पत्नी ने दिया लिवर, बेटी ने दी किडनी, यथार्थ अस्पताल में मरीज को मिली नई जिंदगी
टेन न्यूज नेटवर्क
Noida News (09/09/2026): चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए यथार्थ अस्पताल, नोएडा एक्सटेंशन में डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने 50 वर्षीय मरीज का सिमल्टेनियस लिवर-किडनी ट्रांसप्लांट (SLKT) सफलतापूर्वक किया। मरीज एंड-स्टेज किडनी डिजीज के साथ-साथ क्रॉनिक लिवर डिजीज से भी पीड़ित था। जटिल परिस्थितियों के बावजूद सफल प्रत्यारोपण के बाद मरीज का लिवर और किडनी दोनों अच्छी तरह काम कर रहे हैं।
मरीज की किडनी की बीमारी अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी और इसके उपचार के लिए ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प बचा था। करीब एक साल पहले दाहिनी किडनी में ट्यूमर होने के कारण उसकी राइट रेडिकल नेफ्रेक्टॉमी की गई थी। इसके बाद मरीज क्रॉनिक किडनी डिजीज से पीड़ित हो गया और सप्ताह में तीन बार नियमित हेमोडायलिसिस पर निर्भर था।
मरीज की स्थिति को और जटिल बनाने वाली कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी थीं। उसे टाइप-2 डायबिटीज, डायबिटिक नेफ्रोपैथी एवं न्यूरोपैथी, हाई ब्लड प्रेशर और सिंगल-वेसल कोरोनरी आर्टरी डिजीज थी। इसके अलावा हेपेटाइटिस-B संक्रमण के कारण वह क्रॉनिक लिवर डिजीज से भी जूझ रहा था।
मरीज का लिवर ट्रांसप्लांट विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि यह ABO-incompatible transplant था। मरीज का ब्लड ग्रुप O-पॉजिटिव, जबकि लिवर डोनर यानी उसकी पत्नी का ब्लड ग्रुप B-पॉजिटिव था। इसके अलावा डोनर के लिवर में फैटी लिवर की समस्या भी थी। वहीं, किडनी के लिए मरीज की बेटी ने अपनी एक किडनी डोनेट की। किडनी डोनर और मरीज का ब्लड ग्रुप समान था।
डॉक्टरों ने मरीज की विस्तृत जांच और उसकी मेडिकल स्थिति का आकलन करने के बाद दोनों अंगों का एक साथ प्रत्यारोपण करने का निर्णय लिया। पूरी ट्रांसप्लांट सर्जरी में करीब 15 से 16 घंटे लगे। इस दौरान लिवर ट्रांसप्लांट, किडनी ट्रांसप्लांट, एनेस्थीसिया, ब्लड बैंक और क्रिटिकल केयर टीमों ने आपसी समन्वय के साथ काम किया।
किडनी ट्रांसप्लांट के दौरान भी डॉक्टरों के सामने एक बड़ी चुनौती थी। डोनर की बाईं किडनी में दो रीनल आर्टरीज थीं। इसके लिए डॉक्टरों ने पेंटालून एनास्टोमोसिस तकनीक के जरिए जटिल वैस्कुलर रिकंस्ट्रक्शन किया, ताकि किडनी में पर्याप्त आर्टेरियल ब्लड फ्लो सुनिश्चित किया जा सके।
प्री-ऑपरेटिव CT एंजियोग्राफी में यह भी सामने आया कि मरीज की दाईं इलियक रक्त वाहिकाएं वैस्कुलर एनास्टोमोसिस के लिए उपयुक्त नहीं थीं। इसके बाद सर्जिकल प्लानिंग के तहत रिकंस्ट्रक्ट की गई किडनी को मरीज की बाईं इलियक रक्त वाहिकाओं से जोड़ा गया।
अस्पताल के अनुसार, लिवर और किडनी दोनों डोनरों की सर्जरी लेप्रोस्कोपिक तकनीक से की गई। ऑपरेशन के बाद मरीज में रिकवरी के अच्छे संकेत दिखाई दिए और प्रत्यारोपित लिवर एवं किडनी दोनों के ग्राफ्ट ने अच्छी तरह काम करना शुरू कर दिया।
डॉक्टरों ने टीमवर्क को बताया सफलता की कुंजी
डॉ. विशाल कुमार चौरसिया, ग्रुप डायरेक्टर–लिवर ट्रांसप्लांट, GI एवं रोबोटिक सर्जरी ने कहा कि एक साथ लिवर और किडनी प्रत्यारोपण सबसे जटिल ट्रांसप्लांट प्रक्रियाओं में से एक है। इसमें सावधानीपूर्वक योजना, उच्च स्तर की विशेषज्ञता और विभिन्न टीमों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में ABO-incompatible लिवर ट्रांसप्लांट और मरीज की कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं ने चुनौती को और बढ़ा दिया था।
डॉ. प्रग्रेश देसाई, सीनियर डायरेक्टर एवं हेड–यूरोलॉजी, रीनल ट्रांसप्लांट, रोबोटिक्स एवं यूरो-ऑन्कोलॉजी ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट लिवर ट्रांसप्लांट के साथ उसी सर्जरी के दौरान किया गया। डोनर की किडनी में दो रीनल आर्टरीज होने के कारण जटिल वैस्कुलर रिकंस्ट्रक्शन करना पड़ा। उन्होंने बताया कि मरीज की दाईं इलियक वेसल्स उपयुक्त नहीं होने के कारण किडनी को बाईं इलियक वेसल्स से जोड़ा गया।
डॉ. उपेन्द्र सिंह, सीनियर कंसल्टेंट एवं हेड–नेफ्रोलॉजी ने कहा कि मरीज क्रॉनिक किडनी डिजीज के कारण हेमोडायलिसिस पर था और साथ ही क्रॉनिक लिवर फेल्योर से भी पीड़ित था। दोनों अंगों का एक साथ प्रत्यारोपण कर दोनों गंभीर समस्याओं का उपचार संभव हुआ। उन्होंने कहा कि ट्रांसप्लांट से पहले की तैयारी, सर्जरी के दौरान प्रभावी प्रबंधन और ऑपरेशन के बाद करीबी निगरानी सफल परिणाम के लिए बेहद महत्वपूर्ण रही।
डॉ. प्रह्लाद अग्रवाल, COO–नोएडा एक्सटेंशन ने कहा कि यह सफल परिणाम अस्पताल में बेहद जटिल चिकित्सा प्रक्रियाओं को करने की क्षमता को दर्शाता है। इस तरह की ट्रांसप्लांट सर्जरी के लिए क्लिनिकल विशेषज्ञता के साथ-साथ मजबूत प्रशासनिक और ऑपरेशनल सहयोग भी जरूरी होता है।
यथार्थ अस्पताल के लिए यह सफल प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण चिकित्सा उपलब्धि मानी जा रही है। यह लिवर और किडनी के उन्नत प्रत्यारोपण, क्रिटिकल केयर और व्यापक ट्रांसप्लांट प्रबंधन के क्षेत्र में अस्पताल की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है।
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