छठ महापर्व: एक सूर्य, एक प्रकृति, एक मानवता- सत्य, शरणागति और विश्व शांति का मार्ग
संदीप कुमार दुबे, अध्यक्ष छठी मैया फाउंडेशन
टेन न्यूज नेटवर्क
New Delhi News( 04 November 2026): छठ महापर्व को केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न रखते हुए इसे सत्य, आत्मसंयम, प्रकृति संरक्षण और विश्व मानवता के साझा संदेश के रूप में वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की पहल की जा रही है। छठी मैया फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता संदीप कुमार दुबे ने अपने विचारों के माध्यम से छठ महापर्व को विश्व शांति, धार्मिक सद्भाव और मानवीय एकता का प्रतीक बताया है।
संदीप कुमार दुबे का मानना है कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में छठ महापर्व का विशेष स्थान है। यह पर्व मनुष्य को ईश्वर की उपासना के साथ सत्य, आत्मशुद्धि, संयम, समर्पण और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भाव सिखाता है। उनका कहना है कि वर्तमान समय में जब दुनिया धर्म, जाति, संप्रदाय और सांस्कृतिक पहचान के आधार पर विभिन्न प्रकार के विभाजनों का सामना कर रही है, ऐसे में छठ महापर्व का संदेश मानवता को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने बिहार के विभिन्न गांवों में मुस्लिम परिवारों और महिलाओं द्वारा छठ महापर्व मनाए जाने के उदाहरणों का उल्लेख करते हुए इसे धार्मिक सद्भाव और सांस्कृतिक एकता की मिसाल बताया। उनके अनुसार, गोपालगंज के बैकुंठपुर क्षेत्र के शंकरपुर, जगदीशपुर और मछागर लछीराम सहित समस्तीपुर के बथुआ बुजुर्ग, सरायरंजन तथा वैशाली के लालगंज और सराय क्षेत्रों में विभिन्न समुदायों की छठ पर्व में सहभागिता के उदाहरण सामने आए हैं। यह परंपरा दर्शाती है कि अलग-अलग धार्मिक पहचान के बावजूद लोग एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करते हुए साझा सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ सकते हैं।
श्रीमद्भगवद्गीता के शरणागति संदेश से जोड़कर देखी छठ की साधना
संदीप कुमार दुबे ने छठ महापर्व की आध्यात्मिक साधना और श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए शरणागति के उपदेश के बीच आध्यात्मिक साम्य प्रस्तुत किया है। उन्होंने गीता के अठारहवें अध्याय के 66वें श्लोक ‘सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का यह उपदेश परमात्मा के प्रति पूर्ण विश्वास और समर्पण का मार्ग दिखाता है।
उनके विचार में छठ व्रती की तपस्या, संयम और श्रद्धा भी मनुष्य को अहंकार, लोभ, क्रोध और भेदभाव से ऊपर उठकर आत्मशुद्धि की प्रेरणा देती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्मों के बीच भेदभाव समाप्त करने और मानवता को प्राथमिकता देने का उनका संदेश गीता के श्लोक का शाब्दिक अनुवाद नहीं, बल्कि उससे प्रेरित एक व्यापक मानवीय और आध्यात्मिक विचार है।
एक सूर्य, एक प्रकृति और एक मानवता का संदेश
उन्होंने कहा कि सूर्य का प्रकाश किसी का धर्म नहीं पूछता, नदियों का जल जाति और संप्रदाय के आधार पर भेदभाव नहीं करता और प्रकृति सभी जीवों को समान रूप से जीवन प्रदान करती है। ऐसे में मनुष्य को भी आपसी घृणा और विभाजन से ऊपर उठकर प्रेम, सहयोग और सम्मान का भाव अपनाना चाहिए।
उन्होंने भारतीय संस्कृति के ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि संपूर्ण विश्व को एक परिवार मानने की भावना व्यवहार में भी दिखाई देनी चाहिए। छठ महापर्व के दौरान घाटों की स्वच्छता, प्रसाद की व्यवस्था, व्रतियों की सेवा और सामूहिक सहभागिता सामाजिक एकता तथा साझा उत्तरदायित्व का उदाहरण प्रस्तुत करती है।
विश्व शांति और पर्यावरण संरक्षण के लिए छठ का वैश्विक संदेश
संदीप कुमार दुबे के अनुसार, वर्तमान समय में विश्व जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय संकट, सामाजिक संघर्ष और मानवीय संवेदनाओं में कमी जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में छठ महापर्व के माध्यम से प्रकृति के सम्मान, जल संरक्षण, पारिवारिक एकता, संयम और सामाजिक सहयोग जैसे मूल्यों को वैश्विक स्तर पर प्रसारित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि दुनिया को आर्थिक और वैज्ञानिक प्रगति के साथ ऐसे आध्यात्मिक एवं मानवीय मूल्यों की भी आवश्यकता है, जो लोगों में करुणा, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करें।
‘Global Chhath – India’s Gift to the World’ के जरिए वैश्विक अभियान का संकल्प
छठी मैया फाउंडेशन के माध्यम से संदीप कुमार दुबे ने छठ महापर्व की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और मानवीय चेतना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने का संकल्प व्यक्त किया है। ‘Global Chhath – India’s Gift to the World’ की अवधारणा के जरिए वह छठ को केवल धार्मिक पर्व के रूप में नहीं, बल्कि सत्य, आत्मसंयम, प्रकृति संरक्षण, पारिवारिक सद्भाव और विश्व शांति की सांस्कृतिक विरासत के रूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं।
उन्होंने विश्व के सभी धर्मों और संस्कृतियों के लोगों से अपनी-अपनी आस्थाओं का सम्मान करते हुए दूसरों की धार्मिक भावनाओं के प्रति संवेदनशील रहने की अपील की। उनका कहना है कि मनुष्य की पहचान उसके धर्म से पहले उसके आचरण, करुणा और मानवता से होनी चाहिए।
अपने संदेश में उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर घृणा और विभाजन के बजाय सत्य, प्रेम और शांति का मार्ग अपनाने की आवश्यकता है। साथ ही, प्रकृति संरक्षण को पूरी मानवता का साझा कर्तव्य बनाने पर भी जोर दिया।
उन्होंने छठ महापर्व के व्यापक संदेश को ‘एक सूर्य, एक प्रकृति, एक मानवता’ के विचार के साथ व्यक्त करते हुए कहा कि छठ की साधना मनुष्य को स्वयं के भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाने और व्यापक मानव कल्याण के लिए प्रेरित करती है।
संदीप कुमार दुबे का संदेश है कि छठ से सत्य, सत्य से मानवता और मानवता से विश्व शांति का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
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