यार्न की कीमतों में 60% बढ़ोतरी से टेक्सटाइल उद्योग पर दबाव, सरकार एक्सपोर्ट पर लगाए रोक: NAEC अध्यक्ष ललित ठुकराल

टेन न्यूज नेटवर्क

Noida News (03/09/2026): उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख टेक्सटाइल और गारमेंट हब के रूप में विकसित करने की दिशा में आयोजित किए जा रहे ‘UP TEX-2026’ के कर्टेन रेजर एवं रोड शो का आयोजन आज, 3 सितंबर 2026 को नोएडा सेक्टर-6 स्थित नोएडा एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन (NAEС) भवन में किया गया है। मुख्य सम्मेलन आगामी 8 और 9 सितंबर 2026 को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान स्थित जुपिटर हॉल में आयोजित होगा। सम्मेलन का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे।

कार्यक्रम से पहले मीडिया से बातचीत में NAEC के अध्यक्ष ललित ठुकराल ने ‘UP TEX-2026’ को प्रदेश के टेक्सटाइल और अपैरल उद्योग के लिए महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से उद्यमियों, टेक्सटाइल एवं गारमेंट निर्माताओं और सरकार के बीच संवाद को मजबूत करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि उद्योग से जुड़े कारोबारी अपनी समस्याओं और सुझावों को सीधे सरकार के समक्ष रख सकेंगे।

“UP TEX-2026 उद्यमियों को अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण मंच”

ललित ठुकराल ने कहा कि सरकार की ओर से शुरू किया गया UP TEX एक सकारात्मक पहल है। इससे प्रदेश के टेक्सटाइल और अपैरल क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों को एक साझा मंच मिल रहा है, जहां वे अपनी समस्याओं, जरूरतों और सुझावों को प्रभावी तरीके से सरकार के सामने रख सकते हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य राज्य की अर्थव्यवस्था को तेजी से आगे बढ़ाना और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना है। उनके मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में ऐसा कारोबारी माहौल तैयार हुआ है, जिसमें निवेशकों और उद्यमियों का भरोसा बढ़ा है।

“टेक्सटाइल सेक्टर से उत्तर प्रदेश को वैश्विक गारमेंट हब बनाने की दिशा में बढ़ रहा प्रदेश”

NAEC अध्यक्ष ने कहा कि उत्तर प्रदेश में टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर के लिए बड़े स्तर पर औद्योगिक बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है। उन्होंने हरदोई में पीएम मित्र पार्क के साथ-साथ प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में प्रस्तावित टेक्सटाइल और अपैरल पार्कों का उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में अपैरल पार्क विकसित किया जा रहा है, जबकि गोरखपुर में भी अपैरल पार्क और गारमेंट उद्योग से जुड़ी सुविधाओं पर काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में टेक्सटाइल से लेकर गारमेंट निर्माण और वैल्यू एडिशन तक की पूरी औद्योगिक श्रृंखला विकसित करने की कोशिश की जा रही है।

“बढ़ती मजदूरी, टैरिफ और अंतरराष्ट्रीय संघर्ष से निर्यात कारोबार प्रभावित”

ललित ठुकराल ने टेक्सटाइल उद्योग के सामने मौजूद चुनौतियों पर चिंता जताते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उत्पादन लागत लगातार बढ़ी है। मजदूरी में बढ़ोतरी के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टैरिफ से जुड़ी चुनौतियों ने भारतीय निर्यातकों पर दबाव बढ़ाया है।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय व्यापार परिस्थितियां भी अनुकूल नहीं रही हैं। अमेरिका की टैरिफ नीतियों और ईरान-इजराइल संघर्ष जैसी वैश्विक परिस्थितियों का असर व्यापार और निर्यात पर पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि इन चुनौतियों के कारण टेक्सटाइल और गारमेंट क्षेत्र के निर्यात पर दबाव बना हुआ है।

“यार्न की कीमतों में 60% बढ़ोतरी सबसे गंभीर चुनौती”

ललित ठुकराल ने टेक्सटाइल उद्योग के लिए वर्तमान समय की सबसे बड़ी चिंता यार्न यानी धागे की बढ़ती कीमतों को बताया। उन्होंने कहा कि यार्न की कीमतों में लगभग 60 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी ने भारतीय टेक्सटाइल और गारमेंट निर्माताओं की लागत को काफी प्रभावित किया है।

