GIMS ग्रेटर नोएडा ने राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा सम्मेलन 2026 में लहराया परचम
टेन न्यूज नेटवर्क
Greater Noida News (14/09/2026): राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (GIMS), ग्रेटर नोएडा ने चिकित्सा क्षेत्र में रोगी सुरक्षा, तकनीकी नवाचार और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। संस्थान ने AIIMS नागपुर में आयोजित राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा सम्मेलन 2026 में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। सम्मेलन में देश के विभिन्न एम्स और प्रमुख चिकित्सा संस्थानों से जुड़े चिकित्सकों, विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं तथा स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
सम्मेलन में रोगी सुरक्षा को मजबूत बनाने के साथ-साथ चिकित्सा सेवाओं में तकनीक और नवाचार की भूमिका पर व्यापक चर्चा हुई। इसी क्रम में “सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रौद्योगिकी एवं नवाचार: चिकित्सा उपकरणों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लेकर क्लिनिकल इनोवेशन तक” विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में GIMS ग्रेटर नोएडा के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश गुप्ता को विषय विशेषज्ञ के तौर पर आमंत्रित किया गया।
सरकारी अस्पतालों में रोगी सुरक्षा की चुनौतियों पर GIMS निदेशक ने रखा अनुभव
विशेष सत्र के दौरान ब्रिगेडियर डॉ. राकेश गुप्ता ने अधिक रोगी भार वाले सरकारी अस्पतालों में रोगी सुरक्षा से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों और उनके समाधान पर GIMS का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में मरीजों को सेवाएं उपलब्ध कराने वाले अस्पतालों में गुणवत्ता और सुरक्षा को बनाए रखना एक सतत चुनौती है। ऐसे में तकनीक, बेहतर प्रक्रियाओं और नवाचार का प्रभावी इस्तेमाल स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के लिए विकसित किए जाने वाले तकनीकी समाधान केवल अत्याधुनिक होने तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि वे व्यावहारिक, किफायती, सुरक्षित और बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले होने चाहिए।
डॉ. गुप्ता ने इस दिशा में क्लिनिकल जरूरतों की पहचान, तकनीकी विशेषज्ञता और अस्पताल के वास्तविक अनुभव के बीच बेहतर तालमेल को आवश्यक बताया। उनके अनुसार, रोगी सुरक्षा में सुधार के लिए ऐसी तकनीकों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जिन्हें वास्तविक स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था में प्रभावी ढंग से अपनाया जा सके।
GIMS के मेडिकल इनोवेशन सेंटर की राष्ट्रीय मंच पर केस प्रस्तुति
GIMS निदेशक की प्रस्तुति के बाद संस्थान के सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन (CMI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. राहुल सिंह ने मेडिकल इनोवेशन सेंटर की कार्यप्रणाली और उसके माध्यम से विकसित किए जा रहे नवाचारों पर केस प्रस्तुति दी। प्रस्तुति में बताया गया कि GIMS का मेडिकल इनोवेशन सेंटर चिकित्सकों और तकनीकी विशेषज्ञों को एक साझा मंच पर लाने की दिशा में काम कर रहा है। इसके तहत डॉक्टरों, शोधकर्ताओं, इंजीनियरों, स्टार्टअप्स, नवप्रवर्तकों और उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इस पहल का मूल उद्देश्य अस्पतालों में प्रतिदिन सामने आने वाली वास्तविक चिकित्सा समस्याओं की पहचान करना और उनके लिए तकनीक आधारित समाधान विकसित करना है। यानी नवाचार की शुरुआत किसी काल्पनिक समस्या से नहीं, बल्कि वास्तविक क्लिनिकल आवश्यकता से होती है। प्रस्तुति के दौरान मेडिकल इनोवेशन सेंटर से संबंधित विभिन्न तकनीकों और नवाचारों को भी प्रदर्शित किया गया। इन पहलों का फोकस मरीजों की देखभाल को बेहतर बनाने, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में मौजूद चुनौतियों को कम करने तथा तकनीक के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुरक्षित, प्रभावी और सुलभ बनाने पर है।
मेडिकल इनोवेशन सेंटर की पहल ने विशेषज्ञों का खींचा ध्यान
राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा सम्मेलन में देश के प्रमुख एम्स और चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों की मौजूदगी के बीच GIMS के मेडिकल इनोवेशन सेंटर की पहल चर्चा का प्रमुख विषय बनी। खास तौर पर मेडिकल डिवाइस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हेल्थटेक और क्लिनिकल इनोवेशन को रोगी सुरक्षा से जोड़ने वाले मॉडल को महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा गया। GIMS का मेडिकल इनोवेशन मॉडल इस विचार पर आधारित है कि अस्पताल में सामने आने वाली समस्या की पहचान से लेकर उसके तकनीकी समाधान और अंततः मरीज को होने वाले लाभ तक पूरी प्रक्रिया को एक साथ जोड़ा जाए।
