शिक्षक बदलेंगे तो बदलेगा भारत का भविष्य, राष्ट्र निर्माण में भूमिका पहचानें: Dr. R. S. Rai | Bennett University

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (06 September 2026): भारत में शिक्षा के भविष्य, निजी विश्वविद्यालयों की बढ़ती भूमिका, शोध में सार्वजनिक-निजी भागीदारी और ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क के दीर्घकालिक विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे भारत शिक्षा एक्सपो इनिशिएटिव – सीनियर एजुकेशनिस्ट्स राउंड-टेबल में प्रमुखता से उठे। शिक्षक दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित इस उच्चस्तरीय संवाद में देश की शिक्षा व्यवस्था और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के भविष्य पर व्यापक चर्चा हुई।

‘विकसित भारत के लिए शिक्षक बतौर कैटलिस्ट’ रही राउंड-टेबल की थीम

इंडिया एक्सपो मार्ट एंड सेंटर ने टेन न्यूज नेटवर्क के सहयोग से इस राउंड-टेबल का आयोजन किया। कार्यक्रम की थीम “विकसित भारत के लिए शिक्षक बतौर कैटलिस्ट” रखी गई। इसमें देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और स्कूलों के वरिष्ठ शिक्षाविदों एवं संस्थागत प्रमुखों ने भाग लिया।

इस दौरान शिक्षा में गुणवत्ता, शोध, नवाचार, शिक्षक सशक्तिकरण तथा सार्वजनिक-निजी सहयोग को मजबूत करने जैसे विषयों पर विचार साझा किए गए।

राउंड-टेबल की अध्यक्षता डॉ. एच. चतुर्वेदी, प्रो-चांसलर, आईआईएलएम यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा और सुदीप सरकार, सीईओ, इंडिया एक्सपो मार्ट ने की। दोनों वरिष्ठ नेतृत्वकर्ताओं ने भारत की शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने, अकादमिक संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग बढ़ाने तथा शोध एवं नवाचार को नई गति देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उनके नेतृत्व में हुए इस संवाद में शिक्षकों की बदलती भूमिका और विकसित भारत के निर्माण में शिक्षा की रणनीतिक भूमिका पर महत्वपूर्ण विचार सामने आए।

राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अहम: डॉ. आर.एस. राय

बेनिट यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर डिस्टेंस लर्निंग के डायरेक्टर डॉ. आर.एस. राय ने कहा कि भारत की वैज्ञानिक और सामरिक ताकत के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने सी.वी. रमन, होमी जहांगीर भाभा और पी.सी. महालनोबिस जैसे महान वैज्ञानिकों का उदाहरण देते हुए कहा कि ज्ञान, शिक्षा और संस्थागत योगदान के माध्यम से इन महान व्यक्तित्वों ने देश की प्रगति को नई दिशा दी।

डॉ. राय ने कहा कि विकसित राष्ट्र बनने के लिए केवल आर्थिक विकास पर्याप्त नहीं है। इसके लिए मजबूत सामाजिक व्यवस्था, बेहतर बुनियादी ढांचा, सुदृढ़ मैक्रोइकोनॉमिक व्यवस्था और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी आवश्यक है। ऐसे में प्रत्येक शिक्षक को आत्ममंथन करना होगा कि वह अपने स्तर पर राष्ट्र निर्माण में कितना प्रभावी योगदान दे सकता है।

शिक्षक की भूमिका केवल कक्षा तक सीमित नहीं

डॉ. राय ने कहा कि प्रत्येक शिक्षक के पास अपने विद्यार्थियों को बेहतर दिशा देने और उनमें जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का अवसर होता है। यदि हर शिक्षक अपने स्तर पर सकारात्मक योगदान देता है, तो ये छोटे-छोटे प्रयास मिलकर एक बड़े राष्ट्रीय मिशन का हिस्सा बन सकते हैं।

उन्होंने कहा कि शिक्षक की भूमिका केवल कक्षा तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह विद्यार्थियों के माध्यम से समाज और देश के भविष्य को प्रभावित करता है।

‘बेस्ट’ नहीं, ‘नेक्स्ट’ को पहचानें शिक्षक

डॉ. राय ने शिक्षकों से केवल ‘बेस्ट’ की तलाश करने के बजाय ‘नेक्स्ट’ को पहचानने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को यह समझना होगा कि भविष्य की जरूरतें क्या हैं और विद्यार्थियों को आने वाली चुनौतियों के लिए किस प्रकार तैयार किया जाए।

उन्होंने आचार्य चाणक्य और चंद्रगुप्त मौर्य का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में शिक्षक सदैव राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण आधार रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को यह विचार करना चाहिए कि वह राष्ट्र के विकास में क्या योगदान दे सकता है। योगदान छोटा हो या बड़ा, उसकी भावना और उद्देश्य महत्वपूर्ण हैं। यदि शिक्षक विद्यार्थियों में इसी जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण की सोच को विकसित करें, तो शिक्षा देश के विकास की सबसे प्रभावी शक्ति बन सकती है।

वरिष्ठ शिक्षाविदों ने साझा किए विचार

राउंड-टेबल में डॉ. के. मल्लिकार्जुन बाबू, गलगोटियास यूनिवर्सिटी; प्रो. सिबाराम खारा, शारदा यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा; ब्रिगेडियर डॉ. राकेश गुप्ता, GIMS, ग्रेटर नोएडा; प्रोफेसर विवेक कुमार, एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा; कंचन कुमारी, दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल, नॉलेज पार्क; डॉ. आर.एस. राय, बेनेट यूनिवर्सिटी; डॉ. पंकज गुप्ता, ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी, हिसार; डॉ. अभिलाषा गौतम, आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन; और उज्ज्वल प्रताप, गलगोटियास यूनिवर्सिटी; गजानन माली, संस्थापक, टेन न्यूज नेटवर्क सहित कई वरिष्ठ शिक्षाविद एवं संस्थागत प्रतिनिधि शामिल हुए।

वरिष्ठ अकादमिक नेतृत्व की इस भागीदारी ने शिक्षकों की भूमिका, उच्च शिक्षा, शोध, नवाचार और सार्वजनिक-निजी सहयोग के माध्यम से भारत के विकास एजेंडे को आगे बढ़ाने पर विविध दृष्टिकोण सामने रखे।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नवाचार को मजबूत करने पर जोर

चर्चा में यह व्यापक संदेश सामने आया कि विकसित भारत की यात्रा केवल शिक्षा की पहुंच बढ़ाने से पूरी नहीं होगी। इसके लिए शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, शोध एवं नवाचार को मजबूती, शिक्षकों का सशक्तिकरण और तकनीक आधारित बदलाव को शिक्षा व्यवस्था की हर परत तक पहुंचाना भी आवश्यक होगा।

राउंड-टेबल में सामने आए विचारों ने इस बात को रेखांकित किया कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाले व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि वे भविष्य की पीढ़ी को दिशा देने और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को गति देने वाले महत्वपूर्ण कैटलिस्ट हैं।


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