बड़ी खबर: 2029 से लागू हो सकता है महिला आरक्षण, सीटें 50% बढ़ाने की तैयारी

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (25 March 2026): केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार देश में महिला आरक्षण को तय समय 2034 के बजाय 2029 से लागू करने की तैयारी में जुटी है। इसको लेकर सरकार ने व्यापक स्तर पर राजनीतिक दलों से बातचीत शुरू कर दी है। प्रस्तावित योजना के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने की प्रक्रिया तेज की जा रही है, जिससे आने वाले चुनावों में महिलाओं की भागीदारी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

इस पूरी प्रक्रिया का आधार नारी शक्ति वंदन अधिनियम है, जिसे लागू करने के लिए सरकार अब समयसीमा में बदलाव पर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार चाहती है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले ही यह व्यवस्था लागू हो जाए। इसके लिए जरूरी संवैधानिक संशोधनों और प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा करने की योजना बनाई जा रही है।

गृह मंत्री अमित शाह इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं। 23 मार्च को उन्होंने NCP-SP, शिवसेना (UBT), AIMIM और YSRCP के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। हालांकि BRS अंतिम समय में सूचना मिलने के कारण इस बैठक में शामिल नहीं हो सकी।

बैठक में सुप्रिया सुले, अरविंद सावंत, असदुद्दीन ओवैसी और मिधुन रेड्डी जैसे नेता शामिल हुए। इन नेताओं ने परिसीमन, सीटों के पुनर्वितरण और राज्यों पर संभावित प्रभाव को लेकर कई सवाल उठाए। सरकार ने उन्हें भरोसा दिलाया कि सभी पक्षों की चिंताओं को ध्यान में रखकर ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।

सरकार की योजना के तहत “50% स्ट्रेट जैकेट फॉर्मूला” लागू करने का प्रस्ताव है। इसके अनुसार लोकसभा और विधानसभा सीटों में सीधे 50% की बढ़ोतरी की जाएगी। इससे लोकसभा की कुल सीटें बढ़कर करीब 813-814 तक पहुंच सकती हैं। इस बढ़ी हुई संख्या में से 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, जिससे संसद में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से बढ़ सकती है।

इस प्रस्ताव में यह भी स्पष्ट किया गया है कि महिलाओं के लिए आरक्षित 33% सीटों के भीतर SC/ST आरक्षण भी लागू रहेगा। यानी अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की महिलाओं को भी उनके हिस्से का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा। इससे सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व के संतुलन को बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

सरकार पहले 2027 तक जनगणना पूरी होने और 2028 तक परिसीमन प्रक्रिया खत्म होने की उम्मीद कर रही थी। लेकिन अब नई योजना के तहत 2011 की जनगणना को आधार मानकर आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इसके बाद लोकसभा और विधानसभा दोनों के लिए एक साथ परिसीमन प्रक्रिया शुरू की जा सकती है, जिससे पूरे देश में एक समान ढांचा लागू किया जा सके।

हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर दक्षिण भारत के कई राजनीतिक दलों ने आपत्ति जताई है। DMK, TDP और YSRCP जैसे दलों का कहना है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से दक्षिणी राज्यों को नुकसान हो सकता है। उनका तर्क है कि परिवार नियोजन को बेहतर तरीके से लागू करने वाले राज्यों को इस आधार पर दंडित नहीं किया जाना चाहिए।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इस मुद्दे पर विरोध जताते हुए संयुक्त कार्रवाई समिति (JAC) का गठन भी किया था। उन्होंने गैर-बीजेपी दलों को साथ लाकर इस विषय पर व्यापक चर्चा की पहल की। वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान सहित कई नेताओं को इस मंच पर आमंत्रित किया गया, जिससे यह मुद्दा राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गया।

इस बीच, दिल्ली हज समिति की अध्यक्ष कौसर जहां ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए इसे ऐतिहासिक कदम बताया है। उनका कहना है कि 2029 से महिला आरक्षण लागू होने से देश की आधी आबादी को सशक्त बनाने में मदद मिलेगी और राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। कुल मिलाकर, यह प्रस्ताव जहां एक ओर राजनीतिक संतुलन और प्रतिनिधित्व को नया रूप दे सकता है, वहीं इसके क्रियान्वयन को लेकर अभी भी कई सवाल और चुनौतियां बाकी हैं।


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