दो कमरों से ग्लोबल बाजार तक पहुंचा आर्या फैशन, डॉ. खुशबू सिंह ने गांव की महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर
टेन न्यूज नेटवर्क
Noida News (08 September 2026): छोटे स्तर से शुरू किया गया कारोबार अगर सही सोच, मेहनत और स्पष्ट विजन के साथ आगे बढ़े तो वह न केवल एक सफल व्यवसाय बन सकता है, बल्कि समाज के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का माध्यम भी बन सकता है। आर्या फैशन की संस्थापिका एवं आईबीए की उपाध्यक्ष डॉ. खुशबू सिंह की कहानी इसी सोच को दर्शाती है।
टेन न्यूज नेटवर्क के Ten Talks के स्पेशल पॉडकास्ट में डॉ. खुशबू सिंह ने आर्या फैशन की शुरुआत से लेकर उसके अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने के सफर, ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ने, सस्टेनेबिलिटी, एक्सपोर्ट और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
उन्होंने वर्ष 2017 में बेहद छोटे स्तर से अपने कारोबार की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में उनके पास सीमित संसाधन थे और महज पांच कारीगर एवं पांच कर्मचारी उनके साथ काम करते थे। आज उनकी कंपनी ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं और कारीगरों को रोजगार से जोड़ने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार तक अपने उत्पाद पहुंचा रही है।
दो कमरों से शुरू हुआ सफर
डॉ. खुशबू सिंह के मुताबिक, आर्या फैशन की शुरुआत वर्ष 2017 में एक-दो कमरों से हुई थी। उस समय कारोबार को चलाने के लिए उनके पास सीमित आर्थिक संसाधन थे। उन्होंने शुरुआत में केवल पांच कारीगरों और पांच कर्मचारियों के साथ काम शुरू किया।
शुरुआती छह महीने कारोबार के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहे। व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने स्टैंड-अप इंडिया लोन का सहारा लिया।

डॉ. सिंह का कहना है कि आज सरकार की विभिन्न योजनाएं युवाओं और नए उद्यमियों के लिए अवसर पैदा कर रही हैं, लेकिन इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, किसी भी व्यक्ति को कारोबार शुरू करने से पहले प्रोडक्ट, बाजार, प्रोजेक्ट रिपोर्ट और भविष्य के विजन को लेकर स्पष्टता होनी चाहिए।
गांव की महिलाओं को घर पर ही रोजगार
आर्या फैशन की खास पहल ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ना है। डॉ. सिंह के मुताबिक, कंपनी के साथ करीब दो से ढाई हजार से अधिक ग्रामीण महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इनमें हापुड़, मेरठ और आसपास के गांवों की महिलाएं शामिल हैं।
इन महिलाओं के लिए कंपनी का मॉडल थोड़ा अलग है। उन्हें काम करने के लिए रोजाना फैक्ट्री आने की जरूरत नहीं होती। कंपनी का कच्चा माल उनके घरों तक पहुंचाया जाता है और महिलाएं अपनी सुविधा के अनुसार घर पर ही काम करती हैं। तैयार किए गए काम के आधार पर उन्हें भुगतान किया जाता है।
इस व्यवस्था से महिलाएं रोजगार के साथ-साथ अपने परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियां भी संभाल पाती हैं। डॉ. सिंह का मानना है कि ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ना केवल आय का साधन उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
‘लोकल टू ग्लोबल’ की सोच पर काम
डॉ. खुशबू सिंह का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ के विचार से उनका काम काफी हद तक जुड़ा हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों के कारीगरों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को कंपनी गुणवत्ता के मानकों के अनुसार तैयार कर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाती है।
