क्या मिला था सांसद डॉ. महेश शर्मा की चिट्ठी का जवाब? युवराज मौत मामले में बड़ा खुलासा
टेन न्यूज नेटवर्क
NOIDA News (21 जनवरी, 2026): नोएडा के सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में अब सांसद डॉ. महेश शर्मा (Dr Mahesh Sharma, MP) द्वारा पहले भेजे गए पत्र को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। टेन न्यूज नेटवर्क की टीम ने जब डॉ. महेश शर्मा से सीधे यह सवाल किया कि सितंबर में नोएडा प्राधिकरण (Noida Authority) को लिखी गई उनकी चिट्ठी पर कोई जवाब मिला था या नहीं, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राधिकरण की ओर से उस पत्र का एक्नॉलेजमेंट प्राप्त हुआ था।
डॉ. महेश शर्मा ने बताया कि उनके संसदीय क्षेत्र से जब भी किसी कार्यकर्ता या आम नागरिक के माध्यम से कोई सूचना या समस्या सामने आती है, तो उसे संबंधित विभाग या अधिकारी को तत्काल अग्रेषित कर दिया जाता है। सांसद कार्यालय का एक अलग विभाग इन मामलों का फॉलो-अप भी करता है और संबंधित विभाग से यह अपेक्षा की जाती है कि की गई कार्रवाई की जानकारी वापस दी जाए। उन्होंने कहा कि इस मामले में भी प्राधिकरण को पत्र भेजा गया था और उसकी प्राप्ति की पुष्टि (Acknowledgement) आई थी।
सांसद ने आगे बताया कि घटना के बाद उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें भरोसा दिलाया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले में सख्त कदम उठाए हैं। नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ. लोकेश एम को पद से हटाया जा चुका है और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित कर दी गई है।
डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि सरकार की मंशा स्पष्ट है और जांच के बाद जो भी व्यक्ति या विभाग जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
गौरतलब है कि, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, भारत सरकार द्वारा जारी कार्यालयी ज्ञापन के मुताबिक, सांसद द्वारा किसी संलग्न या अधीनस्थ कार्यालय, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, वित्तीय संस्थानों (राष्ट्रीयकृत बैंकों सहित) अथवा किसी मंत्रालय/विभाग/संगठन के किसी प्रभाग या शाखा के प्रभारी को संबोधित किसी भी प्रकार के संचार का उत्तर संबंधित अधिकारी द्वारा स्वयं दिया जाना चाहिए। नियमित और सामान्य मामलों में संबंधित अधिकारी अपने स्तर पर उपयुक्त उत्तर भेज सकता है। हालांकि, यदि मामला नीति से संबंधित हो, तो यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि संसद सदस्य को भेजा जाने वाला उत्तर न्यूनतम रूप से अवर सचिव स्तर के अधिकारी द्वारा जारी किया जाए। साथ ही, ऐसे सभी उत्तर केवल शालीन, विनम्र एवं औपचारिक पत्र के रूप में ही प्रेषित किए जाएं, ताकि संसदीय मर्यादा और प्रशासनिक शिष्टाचार बनाए रखा जा सके।
ऐसे में अब बड़ा सवाल यह है कि, चार महीने पूर्व जब गौतमबुद्ध नगर के सांसद डॉ महेश शर्मा ने पत्र के माध्यम से नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों को इस गंभीर समस्या से अवगत कराया, तो उसके बाद इसके समाधान की दिशा में क्या कदम उठाए गए? और क्या सांसद को पुनः इस मामले की अपडेट दी गई?
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