युवराज मेहता मौत मामला: मौके पर मौजूद रेस्क्यू एजेंसियों की भूमिका पर उठे सवाल

टेन न्यूज नेटवर्क

NOIDA News (19 जनवरी, 2026): नोएडा के सेक्टर-150 में युवा इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में अब जांच का दायरा केवल प्रशासनिक फैसलों तक सीमित नहीं रहा है। घटना के दौरान मौके पर मौजूद कमिश्नरेट पुलिस, अग्निशमन विभाग और राज्य आपदा मोचन बल की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि सभी रेस्क्यू एजेंसियों की मौजूदगी के बावजूद समय रहते समन्वित और प्रभावी बचाव नहीं हो सका।

बताया जा रहा है कि हादसे की सूचना मिलने के बाद पुलिस, दमकल और SDRF की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं, लेकिन बचाव कार्य शुरू होने में समय लगा और जिम्मेदारी तय करने में असमंजस की स्थिति बनी रही। इसी देरी को युवराज की जान बचाने में सबसे बड़ी बाधा माना जा रहा है। लोगों का सवाल है कि जब प्रशिक्षित बल मौके पर मौजूद थे, तब एक जीवित व्यक्ति को बचाया क्यों नहीं जा सका।

हालांकि शहरी क्षेत्रों में खासकर NCR में आपात स्थितियों से निपटने के लिए तैनात एजेंसियों से तेज निर्णय और स्पष्ट नेतृत्व की अपेक्षा की जाती है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि संसाधनों की उपलब्धता के बावजूद आपसी समन्वय और त्वरित कार्रवाई की कमी गंभीर परिणाम ला सकती है।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि यदि यही घटना किसी ग्रामीण क्षेत्र में होती, तो संभवतः आसपास मौजूद लोग बिना देर किए जान जोखिम में डालकर बचाव का प्रयास करते। इससे शहरी आपदा प्रबंधन प्रणाली की वास्तविक तैयारियों और जमीनी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

फिलहाल, यह मामला केवल एक दुखद हादसा नहीं रह गया है, बल्कि यह जांच का अहम बिंदु बनता जा रहा है कि आपात स्थिति में विभिन्न रेस्क्यू एजेंसियों के बीच समन्वय किस स्तर पर काम करता है। SIT जांच में अब इन विभागों की भूमिका और जिम्मेदारी की भी पड़ताल होने की संभावना जताई जा रही है।


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