उन्होंने बताया कि ग्रामीण महिलाएं अपने घरों में उत्पाद तैयार करती हैं, जबकि कंपनी उनके काम की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के बाद उन्हें विदेशी बाजारों में भेजती है। कई बार इन्हीं कारीगरों को यह दिखाया जाता है कि उनके द्वारा बनाया गया उत्पाद विदेशों के बड़े स्टोर में बिक रहा है। इससे उनमें अपने हुनर को लेकर आत्मविश्वास और उत्साह बढ़ता है।
आर्या फैशन यूरोप के कई देशों में कारोबार करती है। कंपनी के बाजारों में स्पेन, जर्मनी, फ्रांस, डेनमार्क और स्वीडन जैसे देश शामिल हैं। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, इजरायल और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी उत्पाद भेजे जाने की जानकारी दी गई।
यूरोपीय मानकों के मुताबिक तैयार होते हैं उत्पाद
ग्रामीण स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार में नहीं भेजा जाता। कंपनी की ओर से गुणवत्ता नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
डॉ. सिंह के मुताबिक, एक्सपोर्ट हाउस की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि स्थानीय स्तर पर बने उत्पादों को यूरोपीय और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार करना पड़ता है।
उनका कहना है कि स्थानीय कारीगरों के हुनर को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए गुणवत्ता, पैकेजिंग और अन्य मानकों पर लगातार काम करना जरूरी है।
सस्टेनेबिलिटी को कारोबार का हिस्सा बनाने पर जोर
डॉ. सिंह ने कारोबार के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी जरूरी बताया। उनका कहना है कि आज के समय में केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिम्मेदार तरीके से उत्पादन करना भी जरूरी है।
आर्या फैशन की फैक्ट्री में सोलर एनर्जी के इस्तेमाल का दावा करते हुए उन्होंने बताया कि फैक्ट्री की करीब 80 प्रतिशत ऊर्जा जरूरतें सौर ऊर्जा से पूरी होती हैं। बिजली और पानी की बर्बादी रोकने के लिए भी कई स्तरों पर प्रयास किए जाते हैं।
उन्होंने रिसाइकल्ड फैब्रिक का उदाहरण देते हुए बताया कि आज PET बोतलों से भी यार्न तैयार किया जा रहा है, जिससे कपड़ा बनाया जाता है। उनके मुताबिक, भविष्य के किसी भी उत्पाद के लिए सस्टेनेबिलिटी बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है।
कंपनी में ZED यानी Zero Defect, Zero Effect जैसे मानकों और पर्यावरण से जुड़े अनुपालन पर भी ध्यान देने की बात कही गई। उनका मानना है कि उत्पादन ऐसा होना चाहिए, जिससे पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे।
भारत के एक्सपोर्ट सेक्टर के लिए FTA को बताया अहम
अंतरराष्ट्रीय कारोबार के अनुभव साझा करते हुए डॉ. सिंह ने भारत के विभिन्न देशों के साथ हुए Free Trade Agreements (FTA) को निर्यातकों के लिए महत्वपूर्ण बताया।
उनका कहना है कि व्यापार समझौतों के कारण भारतीय उत्पादों को कई बाजारों में टैक्स संबंधी लाभ मिल सकता है, जिससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ती है।
उन्होंने भारत के ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए व्यापार समझौतों का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत को बांग्लादेश, पाकिस्तान, चीन और फिलीपींस जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है। ऐसे में भारतीय उत्पादों के लिए व्यापार को आसान बनाने वाली नीतियां निर्यात बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।
कारीगरों को सिर्फ रोजगार नहीं, बेहतर माहौल देने पर जोर
डॉ. सिंह का मानना है कि किसी भी कंपनी के कर्मचारी और कारीगर उसकी रीढ़ होते हैं। इसलिए केवल रोजगार देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान का ध्यान रखना भी जरूरी है।
