Greater Noida News (10/09/2026): किसान संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के सामने चल रहा किसानों का अनिश्चितकालीन धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में महिला और पुरुष किसान जुटे। किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में जोरदार नारेबाजी करते हुए कहा कि जब तक सरकार और प्राधिकरण उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
धरना सभा की अध्यक्षता श्रीकृष्ण बैसला ने की, जबकि संदीप भाटी ने संचालन किया। वक्ताओं ने किसानों की लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान नहीं होने पर नाराजगी जताई और कहा कि अब केवल आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
किसान सभा के जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि क्षेत्र के किसान लंबे समय से अपनी जायज मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार और प्राधिकरण स्तर पर किसानों की समस्याओं को अपेक्षित गंभीरता नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान अधिकारियों की ओर से कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। डॉ. वर्मा ने कहा कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी किसानों की मांगों को सरकार तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने में अपेक्षित भूमिका नहीं निभा सके हैं।
किसान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर खलीफा ने कहा कि किसान संघर्ष मोर्चा के लगातार आंदोलनों के बाद तीनों प्राधिकरणों से किसानों को 10 प्रतिशत विकसित भूखंड दिए जाने का प्रस्ताव पारित कर शासन को भेजा जा चुका है। इसके बावजूद शासन स्तर पर इस प्रस्ताव को लेकर लंबे समय से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि किसान अब यह स्पष्ट जानना चाहते हैं कि उनकी मांगों पर निर्णय लेने की जिम्मेदारी किस स्तर पर है और उन्हें इसके लिए कितना और इंतजार करना होगा।

वहीं, किसान एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोरेन प्रधान ने गौतमबुद्ध नगर में सर्किल रेट का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जिले में करीब 12 वर्षों से सर्किल रेट में वृद्धि नहीं हुई है। इसके चलते किसानों को भूमि अधिग्रहण के दौरान उनकी जमीन का उचित मुआवजा मिलने में परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि हाल में मुआवजे में की गई बढ़ोतरी भी किसानों की अपेक्षाओं के अनुरूप पर्याप्त नहीं है। उनके मुताबिक, जिले में किसानों की जमीन का मुआवजा अभी भी कई मामलों में 20 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर से कम है, जबकि जमीन की वास्तविक बाजार कीमत इससे काफी अधिक है।
किसान नेताओं ने 10 प्रतिशत विकसित भूखंड, लंबित 6 प्रतिशत विकसित भूखंड, आबादी के मामलों का निस्तारण, लीज बैक तथा भूमि अधिग्रहण से जुड़े अन्य लंबित मामलों को जल्द निपटाने की मांग की। नेताओं ने कहा कि किसानों के सामने वर्षों से चली आ रही समस्याओं का समाधान केवल मौखिक आश्वासन देकर नहीं किया जा सकता। सरकार और संबंधित प्राधिकरणों को इन मुद्दों पर लिखित एवं ठोस निर्णय लेना होगा।
धरना स्थल पर किसानों ने एकजुटता दिखाते हुए आंदोलन को मांगों के समाधान तक जारी रखने का संकल्प दोहराया। किसानों ने कहा कि वे अपने अधिकारों से पीछे नहीं हटेंगे और मांगें पूरी होने तक धरना समाप्त नहीं करेंगे। इस दौरान “अपना हक लेकर रहेंगे” के नारे भी लगाए गए। धरने में जगबीर नंबरदार, उदल आर्य, वीर सिंह नागर, अशोक भाटी, गवरी मुखिया, कुंवर पाल प्रधान, सुभाष आर्य, सपा जिला अध्यक्ष सुधीर भाटी, इन्दर प्रधान, सूले यादव और दुष्यन्त सेन समेत सैकड़ों किसान मौजूद रहे। सभा के दौरान किसानों ने आगे भी आंदोलन को संगठित और प्रभावी तरीके से जारी रखने की बात कही।
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