नोएडा (23 मार्च 2025): स्वस्थ जीवन जीने के लिए व्यक्ति को अपने खान-पान और रहन-सहन के नियम निर्धारित करने से पहले अपनी प्रकृति को समझना आवश्यक है। दुर्भाग्यवश, दुनिया में ऐसे बहुत कम आयुर्वेदिक केंद्र हैं, जहाँ व्यक्ति को उसकी प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली अपनाने के निर्देश दिए जाते हैं। जबकि यह एक वैश्विक आवश्यकता है। सौभाग्य की बात है कि नोएडा में भारतीय धरोहर संस्था ने इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए देश के पहले प्रकृति परीक्षण और परामर्श केंद्र की स्थापना की है।
इस केंद्र में केंद्रीय आयुर्वेद शोध संस्थान द्वारा विकसित प्रकृति परीक्षण पोर्टल के माध्यम से प्रशिक्षित वैद्यों द्वारा परामर्श प्रदान किया जाता है। इस महत्वपूर्ण विषय पर भारतीय धरोहर के महामंत्री श्री विजय शंकर तिवारी ने ग्रेटर नोएडा में आयोजित सात दिवसीय भागवत कथा के समापन से पूर्व अपने विचार व्यक्त किए।
भागवत कथा में आचार्य पवन नंदन जी ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा जरासंध के पराजय के बाद उसके पुत्र सहदेव को राजा बनाने की कथा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि पांडवों ने पितरों की तृप्ति के लिए राजसूय यज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें भोजन व्यवस्था की जिम्मेदारी भीम को सौंपी गई। आचार्य जी ने यह भी बताया कि किसी भी पारिवारिक आयोजन में भोजन की व्यवस्था ऐसे व्यक्ति को दी जानी चाहिए जो खाने-पीने का शौकीन हो, जिससे उत्तम व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।
इस अवसर पर मुख्य यजमान श्री नरेश गुप्ता और दैनिक यजमान संजय सूदन, आनंद भाटी, नितिन अग्रवाल, देवीशरण शर्मा और देवाशीष गौड़, जो कि भंडारा सहयोगी भी रहे, ने व्यास पीठ का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
ग्रेटर नोएडा के डेल्टा वन स्थित कम्यूनिटी सेंटर में 17 से 23 मार्च तक आयोजित इस भागवत कथा का उद्देश्य प्राचीन भारतीय ज्ञान सम्पदा का संरक्षण, संवर्धन और निःशुल्क आयुर्वेदिक चिकित्सा को बढ़ावा देना था।
आज कथा के समापन अवसर पर भारतीय धरोहर के संरक्षक श्री प्रमोद गुप्ता, संजीव सक्सेना, डॉ. नितिन अग्रवाल, कुलदीप शर्मा, मनोज सिंघल, महामंत्री प्रमोद चौहान, कपिल कृष्ण, मुकुल गोयल, सरोज तोमर, विनीता शर्मा, ममता सिंह, पूनम अग्रवाल, रश्मि अरोड़ा, श्री ललित शर्मा, संजय सूदन, गौरव उपाध्याय, डी. के. अरोड़ा, अनुज उपाध्याय, कौशल गुप्ता एवं सतीश गुप्ता सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
भारतीय धरोहर द्वारा संचालित यह प्रकृति परीक्षण केंद्र आयुर्वेदिक चिकित्सा को वैज्ञानिक पद्धति से जोड़ने का एक अभिनव प्रयास है, जिससे लोग अपनी प्रकृति के अनुसार जीवनशैली अपनाकर स्वस्थ और संतुलित जीवन जी सकें।।
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