उन्होंने बताया कि कंपनी की ओर से कर्मचारियों और कारीगरों के लिए स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए हैं। एक स्वास्थ्य शिविर में यथार्थ अस्पताल के सहयोग से विभिन्न स्वास्थ्य जांच और दवाओं की सुविधा उपलब्ध कराने की बात भी उन्होंने कही।
महिला कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए कंपनी में POSH प्रशिक्षण आयोजित किए जाने की जानकारी भी उन्होंने दी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को ऐसा माहौल मिलना चाहिए, जहां वे किसी परेशानी या शिकायत को बिना झिझक साझा कर सकें।
विशेष बच्चों के लिए भी शुरू की हैंडीक्राफ्ट ट्रेनिंग
आर्या फैशन की सामाजिक पहल का एक और महत्वपूर्ण पहलू विशेष बच्चों को हुनर से जोड़ना है। डॉ. सिंह ने बताया कि हाल ही में कंपनी की इकाई में डाउन सिंड्रोम और ऑटिज्म समेत विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए हैंडीक्राफ्ट ट्रेनिंग आयोजित की गई।

उनके मुताबिक, यह पहल लंबे समय से उनके विजन का हिस्सा थी। प्रशिक्षण के दौरान कुछ बच्चों ने बेहद कम समय में बीड्स से ब्रेसलेट तैयार किए। उनका मानना है कि समाज के जिन वर्गों को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है, उन्हें भी कौशल और अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत है।
उनका कहना है कि अगर एक संस्था इस तरह की पहल शुरू करती है और उसे देखकर दूसरे लोग भी आगे आते हैं, तभी समाज में व्यापक बदलाव संभव है।
तीन साल के भीतर मिला पहला बड़ा सम्मान
आर्या फैशन की स्थापना के कुछ ही वर्षों के भीतर डॉ. खुशबू सिंह को सम्मान भी मिलने लगे। उन्होंने बताया कि कंपनी शुरू होने के करीब तीन साल बाद उन्हें उत्तर प्रदेश से एक्सपोर्ट अवॉर्ड के लिए चयनित किए जाने की सूचना मिली। इसे उन्होंने अपने सफर की पहली बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया।
इसके बाद केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह के हाथों EPCH के माध्यम से टॉप एक्सपोर्ट ग्रोथ अवॉर्ड मिलने की बात भी उन्होंने साझा की। इसके अलावा उन्हें समय-समय पर कई अन्य सम्मान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आमंत्रण मिलने की जानकारी दी।
महिलाओं को संदेश—अपना ‘गॉडफादर’ खुद बनें
महिलाओं के लिए अपने सफलता मंत्र के बारे में डॉ. सिंह ने कहा कि महिलाओं को अपनी क्षमता पर भरोसा रखना चाहिए। उनके मुताबिक, किसी बाहरी सहारे या ‘गॉडफादर’ का इंतजार करने के बजाय महिलाओं को अपने भीतर की ताकत पहचाननी चाहिए।
उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव का उदाहरण देते हुए बताया कि दोनों बेटियों के जन्म के बाद वह कुछ ही समय में दोबारा अपने काम पर लौट आई थीं। उनका कहना है कि महिलाओं के भीतर मल्टीटास्किंग की क्षमता होती है, लेकिन कई बार सामाजिक दबाव के कारण वे अपनी क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पातीं।
उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे मुश्किल परिस्थितियों में हार न मानें। अपने लक्ष्य को लेकर दृढ़ रहें, समस्याओं का सामना करें और अपने विजन को जमीन पर उतारने की कोशिश लगातार जारी रखें।
‘अभी तो आसमान पूरा बाकी है’
आर्या फैशन के भविष्य को लेकर डॉ. खुशबू सिंह का कहना है कि उनकी यात्रा अभी पूरी तरह शुरू हुई है। उनका लक्ष्य केवल कारोबार का विस्तार करना नहीं, बल्कि समाज के उन वर्गों तक पहुंचना भी है, जिन्हें अवसर कम मिलते हैं।
उनकी कहानी एक-दो कमरों से शुरू होकर ग्रामीण महिलाओं के रोजगार, स्थानीय कारीगरों के हुनर, अंतरराष्ट्रीय बाजार, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी तक पहुंचने की कहानी है। उनका मानना है कि कारोबार की सफलता तभी सार्थक है, जब उससे समाज के दूसरे लोगों के लिए भी नए अवसर पैदा हों।
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