Delhi AIIMS में 13 साल तक सर्जरी का इंतजार, आखिर नहीं बच सकी तन्वी की जान

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (02 September 2026): राजस्थान के कोटा की रहने वाली 15 वर्षीय तन्वी की दिल्ली AIIMS में इलाज के दौरान मौत के बाद अस्पताल की व्यवस्था और इलाज में कथित देरी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों का आरोप है कि तन्वी जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित थी और महज दो साल की उम्र से उसका इलाज AIIMS में चल रहा था। परिवार के मुताबिक, वर्षों तक सर्जरी की तारीख मिलने के बावजूद ऑपरेशन नहीं हो सका और मंगलवार को किशोरी ने अस्पताल परिसर में दम तोड़ दिया। पिता मुकेश परियाणी ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते सर्जरी की जाती तो उनकी बेटी की जान बच सकती थी।

परिजनों के अनुसार तन्वी को वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) और पल्मोनरी एट्रेसिया जैसी गंभीर जन्मजात हृदय संबंधी समस्या थी। परिवार का दावा है कि वर्ष 2014 में मेडिकल रिकॉर्ड में सर्जरी की सिफारिश की गई थी और 2015 में ऑपरेशन की तारीख भी तय हुई थी, लेकिन अलग-अलग कारणों से प्रक्रिया आगे बढ़ती रही। पिता का आरोप है कि इस दौरान परिवार को लगातार अस्पताल के चक्कर लगाने पड़े। उन्होंने यह भी दावा किया कि 24 अगस्त से 31 अगस्त के बीच उनकी बेटी की स्थिति गंभीर होने के बावजूद डॉक्टरों ने उसे पर्याप्त रूप से नहीं देखा।

AIIMS के रिकॉर्ड के मुताबिक, तन्वी को 24 अगस्त को अस्पताल में भर्ती किया गया था और उसे हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया के तहत रखा गया था। अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार सोमवार शाम करीब सात बजे उसकी एंडोस्कोपी की गई थी। इसके बाद मंगलवार तड़के करीब 2:50 बजे तन्वी ने अत्यधिक कमजोरी और सांस लेने में परेशानी की शिकायत की। जांच में उसका ऑक्सीजन स्तर गिरकर करीब 48 प्रतिशत रह गया। डॉक्टरों ने उसे ऑक्सीजन दी और बचाने की कोशिश की, लेकिन सुबह करीब 5:06 बजे उसे मृत घोषित कर दिया गया।

बेटी की मौत के बाद परिवार ने AIIMS प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पिता का कहना है कि उन्हें मौत का संतोषजनक कारण नहीं बताया गया और इलाज के दौरान कागजी कार्रवाई तथा अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर उन्हें परेशान किया जाता रहा। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। परिजनों ने अपनी आशंकाओं और वर्षों तक चली उपचार प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जवाब मिलने तक शव लेने से इनकार करने की बात कही है। परिवार का आरोप है कि समय पर उचित उपचार मिलता तो शायद उनकी बेटी आज जीवित होती।

वहीं, AIIMS के वरिष्ठ चिकित्सकों ने परिवार के आरोपों के बीच अस्पताल का पक्ष भी सामने रखा है। डॉक्टरों के मुताबिक, वर्ष 2018 में हुई जांच में यह सामने आया था कि तन्वी के फेफड़ों तक रक्त पहुंचाने वाली मुख्य रक्त वाहिकाएं यानी पल्मोनरी आर्टरी पर्याप्त रूप से विकसित नहीं हुई थीं। ऐसे में सामान्य सुधारात्मक सर्जरी को अत्यधिक जोखिमपूर्ण माना गया था और उसे चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। अब इस घटना ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है—क्या जटिल बीमारी के कारण सर्जरी का जोखिम अधिक था, या इलाज की प्रक्रिया में वास्तव में ऐसी देरी हुई जिसने मरीज की स्थिति को और गंभीर बना दिया? इसका जवाब विस्तृत जांच और मेडिकल रिकॉर्ड की स्वतंत्र समीक्षा से ही स्पष्ट हो सकेगा।


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