72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार: अनंत नाग को मिलेगा दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, 22 सितंबर को एकता नगर में होगा समारोह
टेन न्यूज़ नेटवर्क
National News (20 September 2026): दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को वर्ष 2024 का दादासाहेब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। भारत सरकार ने 16 सितंबर 2026 को उनके नाम की घोषणा की थी। राष्ट्रपति 22 सितंबर 2026 को गुजरात के एकता नगर में आयोजित समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान करेंगी। अनंत नाग ने छह भारतीय भाषाओं की 300 से अधिक फिल्मों में अलग-अलग भूमिकाएं निभाई हैं। उन्होंने कन्नड़ फिल्म ‘संकल्प’ से अभिनय की शुरुआत की थी, जबकि ‘अंकुर’ से हिंदी सिनेमा में कदम रखा। उनके लंबे फिल्मी सफर में लोकप्रिय धारावाहिक ‘मालगुडी डेज’ भी शामिल है। उन्हें पांच फिल्मफेयर पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए पांच कर्नाटक राज्य पुरस्कार मिल चुके हैं। भारत सरकार ने 2025 में उन्हें पद्म भूषण से भी सम्मानित किया था।
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का समारोह 22 सितंबर को गुजरात के एकता नगर में होगा, जहां वर्ष 2024 में प्रमाणित फिल्मों की सिनेमाई उपलब्धियों को सम्मानित किया जाएगा। इन पुरस्कारों के विजेताओं की घोषणा 18 जुलाई 2026 को तीनों जूरी के अध्यक्षों ने की थी। इस बार सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार ‘आर्टिकल 370’ को मिला है, जबकि इसी फिल्म के लिए यामी गौतम को मुख्य भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का सम्मान दिया गया है। मुख्य भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार ‘ब्रमायुगम’ के लिए ममूटी और ‘चंदू चैंपियन’ के लिए कार्तिक आर्यन को संयुक्त रूप से दिया गया है।
सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का पुरस्कार तमिल फिल्म ‘अमरन’ के लिए राजकुमार पेरियासामी को मिला है। ‘कल्कि 2898 एडी’ को संपूर्ण मनोरंजन प्रदान करने वाली सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म चुना गया है। वहीं, ‘भक्षक’ के लिए संजय मिश्रा को सहायक भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला है। सहायक भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का सम्मान ‘महाराजा’ के लिए सच्चाना नामीदास और ‘मिथ्या’ के लिए रोपाश्री वर्काडी को संयुक्त रूप से दिया गया है। ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ के लिए रणदीप हुड्डा को निर्देशक की सर्वश्रेष्ठ पहली फिल्म का पुरस्कार मिला है।
गैर-फीचर फिल्म वर्ग में ‘भंगार’ को सर्वश्रेष्ठ गैर-फीचर फिल्म चुना गया है और ‘आंगेन’ के निर्देशक रवि राज मुर्मू को निर्देशक की सर्वश्रेष्ठ पहली फिल्म का पुरस्कार मिला है। ‘राम-नामी’ को सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र का सम्मान दिया गया है, जबकि ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी – एकता का प्रतीक’ के लिए आनंद एल. राय को सर्वश्रेष्ठ निर्देशन गैर-फीचर का पुरस्कार मिला है। इस संस्करण में पहली बार किसी संथाली फिल्म को गैर-फीचर फिल्म वर्ग में सम्मान मिला है। गढ़वाली फिल्म ‘ढोली’ और तुलु फिल्म ‘इम्बू’ को भी उनकी भाषाई पहचान के तहत सम्मानित किया गया है।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार देश में सिनेमा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिए जाने वाले प्रमुख राष्ट्रीय सम्मानों में शामिल हैं। इनकी शुरुआत 1954 में हुई थी और पहले संस्करण में वर्ष 1953 की फिल्मों को सम्मानित किया गया था। पुरस्कारों की शुरुआत फीचर फिल्मों, वृत्तचित्र फिल्मों और बाल फिल्मों की तीन श्रेणियों से हुई थी। मराठी फिल्म ‘श्यामची आई’ को सर्वश्रेष्ठ अखिल भारतीय फीचर फिल्म के लिए प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल मिला था। ‘महाबलीपुरम’ को सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री फिल्म के लिए प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल और ‘दो बीघा जमीन’ को सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट प्रदान किया गया था।
