SSC परीक्षा में हाईटेक नकल सिंडिकेट का बड़ा खुलासा: अलवर से गिरफ्तार हुआ मास्टरमाइंड

टेन न्यूज नेटवर्क

Noida News (01/08/2026): कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की ऑनलाइन भर्ती परीक्षाओं में हाईटेक तकनीक के जरिए संगठित रूप से नकल कराने वाले गिरोह के खिलाफ चल रही कार्रवाई में उत्तर प्रदेश एसटीएफ को बड़ी सफलता मिली है। टीम ने राजस्थान के अलवर से उस आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिसे इस पूरे रैकेट का तकनीकी मास्टरमाइंड माना जा रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी विशेष रूप से मॉडिफाइड TFT स्क्रीन तैयार करता था, जिनके माध्यम से परीक्षा केंद्र के बाहर बैठा सॉल्वर अभ्यर्थी की स्क्रीन तक उत्तर पहुंचा देता था।

करीब दो महीने से फरार चल रहे आरोपी की पहचान अलवर निवासी लोकेश के रूप में हुई है। एसटीएफ का दावा है कि उसकी गिरफ्तारी के साथ ही देश के विभिन्न राज्यों में सक्रिय हाईटेक नकल नेटवर्क की कई अहम परतें खुलने लगी हैं।

ग्रेटर नोएडा से शुरू हुई थी जांच

इस मामले का खुलासा 22 मई 2026 को ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क स्थित एक ऑनलाइन परीक्षा केंद्र पर एसटीएफ की कार्रवाई के दौरान हुआ था। छापेमारी में परीक्षा केंद्र से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जांच के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी, प्रॉक्सी सर्वर, कंप्यूटर उपकरण और अन्य डिजिटल डिवाइस बरामद किए गए थे। बाद में गिरोह से जुड़े एक अन्य सदस्य को भी गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया।

पुलिस रिमांड में सामने आया तकनीकी मास्टरमाइंड

एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार पहले गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान यह जानकारी मिली कि परीक्षा में इस्तेमाल होने वाली विशेष मॉडिफाइड TFT स्क्रीन तैयार करने का काम लोकेश करता था। इसी सूचना के आधार पर उसकी तलाश तेज की गई और लगातार निगरानी के बाद उसे राजस्थान के अलवर से गिरफ्तार कर लिया गया।

घर को बना रखा था इलेक्ट्रॉनिक लैब

गिरफ्तारी के बाद आरोपी की निशानदेही पर उसके ठिकाने की तलाशी ली गई, जहां से बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए। इनमें 92 मॉडिफाइड TFT स्क्रीन, 14 रास्पबेरी-पाई डिवाइस, 45 VGA कार्ड, 20 VGA-टू-HDMI कन्वर्टर, वाई-फाई डोंगल, लैपटॉप, मेमोरी कार्ड, सोल्डरिंग उपकरण और अन्य तकनीकी सामग्री शामिल है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यही स्थान हाईटेक नकल के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण तैयार करने और उन्हें विभिन्न राज्यों में भेजने का प्रमुख केंद्र था।

हार्डवेयर और नेटवर्किंग की जानकारी का उठाया गलत फायदा

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने वर्ष 2013 में कंप्यूटर हार्डवेयर एवं नेटवर्किंग का प्रशिक्षण लिया था। वर्ष 2017 के दौरान एक लैब में काम करते समय उसे मॉडिफाइड स्क्रीन की तकनीक की जानकारी मिली। इसके बाद उसने स्वयं ऐसे उपकरण तैयार करना शुरू कर दिए और उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान तथा महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में उनकी आपूर्ति करने लगा।

ऐसे संचालित होता था हाईटेक नकल का पूरा सिस्टम

एसटीएफ की जांच के मुताबिक, देखने में सामान्य लगने वाली TFT स्क्रीन के भीतर विशेष इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर लगाया जाता था। परीक्षा शुरू होने के बाद स्क्रीन पर दिखाई देने वाले प्रश्नों का लाइव डिस्प्ले वाई-फाई डोंगल के माध्यम से परीक्षा केंद्र के बाहर बैठे सॉल्वर तक पहुंचता था। सॉल्वर प्रश्न हल कर उत्तर वापस उसी स्क्रीन पर भेज देता था, जिससे अभ्यर्थी बिना संदेह के उत्तर देख सकता था।

जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह ऐसे राउटर और नेटवर्क डिवाइस का उपयोग करता था, जिनकी फ्रीक्वेंसी अधिकांश परीक्षा केंद्रों में लगाए गए जैमर की पकड़ से बाहर रहती थी। यही वजह थी कि लंबे समय तक यह तकनीकी धोखाधड़ी पकड़ में नहीं आ सकी।

एक स्क्रीन तैयार करने में हजारों रुपये का खर्च

पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि एक मॉडिफाइड TFT स्क्रीन तैयार करने में लगभग 40 हजार रुपये की लागत आती थी। इसके अतिरिक्त वह प्रत्येक यूनिट तैयार करने के एवज में करीब 5 हजार रुपये अलग से मेहनताना लेता था। भुगतान विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से कराया जाता था ताकि वित्तीय लेन-देन की पहचान करना कठिन हो।

कई राज्यों में फैले नेटवर्क की जांच तेज

एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि ये मॉडिफाइड स्क्रीन किन-किन परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाई गईं और इस पूरे नेटवर्क में परीक्षा केंद्र संचालकों, तकनीकी विशेषज्ञों, बिचौलियों तथा अन्य लोगों की क्या भूमिका रही। एजेंसी को आशंका है कि यह संगठित गिरोह कई राज्यों की प्रतियोगी एवं भर्ती परीक्षाओं में लंबे समय से सक्रिय रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आरोपी की गिरफ्तारी से इस हाईटेक नकल सिंडिकेट के वित्तीय लेन-देन, तकनीकी संचालन और देशभर में फैले नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुराग मिलने की संभावना है।


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