राष्ट्रचिंतन की 36वीं गोष्ठी में AI और क्वांटम पर मंथन, तकनीकी युग में आध्यात्मिकता के संतुलन पर जोर
टेन न्यूज नेटवर्क
Greater Noida News (11/08/2026): कैलाश इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग, नॉलेज पार्क-3, ग्रेटर नोएडा के सभागार में राष्ट्रचिंतना की 36वीं गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का विषय “तकनीकी के युग में आध्यात्मिकता: AI और क्वांटम” रहा। कार्यक्रम में तकनीकी विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम सिद्धांत और आध्यात्मिकता के बीच संबंधों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। गोष्ठी का संचालन प्रो. विवेक कुमार ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत विषय की पृष्ठभूमि रखते हुए हुई। प्रो. विवेक कुमार ने कहा कि आध्यात्मिकता का मूल उद्देश्य व्यक्ति का स्वयं को पहचानना और अपने अस्तित्व को ब्रह्मांड से जोड़कर देखना है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच मनुष्य के लिए यह समझना आवश्यक है कि तकनीकी प्रगति के साथ आत्मबोध और मानवीय मूल्यों का संतुलन भी बना रहे।
गोष्ठी के मुख्य वक्ता एवं GI4QC फोरम के निदेशक आनंद प्रकाश ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि AI मूल रूप से इंजीनियरों द्वारा विकसित की गई मशीनी बुद्धिमत्ता है। उन्होंने मानव बुद्धि और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बीच अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि जिस प्रकार ईश्वर की सृष्टि से बढ़कर कोई रचना नहीं हो सकती, उसी प्रकार मनुष्य द्वारा विकसित इंजीनियर्ड इंटेलिजेंस भी मानव चेतना और बुद्धिमत्ता से ऊपर नहीं हो सकती।
आनंद प्रकाश ने अपने संबोधन में पदार्थ के ड्यूल नेचर (Dual Nature) के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए इसे आध्यात्मिक चिंतन से जोड़कर समझाया। उन्होंने कहा कि विज्ञान और अध्यात्म को अलग-अलग खांचों में देखने के बजाय इनके बीच मौजूद संभावित संबंधों को समझने की आवश्यकता है। बदलते तकनीकी दौर में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आध्यात्मिक समझ भी व्यक्ति को व्यापक दृष्टिकोण प्रदान कर सकती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के निदेशक संदीप गोयल ने तकनीक के संतुलित उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि योगीराज कृष्ण ने “कण-कण में मैं हूं और मुझमें कण-कण है” के माध्यम से समग्र अस्तित्व की अवधारणा को समझाया है। उन्होंने कहा कि तकनीक मानव जीवन को बेहतर और सुविधाजनक बनाने का माध्यम है, इसलिए इसका इस्तेमाल एक सहायक के रूप में किया जाना चाहिए। मनुष्य को तकनीक का उपयोग करना चाहिए, न कि स्वयं तकनीक का दास बन जाना चाहिए।
गोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि AI और क्वांटम जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के विकास के साथ मानव जीवन में उनके प्रभाव को समझना जरूरी है। तकनीकी क्षमताओं के विस्तार के साथ विवेक, नैतिकता, आत्मचिंतन और मानवीय संवेदनाओं को बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में राजेंद्र सोनी, संदीप सिंह, डॉ. बी.के. श्रीवास्तव, सुरजीत उपाध्याय, एन.सी. शर्मा, अरुण सिंह, धनेश शर्मा, साक्षी मावी, आकांक्षा सहित संस्थान के शिक्षक-शिक्षिकाएं, विद्यार्थी और अन्य प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। उपस्थित लोगों ने AI, क्वांटम तकनीक और आध्यात्मिकता जैसे समसामयिक विषय पर हुए विचार-विमर्श को उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया।
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