समय के साथ राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का दायरा लगातार बढ़ता गया। वर्ष 1967 की फिल्मों के लिए पहली बार कलाकारों और तकनीशियनों के लिए अलग-अलग पुरस्कार शुरू किए गए। 1968 में उत्तम कुमार और नरगिस को पहला सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला। 1969 में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार की शुरुआत हुई और इसकी पहली विजेता देविका रानी बनीं। वर्ष 1973 में फिल्म महोत्सव निदेशालय ने पुरस्कारों के आयोजन और संचालन की जिम्मेदारी संभाली, जबकि 2022 में फिल्म महोत्सव निदेशालय का एनएफडीसी में विलय कर दिया गया।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों को तीन प्रमुख वर्गों में आयोजित किया जाता है, जिनमें फीचर फिल्म, गैर-फीचर फिल्म और सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ लेखन शामिल हैं। इसके अलावा दादासाहेब फाल्के पुरस्कार को भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान के रूप में विशेष स्थान प्राप्त है। फीचर फिल्म वर्ग में सर्वश्रेष्ठ फिल्म, निर्देशन, अभिनय, बाल फिल्म, सिनेमाटोग्राफी, संगीत निर्देशन और कॉस्ट्यूम डिजाइन जैसी श्रेणियां शामिल हैं। गैर-फीचर वर्ग में डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिल्म और एनीमेशन के साथ कला एवं संस्कृति, नरेशन या वॉयस ओवर और पटकथा जैसी श्रेणियों में भी सम्मान दिए जाते हैं।
इन पुरस्कारों का उद्देश्य कलात्मक और तकनीकी उत्कृष्टता के साथ सामाजिक प्रासंगिकता वाली फिल्मों के निर्माण को प्रोत्साहित करना है। पुरस्कार देश के अलग-अलग क्षेत्रों की संस्कृतियों को समझने और उनकी सराहना करने में भी मदद करते हैं। साथ ही, सिनेमा को एक कला के रूप में समझने, उसके अध्ययन और आलोचनात्मक मूल्यांकन को बढ़ावा देने के लिए सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ लेखन की श्रेणी रखी गई है। इस वर्ग में सर्वश्रेष्ठ पुस्तक और सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक को सम्मानित किया जाता है।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में भाषाई विविधता को भी विशेष महत्व दिया जाता है। संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध प्रत्येक भाषा में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए पुरस्कार दिया जाता है। आठवीं अनुसूची के बाहर की भाषाओं में बनी फिल्मों को विशेष पुरस्कारों के माध्यम से पहचान दी जाती है। 72वें संस्करण में मराठी, संथाली, तमिल, मलयालम, तेलुगु और कन्नड़ सहित कई भाषाओं की फिल्मों को सम्मान मिला है। तुलु और गढ़वाली फिल्मों को भी इस संस्करण में पहचान मिली है।
पुरस्कारों के चयन के लिए हर साल पिछले कैलेंडर वर्ष में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी सीबीएफसी से प्रमाणित फिल्मों की प्रविष्टियां आमंत्रित की जाती हैं। इसके बाद फीचर, गैर-फीचर और सिनेमा पर लेखन के लिए अलग-अलग जूरी गठित की जाती हैं। फीचर फिल्मों के मूल्यांकन के लिए 57वें संस्करण से दो-स्तरीय व्यवस्था लागू है, जिसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से आई फिल्मों को पहले पांच क्षेत्रीय पैनल शॉर्टलिस्ट करते हैं और उसके बाद केंद्रीय पैनल अंतिम पुरस्कार विजेताओं का चयन करता है। 72वें संस्करण में फीचर फिल्म जूरी की अध्यक्षता जयराज, गैर-फीचर फिल्म जूरी की अध्यक्षता असीम सिन्हा और सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ लेखन जूरी की अध्यक्षता ए. चंद्रशेखर ने की।
पुरस्कारों के लिए पात्रता की भी कुछ निर्धारित शर्तें हैं। फिल्मों का संबंधित पुरस्कार वर्ष के दौरान सीबीएफसी से प्रमाणित होना और उनमें अंग्रेजी उपशीर्षक होना जरूरी है। फीचर फिल्म की अवधि 72 मिनट से अधिक होनी चाहिए। डब की गई, रीमेक या पहले प्रस्तुत की जा चुकी री-एडिटेड प्रतियां पात्र नहीं होतीं। वहीं, दादासाहेब फाल्के पुरस्कार के लिए सामान्य तौर पर प्रविष्टियां आमंत्रित नहीं की जातीं, बल्कि प्रतिष्ठित सिनेमा हस्तियों की विशेष समिति विजेता के नाम की सिफारिश करती है।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का आयोजन अब केवल राजधानी दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने भविष्य के संस्करणों को देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में आयोजित करने की नीति अपनाई है। 72वें पुरस्कारों का एकता नगर में आयोजन इसी पहल का हिस्सा है। मंत्रालय के अनुसार, इसका उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों में मौजूद सिनेमाई प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराना और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को आगे बढ़ाना है। इस संस्करण में एक तरफ संथाली सिनेमा को पहली बार गैर-फीचर वर्ग में पहचान मिली है, वहीं दूसरी तरफ अनंत नाग जैसे वरिष्ठ कलाकार को भारतीय सिनेमा में उनके लंबे योगदान के लिए दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है।
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