ग्रैंड वेनिस मॉल केस में ED का बड़ा एक्शन, सतिंदर सिंह भसीन की 389 संपत्तियां कुर्क

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (21/07/2026): प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित रियल एस्टेट निवेश घोटाले और धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्रैंड वेनिस मॉल से जुड़े सतिंदर सिंह भसीन और उनसे संबद्ध कंपनियों की 389 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। इन परिसंपत्तियों का सरकारी मूल्यांकन लगभग 240.03 करोड़ रुपये है, जबकि इनकी मौजूदा बाजार कीमत करीब 700 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

ईडी के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियों में ग्रेटर नोएडा स्थित ग्रैंड वेनिस मॉल की 384 व्यावसायिक इकाइयां शामिल हैं। इसके अलावा गोवा में स्थित पांच अचल संपत्तियों को भी कार्रवाई के दायरे में लाया गया है। जांच एजेंसी का कहना है कि इन संपत्तियों का संबंध सतिंदर सिंह भसीन और उनकी विभिन्न कंपनियों से है।

ईडी की जांच उत्तर प्रदेश और दिल्ली में दर्ज कई आपराधिक मामलों के आधार पर शुरू हुई। जांच के दौरान एजेंसी को ऐसे साक्ष्य मिले, जिनसे संकेत मिला कि ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर क्षेत्र में विकसित ग्रैंड वेनेजिया कमर्शियल कॉम्प्लेक्स परियोजना के जरिए निवेशकों को आकर्षक रिटर्न और समय पर व्यावसायिक इकाइयों का कब्जा देने का भरोसा दिया गया। आरोप है कि बड़ी संख्या में लोगों से निवेश कराया गया, लेकिन न तो तय समय पर संपत्तियों का कब्जा दिया गया और न ही निवेश की गई राशि लौटाई गई।

जांच एजेंसी के मुताबिक, परियोजना से प्राप्त धनराशि को विभिन्न कंपनियों के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया गया, ताकि धन के वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सके। ईडी का दावा है कि कुछ कंपनियों का इस्तेमाल कथित तौर पर वित्तीय लेन-देन को जटिल बनाकर धन के प्रवाह को छिपाने के लिए किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि इसी धन से गोवा में संपत्तियां खरीदी गईं। एजेंसी का आरोप है कि भले ही संबंधित कंपनियों को अलग-अलग इकाइयों के रूप में प्रस्तुत किया गया हो, लेकिन उनका वास्तविक संचालन और नियंत्रण सतिंदर सिंह भसीन के हाथों में था।

ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि ग्रैंड वेनिस मॉल से जुड़ी करीब 4.25 लाख वर्ग फुट व्यावसायिक संपत्ति का हस्तांतरण कथित रूप से संदिग्ध, जाली और पूर्व दिनांकित दस्तावेजों के आधार पर किया गया। एजेंसी इस पहलू की भी विस्तृत जांच कर रही है कि इन समझौतों के माध्यम से संपत्तियों का स्वामित्व किस प्रकार बदला गया।

यह मामला पहली बार ईडी की कार्रवाई के दायरे में नहीं आया है। अप्रैल 2025 में एजेंसी ने सतिंदर सिंह भसीन और उनके सहयोगियों के कई आवासीय एवं व्यावसायिक ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और 36 लाख रुपये नकद बरामद किए गए थे। साथ ही एक कंपनी का बैंक खाता भी फ्रीज किया गया था।

इसके बाद जून 2025 में ईडी ने करीब 27 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कथित तौर पर निवेशकों से करीब 1300 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई। इस मामले में निवेशकों की शिकायतों के आधार पर विभिन्न थानों में 80 से अधिक एफआईआर दर्ज हैं। इन्हीं मामलों को आधार बनाकर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी और बाद में सतिंदर सिंह भसीन को गिरफ्तार भी किया था।

ईडी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। एजेंसी वित्तीय लेन-देन, संपत्तियों के स्वामित्व और संबंधित कंपनियों की भूमिका की गहन पड़ताल कर रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस कथित घोटाले से जुड़े अन्य वित्तीय पहलुओं और संपत्तियों का भी खुलासा हो सकता है।


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