उन्होंने बताया कि भारत से बड़े पैमाने पर यार्न का निर्यात होता है और इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा बांग्लादेश और चीन जैसे देशों को जाता है। उनके अनुसार, यदि कच्चे माल यानी यार्न का निर्यात करने के बजाय भारत में ही उसका इस्तेमाल कर कपड़ा और गारमेंट तैयार किए जाएं, तो देश में अधिक वैल्यू एडिशन के साथ रोजगार और निर्यात दोनों को बढ़ावा दिया जा सकता है।

“₹1 लाख करोड़ के यार्न को भारत में वैल्यू एड कर ₹3 लाख करोड़ के उत्पाद में बदला जा सकता है”

NAEC अध्यक्ष ने सरकार के सामने एक महत्वपूर्ण सुझाव रखते हुए कहा कि यदि लगभग ₹1 लाख करोड़ के यार्न के निर्यात को सीमित कर उसका इस्तेमाल देश में कपड़ा, प्रोसेसिंग और गारमेंट निर्माण के लिए किया जाए, तो वैल्यू एडिशन के बाद इससे लगभग ₹3 लाख करोड़ के तैयार उत्पादों का निर्यात किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि इससे न केवल निर्यात का मूल्य बढ़ेगा, बल्कि घरेलू स्तर पर उत्पादन, रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

“सरकार यार्न एक्सपोर्ट पर स्थायी प्रतिबंध न लगाए, लेकिन 3 से 6 महीने समीक्षा जरूर करे”

ललित ठुकराल ने सरकार से यार्न के निर्यात पर तत्काल स्थायी प्रतिबंध लगाने की मांग नहीं की, बल्कि सीमित अवधि के लिए इसकी समीक्षा करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि सरकार 3 से 6 महीने के लिए यार्न के निर्यात को नियंत्रित या अस्थायी रूप से रोककर स्थिति का आकलन कर सकती है।

उनके अनुसार, इस अवधि में यार्न की कीमतों, घरेलू उपलब्धता, निर्यात और टेक्सटाइल उद्योग पर पड़ने वाले प्रभाव का विस्तृत अध्ययन किया जाना चाहिए। इससे घरेलू बाजार को स्थिर करने और भारतीय निर्माताओं की लागत कम करने में मदद मिल सकती है।

“25 सेंट के अंतर से भारत से बांग्लादेश, वियतनाम और चीन की ओर जा रहे ऑर्डर”

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कंपनियों को लागत के स्तर पर कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। कई मामलों में मामूली कीमत अंतर के कारण विदेशी खरीदारों के ऑर्डर भारत के बजाय बांग्लादेश, वियतनाम और चीन जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की ओर चले जाते हैं। ललित ठुकराल ने कहा कि यार्न की कीमतों और अन्य लागतों में बढ़ोतरी के चलते भारतीय कंपनियों की प्रति पीस लागत में करीब 1 डॉलर तक का अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। ऐसे में भारतीय निर्यातकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।

“टेक्सटाइल निर्यात को बढ़ाने के लिए सरकार और उद्योग को मिलकर उठाने होंगे ठोस कदम”

NAEC अध्यक्ष ने कहा कि भारत को टेक्सटाइल और गारमेंट निर्यात में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए लागत, कच्चे माल, उत्पादन और वैल्यू एडिशन से जुड़े मुद्दों पर तत्काल ध्यान देना होगा।

उन्होंने कहा कि सरकार यदि उद्योग की व्यावहारिक समस्याओं को समझकर नीतिगत स्तर पर जरूरी कदम उठाती है, तो भारत न केवल मौजूदा निर्यात बाजार को मजबूत कर सकता है, बल्कि वैश्विक टेक्सटाइल सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी भी तेजी से बढ़ा सकता है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि UP TEX-2026 जैसे मंच सरकार और उद्योग के बीच संवाद को मजबूत करेंगे और टेक्सटाइल एवं अपैरल सेक्टर के विकास के लिए ठोस नीतिगत समाधान सामने आएंगे। UP TEX-2026 का मुख्य सम्मेलन 8 और 9 सितंबर को लखनऊ में आयोजित होगा, जहां नीति निर्माता, निवेशक, टेक्सटाइल निर्माता, निर्यातक और उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधि उत्तर प्रदेश को वैश्विक टेक्सटाइल एवं गारमेंट हब बनाने की रणनीति पर चर्चा करेंगे।


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