टेलीकॉम नेटवर्क में बड़ा बदलाव, 1 जनवरी से लागू होंगे TRAI के नए नियम

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (03 November 2026): भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने दूरसंचार क्षेत्र में इंटरकनेक्शन व्यवस्था को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने के लिए ‘दूरसंचार इंटरकनेक्शन (तीसरा संशोधन) विनियम, 2026’ जारी कर दिए हैं। ये नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। इनका उद्देश्य अलग-अलग टेलीकॉम कंपनियों के नेटवर्क के बीच बेहतर कनेक्टिविटी, पारदर्शिता और निर्बाध संचार सुनिश्चित करना है। इंटरकनेक्शन वह व्यवस्था है, जिसके जरिए दो या दो से अधिक दूरसंचार नेटवर्क आपस में जुड़ते हैं और उनके ग्राहक एक-दूसरे को कॉल, संदेश और डेटा भेज पाते हैं।

TRAI के नए नियमों के तहत इंटरकनेक्शन व्यवस्था को आधुनिक नेटवर्क आर्किटेक्चर के अनुरूप बनाया जाएगा। इसके लिए मौजूदा लॉन्ग डिस्टेंस चार्जिंग एरिया (LDCA) और शॉर्ट डिस्टेंस चार्जिंग एरिया (SDCA) स्तर की व्यवस्था से लाइसेंस्ड सर्विस एरिया (LSA) स्तर के इंटरकनेक्शन की ओर बदलाव किया जाएगा। पुराने सिस्टम पर मौजूद ट्रैफिक को अगले तीन वर्षों में चरणबद्ध तरीके से LSA स्तर के पॉइंट ऑफ इंटरकनेक्शन (POI) पर स्थानांतरित किया जाएगा। इससे नेटवर्क रूटिंग आसान होगी, नंबरिंग संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा और कॉल कनेक्टिविटी में होने वाली देरी कम करने में मदद मिलेगी।

संशोधित नियमों का एक बड़ा बदलाव आईपी आधारित इंटरकनेक्शन (IP-Based Interconnection) को बढ़ावा देना है। 1 जनवरी 2027 से नए स्थापित होने वाले सभी इंटरकनेक्शन आईपी आधारित होंगे, जबकि मौजूदा E1/TDM आधारित इंटरकनेक्शन को तीन साल के भीतर चरणबद्ध तरीके से आईपी तकनीक में बदला जाएगा। इस बदलाव से नेटवर्क की बैंडविड्थ क्षमता, कॉल की गुणवत्ता और कॉल प्रदर्शन में सुधार होगा। नए नियमों में आईपी आधारित इंटरकनेक्शन पर कॉल संभालने की क्षमता तय करने के लिए एक साथ चलने वाले सत्रों और लिंक की बैंडविड्थ को आधार बनाया गया है। साथ ही सेवा की गुणवत्ता से जुड़े मानकों का पालन भी जरूरी होगा।

TRAI ने इंटरकनेक्शन पॉइंट को स्वेच्छा से सरेंडर करने के लिए भी अलग नियामक व्यवस्था बनाई है। अब सेवा प्रदाता ट्रैफिक कम होने, किसी क्षेत्र से सेवाएं वापस लेने या ट्रैफिक को दूसरे रास्ते से भेजने जैसी परिचालन जरूरतों के आधार पर POI सरेंडर कर सकेंगे। इसके अलावा बैंक गारंटी के पुनर्मूल्यांकन की वैधता और दो पुनर्मूल्यांकनों के बीच का समय छह महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दिया गया है। आईपी आधारित इंटरकनेक्शन समेत सभी POI के लिए बैंक गारंटी की अधिकतम सीमा तय करने के तरीके में भी बदलाव किया गया है।

नए नियमों में इंटरकनेक्शन शुल्क या इंटरकनेक्शन उपयोग शुल्क के भुगतान में देरी होने पर ब्याज लगाने का प्रावधान भी शामिल किया गया है। सेवा प्रदाता आपसी सहमति से ब्याज दर तय कर सकेंगे, लेकिन यह दर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक साल की मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) से दो प्रतिशत अधिक की सीमा को पार नहीं कर सकेगी। इसके साथ ही सेवा प्रदाताओं को पुराने POI से नए LSA स्तर के POI पर ट्रैफिक स्थानांतरण और E1/TDM से IP आधारित तकनीक में बदलाव की प्रगति की रिपोर्ट देनी होगी। नियमों के उल्लंघन पर वित्तीय दंड लगाने के लिए श्रेणीबद्ध व्यवस्था भी तैयार की गई है।

TRAI ने इन संशोधनों को हितधारकों के साथ विस्तृत परामर्श के बाद अंतिम रूप दिया है। इसके लिए अप्रैल 2025 में प्रारंभिक परामर्श पत्र और नवंबर 2025 में परामर्श पत्र जारी किया गया था। प्रक्रिया के दौरान 17 हितधारकों ने अपनी टिप्पणियां और नौ ने जवाबी टिप्पणियां दीं, जबकि 28 जनवरी 2026 को ओपन हाउस डिस्कशन भी आयोजित किया गया। प्राधिकरण के मुताबिक, नए नियम टेलीकॉम कंपनियों के बीच निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा, पारदर्शिता और बेहतर नेटवर्क कनेक्टिविटी को मजबूत करेंगे। इन विनियमों का पूरा विवरण TRAI की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।


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