सुप्रीम कोर्ट की सख्ती पर CAIT ने जताई खुशी | विरोध के नाम पर कारोबार ठप करना मंजूर नहीं

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (03 November 2026): दिल्ली में लंबे समय से जारी अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शनों के मामले में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप का कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने स्वागत किया है। भाजपा सांसद एवं CAIT के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन लोकतंत्र का मौलिक अधिकार है, लेकिन इसकी आड़ में दूसरे नागरिकों की आजीविका और व्यापारिक गतिविधियों को अनिश्चितकाल तक प्रभावित नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने किराना कमेटी, दिल्ली आयरन एंड हार्डवेयर मर्चेंट्स एसोसिएशन सहित दिल्ली के विभिन्न व्यापारिक संगठनों की याचिका पर नोटिस जारी किया है। याचिका में रामलीला मैदान और जंतर-मंतर पर लंबे समय से चल रहे धरना-प्रदर्शनों के कारण आसपास के व्यावसायिक क्षेत्रों में हो रही परेशानियों को उठाया गया है। व्यापारिक संगठनों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड जय अनंत देहाद्राई ने पक्ष रखा।

न्यायालय की कार्यवाही पर प्रतिक्रिया देते हुए खंडेलवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार और नागरिकों के व्यवसाय एवं आजीविका के अधिकार के बीच संवैधानिक संतुलन की आवश्यकता को स्पष्ट करती हैं। उन्होंने कहा कि निर्धारित प्रदर्शन स्थलों पर भी किसी संगठन या समूह को अनिश्चितकाल तक कब्जा बनाए रखने का अधिकार नहीं दिया जा सकता। सार्वजनिक स्थानों का उपयोग सभी संगठनों को निष्पक्ष और समान अवसर के आधार पर मिलना चाहिए।

खंडेलवाल के अनुसार, लंबे समय तक चलने वाले धरना-प्रदर्शनों का असर केवल व्यापारियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों, रेहड़ी-पटरी वालों, दिहाड़ी मजदूरों, परिवहन क्षेत्र और आम उपभोक्ताओं को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। दिल्ली का व्यापारिक तंत्र लाखों लोगों की आजीविका का आधार है और राजधानी की आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यापारी शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विरोध के नाम पर व्यावसायिक गतिविधियों को लंबे समय तक बाधित करना उचित नहीं है। CAIT की मांग है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिसमें लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के साथ व्यापार और आम नागरिकों की आजीविका भी प्रभावित न हो।

खंडेलवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को संबंधित प्रदर्शनकारी संगठनों और राजनीतिक पक्षकारों, जिनमें सीजेपी, राहुल गांधी तथा इंडिया गठबंधन के प्रतिनिधि शामिल हैं, को भी कार्यवाही में उपयुक्त पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है। मामले में आगे सुनवाई होनी है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से निर्धारित प्रदर्शन स्थलों के उपयोग को लेकर एक संतुलित और व्यावहारिक व्यवस्था सामने आएगी। खंडेलवाल ने कहा, “विरोध-प्रदर्शन का अधिकार लोकतंत्र का मौलिक आधार है, लेकिन आजीविका का अधिकार भी उतना ही मौलिक है। एक अधिकार की रक्षा दूसरे अधिकार से अनिश्चितकाल तक समझौता करके नहीं की जा सकती।”


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