सत्य निकेतन हादसे के बाद पीजी में रहने वाले छात्रों से मिले मंत्री आशीष सूद, दिया कार्रवाई का भरोसा

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (08 September 2026): सत्य निकेतन में हुई हालिया त्रासदी के बाद दिल्ली सरकार राजधानी में संचालित पेइंग गेस्ट यानी पीजी, छात्रावासों और कोचिंग संस्थानों के लिए नया नियामक ढांचा तैयार करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। दिल्ली के शिक्षा एवं शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने कहा कि छात्रों की सुरक्षा, बेहतर आवासीय सुविधाएं और संस्थानों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सरकार जल्द ठोस कदम उठाएगी। उन्होंने बताया कि अगले एक से डेढ़ महीने के भीतर पीजी और कोचिंग सेंटरों को नियमित करने के लिए नई नीति या आवश्यक कानून तैयार किया जा सकता है।

मंत्री आशीष सूद के अनुसार, शहरी विकास विभाग के तहत हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में पीजी संचालन से जुड़े मौजूदा नियमों की समीक्षा की गई है। इसके साथ ही नए छात्रावासों के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने और छात्रों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक समिति का गठन किया गया है। इसी प्रक्रिया के तहत सरकार ने विभिन्न हितधारकों और छात्रों के साथ व्यापक चर्चा शुरू की है। दिल्ली विश्वविद्यालय, आईपी यूनिवर्सिटी और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के करीब 30 से 40 छात्रों से सीधे बातचीत कर पीजी में रहने के दौरान आने वाली समस्याओं, सुरक्षा संबंधी चिंताओं और जरूरी कानूनी सुधारों पर सुझाव लिए गए।

आशीष सूद ने कहा कि छात्र इन सुविधाओं के वास्तविक उपयोगकर्ता हैं, इसलिए नई नीति बनाने में उनकी राय को विशेष महत्व दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में भी पीजी आवासों और कोचिंग संस्थानों के लिए प्रभावी नियामक व्यवस्था तैयार करने पर विस्तार से चर्चा की गई थी। सरकार का उद्देश्य केवल नियम बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि राजधानी में संचालित पीजी और अन्य छात्र आवास सुरक्षा मानकों का पालन करें और किसी भी तरह की लापरवाही होने पर जिम्मेदारी तय की जा सके।

सरकार ने दिल्ली में छात्रावासों की कमी को दूर करने के लिए नए हॉस्टलों के निर्माण और विस्तार को बढ़ावा देने की योजना भी बनाई है। इसके लिए फ्लोर एरिया रेशियो यानी एफएआर बढ़ाने का फैसला किया गया है, जिससे अधिक छात्रावास विकसित किए जा सकें। मंत्री ने कहा कि हर साल देश के अलग-अलग राज्यों से दो लाख से अधिक छात्र पढ़ाई के लिए दिल्ली आते हैं, लेकिन सुरक्षित और व्यवस्थित छात्र आवासों की उपलब्धता अभी भी जरूरत के मुकाबले कम है। सरकार इस अंतर को कम करने के लिए निजी और संस्थागत स्तर पर नए छात्रावासों के निर्माण को प्रोत्साहित करेगी।

बैठक में छात्रों ने पीजी संचालकों की मनमानी और मौजूदा नियमों के सही तरीके से पालन न होने का मुद्दा भी उठाया। छात्रों ने शिकायत की कि कई जगह मकान मालिक मनमाने ढंग से किराया बढ़ाते हैं, भारी सुरक्षा राशि लेते हैं और समय पर वापस नहीं करते, जबकि बिजली समेत अन्य सुविधाओं के लिए अलग से शुल्क वसूला जाता है। छात्रों ने असुरक्षित भवनों और नियमों की अनदेखी करने वाले पीजी संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। सरकार ने संकेत दिए हैं कि नई नीति में इन समस्याओं को शामिल करते हुए सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह छात्र आवास व्यवस्था तैयार की जाएगी, ताकि दिल्ली पढ़ाई के लिए आने वाले लाखों छात्रों के लिए अधिक सुरक्षित शहर बन सके।


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