संस्थान की अवधारणा को “क्लिनिकल आवश्यकता से नवाचार और नवाचार से रोगी लाभ” के रूप में देखा जा सकता है। इस प्रक्रिया में क्लिनिकल समस्या की पहचान, समाधान की परिकल्पना, प्रोटोटाइप तैयार करना, तकनीकी विकास, नियामकीय मार्गदर्शन, क्लिनिकल परीक्षण और सत्यापन जैसे चरणों को आगे के उपयोग एवं व्यावसायीकरण से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
लैब से अस्पताल तक पहुंचाने पर जोर
GIMS के मेडिकल इनोवेशन मॉडल की एक प्रमुख विशेषता यह है कि नई तकनीक को केवल प्रयोगशाला या शोध पत्र तक सीमित रखने के बजाय उसके वास्तविक क्लिनिकल उपयोग पर जोर दिया जाता है। किसी भी समाधान को अस्पताल के वातावरण और मरीजों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप विकसित करने तथा परखने का प्रयास किया जाता है।
इस दृष्टिकोण से ऐसे मेडिकल समाधान विकसित करने में मदद मिल सकती है जो केवल तकनीकी रूप से सक्षम न हों, बल्कि अस्पतालों की कार्यप्रणाली और मरीजों की आवश्यकताओं के अनुरूप भी हों। इससे चिकित्सा नवाचार को शोध एवं विकास के स्तर से आगे ले जाकर वास्तविक स्वास्थ्य सेवाओं में उपयोगी बनाने की दिशा में मदद मिलती है।

मेडिकल डिवाइस से AI और डिजिटल हेल्थ तक नवाचार
मेडिकल इनोवेशन सेंटर के माध्यम से GIMS विभिन्न उभरती स्वास्थ्य तकनीकों को क्लिनिकल जरूरतों के साथ जोड़ने पर काम कर रहा है। इसमें मेडिकल डिवाइस, डायग्नोस्टिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल हेल्थ और अन्य हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी शामिल हैं। संस्थान का प्रयास है कि डॉक्टरों और तकनीकी क्षेत्र के विशेषज्ञों के बीच सहयोग को संस्थागत रूप दिया जाए, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी जमीनी समस्याओं के लिए देश में ही प्रभावी समाधान तैयार किए जा सकें।
दीर्घकालिक स्तर पर इस पहल का उद्देश्य भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित तकनीकों को क्लिनिकल उपयोग तक पहुंचाना और मरीजों के लिए अधिक किफायती, सुलभ तथा सुरक्षित स्वास्थ्य समाधान उपलब्ध कराने में योगदान देना है।
उत्तर प्रदेश के मेडिकल इनोवेशन इकोसिस्टम को राष्ट्रीय मंच
राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा सम्मेलन में GIMS की सहभागिता ने उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहे मेडिकल इनोवेशन और हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को भी राष्ट्रीय स्तर पर सामने रखा। संस्थान की पहल यह दर्शाती है कि सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल चिकित्सा शिक्षा एवं मरीजों के उपचार के साथ-साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीकी नवाचार के केंद्र के रूप में भी विकसित हो सकते हैं।
GIMS का मॉडल डॉक्टरों, इंजीनियरों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और उद्योग जगत के बीच सहयोग को बढ़ावा देकर स्वास्थ्य क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं के समाधान खोजने पर केंद्रित है। इससे मेडिकल इनोवेशन को क्लिनिकल जरूरतों से जोड़ने और विकसित तकनीकों को मरीजों तक पहुंचाने की संभावनाएं मजबूत होती हैं।
सरकारी मेडिकल संस्थान बन सकता है मेडिकल इनोवेशन हब
सम्मेलन में GIMS की प्रस्तुति ने यह संदेश मजबूत किया कि एक सरकारी चिकित्सा संस्थान केवल चिकित्सा शिक्षा, उपचार और अनुसंधान तक सीमित नहीं है। यदि क्लिनिकल विशेषज्ञता को इंजीनियरिंग, तकनीक और उद्यमिता के साथ जोड़ा जाए, तो सरकारी संस्थान भी मेडिकल इनोवेशन हब के रूप में काम कर सकते हैं। GIMS का मेडिकल इनोवेशन सेंटर इसी दिशा में एक ऐसा मंच विकसित करने का प्रयास कर रहा है, जहां अस्पताल में सामने आने वाली समस्याओं की पहचान कर उनके लिए तकनीकी समाधान तैयार किए जाएं और उन समाधानों को वास्तविक मरीजों तथा स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए उपयोगी बनाया जा सके।
राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा सम्मेलन 2026 में संस्थान की भागीदारी ने रोगी सुरक्षा और मेडिकल इनोवेशन के बीच संबंध को रेखांकित किया। साथ ही, यह पहल उत्तर प्रदेश को मेडिकल टेक्नोलॉजी, हेल्थटेक और क्लिनिकल इनोवेशन के क्षेत्र में आगे बढ़ाने की GIMS की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
GIMS का फोकस: नवाचार से बेहतर रोगी देखभाल
GIMS की पूरी पहल का केंद्र क्लिनिकल जरूरतों की पहचान कर ऐसे समाधान विकसित करना है, जिनका सीधा लाभ मरीजों और स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को मिल सके। संस्थान का लक्ष्य सुरक्षित, सुलभ, किफायती और तकनीक-सक्षम स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नए समाधान विकसित करने के साथ उन्हें वास्तविक क्लिनिकल उपयोग तक पहुंचाना है।
“क्लिनिकल आवश्यकता से नवाचार और नवाचार से बेहतर रोगी देखभाल” की इसी सोच के साथ GIMS ग्रेटर नोएडा मेडिकल इनोवेशन को रोगी सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रयासरत है।
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