अव्यान मौत मामले में कोर्ट का सख्त रुख, दोनों सुपरवाइजर की जमानत याचिका खारिज

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (21/08/2026): कलाधाम सोसायटी में बोरिंग के लिए खोदे गए पानी से भरे गहरे गड्ढे में डूबने से छह वर्षीय बच्चे अव्यान की मौत के मामले में अदालत ने आरोपित दो सुपरवाइजर को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने आकाश कुमार और अनुज कुमार उर्फ जोनी की जमानत याचिका खारिज करते हुए घटना को गंभीर माना। अदालत ने प्रथमदृष्टया माना कि यह मामला केवल सामान्य लापरवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी होने के बावजूद उसकी अनदेखी किए जाने से जुड़ा प्रतीत होता है।

आवासीय परिसर में खुला छोड़ दिया गया था गहरा गड्ढा

घटना 25 जुलाई 2026 की है। बताया गया कि कलाधाम सोसायटी में छह वर्षीय अव्यान अपने साथी लवकुश के साथ खेल रहा था। इसी दौरान वह बोरिंग के लिए खोदे गए पानी से भरे गहरे गड्ढे में जा गिरा। काफी गहराई होने के कारण बच्चा पानी में डूब गया और उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। पीड़ित पिता की शिकायत पर पुलिस ने मामले में ठेकेदार मनोज जैन के अलावा सुपरवाइजर आकाश कुमार और अनुज कुमार उर्फ जोनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

सुरक्षा इंतजाम नहीं होने पर उठे सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता रजनीश यादव और शिखर यादव ने अदालत के समक्ष आरोपितों की भूमिका और घटनास्थल की परिस्थितियों को प्रमुखता से रखा। अभियोजन के अनुसार, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की ओर से संबंधित फर्म को बोरिंग का काम सौंपा गया था। आरोप है कि काम के लिए खोदे गए गड्ढे को खुला छोड़ दिया गया था। मौके पर न तो पर्याप्त बैरिकेडिंग की गई थी, न चेतावनी संबंधी बोर्ड लगाए गए थे और न ही लोगों, खासकर बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अन्य जरूरी इंतजाम किए गए थे।

अभियोजन ने अदालत को बताया कि दोनों सुपरवाइजर संविदा आधार पर कार्यरत थे और कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी भी उनकी भूमिका का हिस्सा थी। ऐसे में खुले और पानी से भरे गड्ढे के संबंध में पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए जाने को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

बच्चों के खेलने वाले स्थान पर सुरक्षा को लेकर कोर्ट की टिप्पणी

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के साथ केस डायरी में उपलब्ध तथ्यों का भी अवलोकन किया। कोर्ट ने विशेष रूप से इस तथ्य को महत्वपूर्ण माना कि घटनास्थल एक आवासीय सोसायटी के भीतर था, जहां बच्चों और अन्य निवासियों की नियमित आवाजाही रहती है। अदालत के अनुसार, आवासीय क्षेत्र में गहरे और पानी से भरे गड्ढे को बिना सुरक्षा घेरे, ढक्कन, बैरिकेडिंग या चेतावनी संकेत के खुला छोड़ना लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है। ऐसी स्थिति में सुरक्षा उपायों की अनदेखी को केवल साधारण चूक मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

‘जानकारी होते हुए सुरक्षा मानकों की अनदेखी’ को गंभीर माना

कोर्ट ने अपने आदेश में प्रथमदृष्टया माना कि आरोपितों का कृत्य महज लापरवाही का मामला नहीं दिखाई देता। अदालत ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों से यह प्रतीत होता है कि सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं की जानकारी होने के बावजूद मानकों का पालन नहीं किया गया।

इसी आधार पर अदालत ने दोनों सुपरवाइजर की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। आदेश के बाद मामले में सुरक्षा मानकों और कार्यस्थल की निगरानी को लेकर जिम्मेदारी का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। अव्यान की मौत ने आवासीय क्षेत्रों में निर्माण और बोरिंग कार्य के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। खासकर ऐसे स्थानों पर जहां बच्चों की आवाजाही रहती है, खुले गड्ढों की घेराबंदी, चेतावनी संकेत और अन्य सुरक्षा उपायों को लेकर जिम्मेदारी तय करने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।


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