नौकरी से उद्यमिता तक: जिद और अनुशासन के दम पर जिग्नेश पंचाल ने खड़ी की J Pan Tubular Components Limited | Ten Talks

Noida News (01/10/2026): एक समय ऐसी नौकरी से शुरुआत, जिसमें मिलने वाली सैलरी से ज्यादा पेट्रोल का खर्च हो जाता था और आज अपनी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी को बड़े स्तर तक पहुंचाने का सफर। टेन न्यूज़ नेटवर्क के विशेष कार्यक्रम ‘टेन टॉक्स’ में बातचीत के दौरान J Pan Tubular Components Limited के फाउंडर जिग्नेश पंचाल ने अपने कारोबारी सफर के दौरान संघर्ष, असफलताओं, परिवार के सहयोग और लगातार मेहनत से जुड़े कई अनुभव साझा किए।

‘टेन टॉक्स’ में जिग्नेश पंचाल ने बताया कि उनके लिए सफलता की शुरुआत किसी बड़े निवेश या संसाधन से नहीं हुई, बल्कि कुछ कर गुजरने की जिद से हुई। कॉलेज में 78 प्रतिशत अंकों के साथ डिस्टिंक्शन हासिल करने के बावजूद पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें तुरंत नौकरी नहीं मिली। उस समय परिवार की चिंता और अपनी जिम्मेदारियों का एहसास उन्हें लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता रहा।

पैदल यात्रा से मिला नया विश्वास

अपने संघर्ष के शुरुआती दौर का जिक्र करते हुए जिग्नेश पंचाल ने बताया कि परिवार ने उन्हें अंबाजी तक पैदल यात्रा करने के लिए कहा। करीब 200 किलोमीटर की इस यात्रा को उन्होंने आस्था और व्यक्तिगत विश्वास से जोड़कर देखा। उनके मुताबिक, उस समय उन्होंने मन में ठाना कि अगर उन्हें नौकरी मिल गई तो यह उनके लिए एक नई शुरुआत होगी। इसके बाद उन्हें नौकरी मिली, हालांकि शुरुआती नौकरी में आमदनी बेहद कम थी।

उन्होंने बताया कि एक समय उनकी नौकरी की सैलरी 800 रुपये थी, जबकि पेट्रोल का खर्च ही उससे अधिक हो जाता था। इसके बावजूद पिता के सहयोग से उन्होंने काम जारी रखा। इसी दौरान उन्हें औद्योगिक क्षेत्र में काम करने, मशीनों को समझने और समस्याओं का समाधान खोजने का व्यावहारिक अनुभव मिला।

मशीन खराब हुई तो खुद उठाई जिम्मेदारी

अपने शुरुआती औद्योगिक अनुभवों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि एक बार एक विदेशी मशीन में खराबी आ गई थी। मशीन को ठीक करने के लिए संबंधित विशेषज्ञ का इंतजार किया जा रहा था। टीम के जाने के बाद उन्होंने खुद मशीन को ठीक करने की जिम्मेदारी उठाई। उनके वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें ऐसा करने से रोकते हुए नौकरी पर असर पड़ने की आशंका जताई, लेकिन उन्होंने चुनौती स्वीकार की।

जिग्नेश पंचाल के मुताबिक, उस दौर में उन्हें आर्थिक लाभ से ज्यादा काम सीखने और अपनी क्षमता साबित करने की प्रेरणा मिलती थी। छोटे-छोटे कामों और मुश्किल परिस्थितियों से मिले इन्हीं अनुभवों ने आगे चलकर उनके तकनीकी और कारोबारी नजरिए को मजबूत किया।

एलजी में मिला करियर को नया मोड़

इसके बाद उन्हें एलजी में काम करने का मौका मिला। उन्होंने बताया कि उस समय ग्रेटर नोएडा में आज जैसी औद्योगिक गतिविधियां नहीं थीं। उन्होंने 31 मई 1997 को दिल्ली आकर नई नौकरी की शुरुआत की। इंटरव्यू के दौरान एयर कंडीशनर को लेकर उनसे सवाल पूछा गया तो उन्होंने कागज पर उसका एक ग्राफ बनाकर तकनीकी प्रक्रिया समझाई। उनका इंटरव्यू करीब 45 सेकंड में पूरा हो गया और उन्हें नौकरी मिल गई।

