100 दिवसीय ‘टीबी मुक्त भारत’ अभियान शुरू: पहचान, उपचार और तकनीक से तेज होगी जंग – अनुप्रिया पटेल, MoS
टेन न्यूज नेटवर्क
Greater Noida News (25/03/2026): विश्व क्षय रोग दिवस-2026 के अवसर पर 24 मार्च 2026 को गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने मुख्य अतिथि के रूप में “100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान” का शुभारंभ किया। इस दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह, दादरी विधायक तेजपाल नागर, एमएलसी श्री चंद शर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे, जहां टीबी उन्मूलन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत की गई।
विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की मौजूदगी में 100 दिवसीय राष्ट्रव्यापी “टीबी मुक्त भारत” अभियान का शुभारंभ किया गया। इस दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने अभियान के उद्देश्यों और सरकार की रणनीति को विस्तार से प्रस्तुत किया।
अनुप्रिया पटेल ने कहा कि भारत सरकार लंबे समय से देश को टीबी मुक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है और जेपी नड्डा के नेतृत्व में राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने बताया कि इस 100 दिवसीय अभियान के माध्यम से देशभर में सघन स्तर पर टीबी की पहचान, रोकथाम और उपचार को और तेज किया जाएगा, जिसके परिणामों का मूल्यांकन अभियान समाप्त होने के बाद किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि टीबी एक गंभीर बीमारी है, जिसकी रोकथाम और उपचार दोनों संभव हैं, लेकिन इसके बावजूद यह विश्व में मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल है। वर्ल्ड टीबी रिपोर्ट 2025 के अनुसार, भारत में टीबी का बोझ सबसे अधिक है, जिसे देखते हुए सरकार ने इसे सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा है।

मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बताया कि सरकार द्वारा जांच, उपचार और रोकथाम के सभी स्तरों पर व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया गया है। देश में मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स नेटवर्क का विस्तार किया गया है और ट्रूनैट जैसी स्वदेशी मशीनों के माध्यम से टीबी की पुष्टि की जा रही है। इसके साथ ही एआई आधारित एक्स-रे तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है। सभी टीबी मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निःशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिनमें ड्रग-रेजिस्टेंट मरीज भी शामिल हैं। उनके लिए 6 महीने का बीपीएएल (BPaL) रेजिमेन लागू किया गया है।
पोषण सहायता के तहत प्रत्येक टीबी मरीज को हर महीने 1000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खाते में दी जा रही है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप टीबी के नए मामलों में 21 प्रतिशत और मृत्यु दर में 25 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जबकि उपचार कवरेज बढ़कर 92 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वय के साथ-साथ जनभागीदारी इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत है। देशभर में 24 से अधिक मंत्रालय, 30 हजार से ज्यादा जनप्रतिनिधि और 7 लाख से अधिक ‘निक्षय मित्र’ इस अभियान से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा ‘माय भारत’ के 2 लाख से अधिक युवा स्वयंसेवक भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पूर्व में चलाए गए सघन अभियानों के दौरान 20 करोड़ से अधिक लोगों की जांच की गई, जिसमें 32 लाख टीबी मरीजों की पहचान हुई। इनमें से लगभग 11 लाख ऐसे मरीज थे, जिनमें कोई स्पष्ट लक्षण नहीं थे, लेकिन वे संक्रमण फैलाने की क्षमता रखते थे। समय रहते उनकी पहचान कर उपचार शुरू किया गया, जिससे संक्रमण के प्रसार को रोका जा सका।
देश में अब तक 67,933 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद कई गांव और शहरी वार्ड ऐसे हैं, जहां टीबी का खतरा अभी भी बना हुआ है। नए अभियान के तहत 1,58,000 उच्च जोखिम वाले गांवों और शहरी वार्डों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। यहां टीबी स्क्रीनिंग के साथ-साथ ब्लड प्रेशर, शुगर, हीमोग्लोबिन और बीएमआई जैसी जांचों के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि ‘टीबी मुक्त भारत’ ऐप में ‘खुशी’ नामक एआई आधारित चैटबॉट जोड़ा जा रहा है, जो मरीजों और आम नागरिकों को जांच, उपचार, पोषण सहायता और अन्य सुविधाओं से संबंधित जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराएगा। इसके माध्यम से ‘निक्षय मित्र’ भी आसानी से पंजीकरण कर सकेंगे।

अंत में अनुप्रिया पटेल ने युवाओं, स्वास्थ्यकर्मियों, स्वयंसेवी संगठनों और मीडिया से अपील की कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं और टीबी से जुड़े सामाजिक कलंक को समाप्त करने में सहयोग करें, ताकि अधिक से अधिक मरीज समय पर उपचार से जुड़ सकें।
100 दिवसीय ‘टीबी मुक्त भारत’ अभियान देश को इस गंभीर बीमारी से मुक्त करने की दिशा में एक संगठित और प्रभावी पहल के रूप में सामने आया है। पहचान, उपचार, तकनीकी नवाचार और जनभागीदारी के समन्वय से यह अभियान न केवल टीबी के मामलों में कमी लाने में सहायक होगा, बल्कि जागरूकता बढ़ाकर सामाजिक कलंक को भी दूर करेगा। सरकार, स्वास्थ्यकर्मियों, स्वयंसेवकों और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयासों से भारत को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
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