सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD के सर्वे पर कांग्रेस का बड़ा सवाल, राष्ट्रीय सचिव ने बताया ‘कागजी सर्वे’
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (07 September 2026): दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद अब एमसीडी के खतरनाक इमारतों से जुड़े सर्वे पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। AICC के राष्ट्रीय सचिव ने आरोप लगाया कि मानसून से पहले एमसीडी ने सर्वे जारी कर दावा किया था कि इस साल दिल्ली में केवल 19 घर खतरनाक श्रेणी में हैं। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा हैरान करने वाला है, क्योंकि सर्वे में करीब 32 लाख घरों को चिन्हित किए जाने के बावजूद सिर्फ 19 घरों को खतरनाक बताया गया। सत्य निकेतन में गिरी इमारत को भी एमसीडी के अनुसार खतरनाक घोषित नहीं किया गया था।
AICC राष्ट्रीय सचिव ने आरोप लगाया कि इससे एमसीडी के सर्वे की प्रक्रिया और उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। उनका कहना है कि अगर इतनी बड़ी संख्या में इमारतों और घरों का सर्वे किया गया, तो आखिर दिल्ली जैसे पुराने और घनी आबादी वाले शहर में सिर्फ 19 इमारतें ही खतरनाक कैसे पाई गईं। उन्होंने कहा कि सत्य निकेतन हादसे ने यह सवाल और गंभीर कर दिया है कि क्या प्रशासन वास्तव में जमीन पर इमारतों की स्थिति की जांच करता है या फिर केवल कागजों में सर्वे की औपचारिकता पूरी की जाती है।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि नगर निगम ने वर्ष 2023 से 2026 के बीच करीब एक करोड़ इमारतों का सर्वे किया, लेकिन इनमें से केवल 103 इमारतों को खतरनाक श्रेणी में रखा गया। उन्होंने इन आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली में लगातार पुराने भवनों, जर्जर मकानों और निर्माण की स्थिति को लेकर सवाल उठते रहे हैं, ऐसे में इतने कम भवनों को खतरनाक घोषित किया जाना जांच का विषय है। सत्य निकेतन हादसे के बाद अब खतरनाक इमारतों की पहचान और प्रशासनिक निगरानी को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है।
AICC राष्ट्रीय सचिव ने भाजपा सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार गरीबों की झुग्गी-झोपड़ियों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई करती है, जबकि दूसरी तरफ बड़े बिल्डरों और प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में नरमी बरती जाती है। उन्होंने कहा कि सरकार और नगर निगम को यह स्पष्ट करना चाहिए कि खतरनाक इमारतों की पहचान के लिए किए गए सर्वे में आखिर किन मानकों का इस्तेमाल किया गया और सत्य निकेतन जैसी इमारत को समय रहते जोखिम वाली श्रेणी में क्यों नहीं रखा गया।
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में जर्जर और असुरक्षित इमारतों का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। विपक्ष लगातार एमसीडी और दिल्ली सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है और खतरनाक भवनों का नए सिरे से व्यापक सर्वे कराने की मांग कर रहा है। अब देखना होगा कि हादसे के बाद प्रशासन दिल्ली की पुरानी और जर्जर इमारतों की पहचान, उनकी तकनीकी जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
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