एलजी में काम करते हुए उन्होंने एयर कंडीशनिंग क्षेत्र की तकनीक, कंपोनेंट्स, खरीद प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ काम करने की प्रक्रिया को करीब से समझा। इसी अनुभव ने बाद में अपना कारोबार शुरू करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

एक बातचीत ने दिखाई अपनी कंपनी शुरू करने की राह

उन्होंने बताया कि एलजी में काम करने के दौरान एक दिन कॉपर ट्यूबिंग से जुड़े एक मामले पर वरिष्ठ अधिकारी के साथ चर्चा हुई। उन्होंने अधिकारी के सामने इस क्षेत्र में काम करने की इच्छा जाहिर की। वरिष्ठ अधिकारी ने उनके प्रस्ताव को आगे रखने के लिए समय मांगा। इसके बाद कंपनी के स्तर पर चर्चा हुई और उन्हें अपने विचार को आगे बढ़ाने का अवसर मिला।

यहीं से जिग्नेश पंचाल के मन में अपना व्यवसाय शुरू करने का विचार मजबूत हुआ। उन्होंने एलजी की नौकरी छोड़कर खुद की कंपनी स्थापित करने का फैसला लिया। बड़ी कंपनी की सुरक्षित नौकरी छोड़कर छोटे स्तर पर व्यवसाय शुरू करना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने इसे जोखिम के बजाय एक नए अवसर के तौर पर देखा।

बल्लभगढ़ से शुरू हुआ सफर

कंपनी की शुरुआत के बारे में उन्होंने बताया कि उन्होंने बल्लभगढ़ में करीब 400 गज के प्लॉट से अपना कारोबार शुरू किया। शुरुआती दौर में संसाधन सीमित थे और बड़ी कंपनी से निकलकर छोटी फैक्ट्री में काम करने का अनुभव बिल्कुल अलग था।

उन्होंने कहा कि उस समय कई बार छोटे-छोटे औद्योगिक प्रतिष्ठानों में जाकर काम और ऑर्डर की संभावनाएं तलाशनी पड़ती थीं। आर्थिक सीमाओं के बावजूद उन्होंने कारोबार को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया।

‘J Pan’ नाम के पीछे भी जुड़ी है कहानी

कंपनी के नाम को लेकर उन्होंने बताया कि शुरुआत में एलजी से जुड़े नाम का इस्तेमाल करने की कोशिश हुई थी, लेकिन तकनीकी कारणों से उसमें बदलाव करना पड़ा। इसके बाद J Pan नाम सामने आया। उन्होंने बताया कि ‘J Pan’ नाम उनके पुराने कंप्यूटर पासवर्ड से जुड़ा था। एलजी से अपने अंतिम लॉगआउट के बाद उन्होंने उसी नाम को आगे की कारोबारी यात्रा से जोड़ दिया।

कंपनी की नींव में जिद के साथ अनुशासन

कंपनी की सफलता के पीछे सबसे बड़े कारण के बारे में पूछे जाने पर जिग्नेश पंचाल ने जिद और अनुशासन को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जिद केवल जीतने की नहीं, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों में हार न मानने की होनी चाहिए।

उनके अनुसार, कारोबार में गुणवत्ता, ग्राहक सेवा और तकनीक महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनके पीछे मजबूत व्यवस्था और अनुशासन होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी कंपनी की गुणवत्ता खराब होने को केवल गुणवत्ता की समस्या नहीं माना जा सकता, क्योंकि उसके पीछे कार्यप्रणाली और अनुशासन की कमी भी हो सकती है।

उन्होंने व्यवसाय की तुलना बच्चे की देखभाल से करते हुए कहा कि जिस तरह बच्चे के विकास के लिए लगातार समय और ध्यान देना पड़ता है, उसी तरह कारोबार को भी निरंतर देखभाल की जरूरत होती है।

‘फैक्ट्री मशीनों से नहीं, इंसानों से बनती है’

जिग्नेश पंचाल ने कर्मचारियों की भूमिका को भी कारोबार की सफलता से जोड़ते हुए कहा कि फैक्ट्री केवल ईंट, मशीन और बिल्डिंग से नहीं बनती। उसके पीछे काम करने वाले लोग सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। कर्मचारियों को इंसान के तौर पर समझना, उन्हें जिम्मेदारी देना और उनके साथ आगे बढ़ना व्यवसाय की मजबूत नींव तैयार करता है।

उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी ने भी व्यवसाय शुरू करने के कठिन दौर में उनका साथ दिया। नए शहर, नई भाषा और सीमित सुविधाओं के बीच परिवार के सहयोग ने उन्हें कारोबार पर ध्यान केंद्रित करने में मदद की।

कारोबार के साथ परिवार के लिए भी तय किया समय

वर्क-लाइफ बैलेंस पर उन्होंने कहा कि कारोबार की व्यस्तता के बावजूद परिवार के लिए समय निकालना जरूरी है। उन्होंने बताया कि रविवार को उन्होंने परिवार के लिए निर्धारित रखा और कोशिश की कि उस दिन व्यवसाय से दूरी बनाकर परिवार के साथ समय बिताएं।

उनके मुताबिक, लंबे कारोबारी सफर में परिवार का सहयोग व्यक्ति को मानसिक और व्यावहारिक दोनों स्तरों पर मजबूती देता है।

एयर कंडीशनर और ऑटोमोबाइल के ‘दिखाई न देने वाले’ हिस्सों पर काम

J Pan Tubular Components Limited के काम को समझाते हुए जिग्नेश पंचाल ने बताया कि कंपनी एयर कंडीशनिंग, रेफ्रिजरेशन और ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए ऐसे कंपोनेंट्स तैयार करती है, जो अंतिम उत्पाद में सीधे दिखाई नहीं देते, लेकिन उसके प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।

उन्होंने शरीर की नसों और धमनियों का उदाहरण देते हुए बताया कि ये पार्ट्स किसी सिस्टम के भीतर उसी तरह महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जैसे शरीर के अंदर की नसें और धमनियां। यदि ये कंपोनेंट सही तरीके से काम नहीं करेंगे तो पूरा सिस्टम प्रभावित हो सकता है।

विस्तार में सबसे बड़ी चुनौती रही टीम में अनुशासन लाना

कंपनी के विस्तार के दौरान सबसे बड़ी चुनौती के बारे में उन्होंने कहा कि मशीनरी और तकनीक के साथ-साथ मानवीय अनुशासन बनाए रखना सबसे कठिन काम रहा। उनके अनुसार, जापानी और कोरियाई कंपनियों की कार्यशैली में अनुशासन और प्रक्रिया को विशेष महत्व दिया जाता है। उस कार्यसंस्कृति को अपनी टीम में लागू करना लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।

उन्होंने कहा कि समय की पाबंदी, ड्रेस कोड और कार्यस्थल की निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन कराने के लिए आज भी उन्हें लगातार मेहनत करनी पड़ती है।

सरकार की नीतियों से घरेलू निर्माताओं को मिला अवसर

सरकारी नीतियों को लेकर जिग्नेश पंचाल ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से QCO और BIS मानकों के जरिए आयातित उत्पादों को नियंत्रित करने की दिशा में किए गए प्रयासों से घरेलू निर्माताओं को अवसर मिला है। उनके मुताबिक, इससे देश में उत्पादन करने वाली कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।

उन्होंने बताया कि कंपनी अब लिमिटेड कंपनी के रूप में आगे बढ़ने की दिशा में काम कर रही है और भविष्य में बड़े निवेश की योजनाएं भी हैं। हालांकि, उन्होंने जमीन की बढ़ती कीमतों को विस्तार के सामने एक चुनौती बताया।

जिग्नेश पंचाल के मुताबिक, उनका कारोबारी सफर किसी एक सफलता का परिणाम नहीं है। छोटी नौकरी, तकनीकी चुनौतियां, परिवार का सहयोग, बड़ी कंपनी का अनुभव और फिर अपनी कंपनी खड़ी करने का फैसला—इन सभी चरणों ने मिलकर J Pan Tubular Components Limited की नींव तैयार की। उनके लिए इस पूरी यात्रा का सबसे बड़ा सबक यही है कि जिद के साथ अनुशासन और लगातार मेहनत हो, तो छोटे स्तर से शुरू किया गया काम भी धीरे-धीरे बड़े कारोबार में बदल सकता है।


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