंदोलनों में हिस्सा लिया। उनका कहना है कि उद्योग चलाने के दौरान उन्होंने रिश्वत नहीं देने का संकल्प लिया था। इसके बाद उन्होंने भ्रष्टाचार और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठानी शुरू की। समय के साथ उनका सामाजिक काम नोएडा के स्थानीय मुद्दों तक पहुंचा। अधिकारियों की कार्यप्रणाली, भ्रष्टाचार, पर्यावरण और प्रदूषण जैसे मुद्दों को लेकर उन्होंने विभिन्न मंचों पर आवाज उठाई।

शाहदरा ड्रेन का प्रदूषण मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट तक

नोएडा और आसपास के पर्यावरण से जुड़े मुद्दों में शाहदरा ड्रेन में प्रदूषित पानी का मामला भी महत्वपूर्ण रहा। महेश सक्सेना ने बताया कि प्रदूषण के खिलाफ उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर आवाज उठाई और यह मामला आगे चलकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। उनके अनुसार, जनहित से जुड़े ऐसे मामलों में केवल शिकायत करने के बजाय तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर मुद्दे को संबंधित संस्थाओं और न्यायालय के सामने रखना जरूरी है।

गौतमबुद्ध नगर जिले को बचाने की लड़ाई

महेश सक्सेना ने बातचीत के दौरान गौतमबुद्ध नगर जिले से जुड़े एक महत्वपूर्ण संघर्ष का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब जिले को समाप्त कर दोबारा गाजियाबाद में मिलाए जाने की स्थिति बनी, तब नोएडा लोक मंच ने इस फैसले के खिलाफ आवाज उठाई। इस दौरान संगठन की ओर से दस्तावेज और राजस्व से जुड़े आंकड़े जुटाए गए और कानूनी स्तर पर भी मामले को आगे बढ़ाया गया। महेश सक्सेना के मुताबिक, नोएडा की आर्थिक और राजस्व क्षमता से जुड़े आंकड़ों को अदालत के सामने रखा गया। उनका मानना है कि तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर की गई इस लड़ाई ने गौतम बुद्ध नगर जिले को बनाए रखने के प्रयास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

1998 में नोएडा लोक मंच की स्थापना

वर्ष 1998 में नोएडा लोक मंच की स्थापना के बाद महेश सक्सेना का सामाजिक कार्य एक संगठित रूप में आगे बढ़ा। संस्थापक और महासचिव के रूप में उन्होंने संगठन के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सहायता और जनहित के विभिन्न कार्यों को आगे बढ़ाया। नोएडा पब्लिक लाइब्रेरी के माध्यम से लोगों को अध्ययन और ज्ञान के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया। वहीं संस्कार अध्ययन केंद्र स्कूल के जरिए शिक्षा के क्षेत्र में काम किया गया। स्वास्थ्य के क्षेत्र में नोएडा दवा बैंक के माध्यम से जरूरतमंद लोगों तक दवाएं पहुंचाने की पहल की गई। इसी तरह सेक्टर-94 स्थित अंतिम निवास भी सामाजिक जरूरत से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रकल्प बताया जाता है।

आपदा के समय भी आगे आया नोएडा लोक मंच

महेश सक्सेना ने बताया कि प्राकृतिक आपदाओं और राष्ट्रीय संकट के समय भी नोएडा लोक मंच ने राहत कार्यों में योगदान दिया।

कारगिल युद्ध, गुजरात के भुज में आए भूकंप, ओडिशा में चक्रवात, सुनामी, बिहार की बाढ़ और उत्तराखंड में आई आपदाओं के दौरान संगठन से जुड़े लोगों ने राहत और सहायता के कार्यों में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि इन सभी प्रयासों में नोएडा के आम लोगों का सहयोग सबसे महत्वपूर्ण रहा। उनके अनुसार, किसी भी सामाजिक संगठन की वास्तविक ताकत उसके पदाधिकारियों से ज्यादा समाज के लोगों के सहयोग में होती है।

“जनता का, जनता के लिए और जनता द्वारा” संगठन

नोएडा लोक मंच के काम करने के तरीके को बताते हुए महेश सक्सेना ने संगठन को “जनता का, जनता के लिए और जनता द्वारा” संगठन बताया।

उनका कहना है कि सामाजिक कार्य किसी एक व्यक्ति के प्रयास से लंबे समय तक नहीं चल सकते। इसके लिए समाज के अलग-अलग वर्गों का सहयोग, स्वयंसेवकों की भागीदारी और लोगों का विश्वास जरूरी है।

उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि लगातार लोगों के बीच काम करने और जरूरतमंदों की मदद करने से उन्हें एक तरह की आध्यात्मिक शक्ति मिली, जिसने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

79 साल की उम्र में भी समाज के लिए सक्रिय

महेश सक्सेना ने अपने 79 वर्ष के जीवन के अनुभवों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में उद्योग, संघर्ष, सामाजिक आंदोलन और सेवा—इन सभी पड़ावों को करीब से देखा है।

एक सफल औद्योगिक करियर से समाजसेवा की ओर उनका सफर केवल व्यक्तिगत बदलाव की कहानी नहीं है, बल्कि यह भी बताता है कि किसी शहर के विकास में सामाजिक संगठनों और नागरिक भागीदारी की क्या भूमिका हो सकती है। करीब तीन दशक लंबे इस सफर में शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य, पर्यावरण से लेकर भ्रष्टाचार विरोधी अभियान और आपदा राहत से लेकर जनहित के मुद्दों तक महेश सक्सेना और नोएडा लोक मंच की सक्रियता नोएडा के सामाजिक परिदृश्य का एक हिस्सा रही है।

TEN Talks में अपनी कहानी साझा करते हुए महेश सक्सेना ने नई पीढ़ी के लिए भी एक संदेश दिया कि समाज के लिए काम करने के लिए केवल संसाधन ही जरूरी नहीं हैं, बल्कि इच्छाशक्ति, निरंतरता और लोगों के प्रति संवेदनशीलता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उनका करीब तीन दशक का सफर इस बात की मिसाल पेश करता है कि एक व्यक्ति अपने पेशेवर जीवन की सफलता के बाद भी समाज के लिए अपने अनुभव और ऊर्जा का इस्तेमाल कर सकता है और जनहित के मुद्दों को लगातार आवाज दे सकता है।।


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