एसएलबीएस विश्वविद्यालय में विशेषज्ञों ने बताए स्वस्थ जीवन के सूत्र
टेन न्यूज नेटवर्क
New Delhi News (26/07/2026): बदलती जीवनशैली, बढ़ते मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं के बीच योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा को मानसिक स्वास्थ्य के लिए प्रभावी उपाय बताते हुए श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (एसएलबीएस), नई दिल्ली में “मानसिक स्वास्थ्य एवं दैनिक जीवन में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा की उपयोगिता” विषय पर एक दिवसीय विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के सांख्ययोग एवं योग विज्ञान विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षकों, शोधार्थियों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय ज्ञान-परंपरा में निहित योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के वैज्ञानिक और व्यावहारिक स्वरूप को विद्यार्थियों तक पहुंचाना तथा उन्हें स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था। पूरे कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य के संरक्षण, तनाव प्रबंधन और जीवनशैली संबंधी विकारों से बचाव के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय ज्ञान-परंपरा में योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मनुष्य के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास का समग्र विज्ञान है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है और ऐसे विषयों पर आयोजित व्याख्यान विद्यार्थियों तथा शोधार्थियों में योग के वैज्ञानिक दृष्टिकोण और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विभाग के इस प्रयास की सराहना करते हुए कार्यक्रम की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. पवन कुमार शर्मा ने कहा कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन किसी भी व्यक्ति के समग्र व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि योग और प्राकृतिक चिकित्सा केवल उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक संतुलित शैली है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह व्याख्यान विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान-परंपरा के जीवनोपयोगी सिद्धांतों को समझने और उन्हें अपने दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. नवीन जी. हलप्पा, सहायक आचार्य, स्कूल ऑफ योगा, नेचुरोपैथी एंड कॉग्निटिव स्टडीज़, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (केंद्रीय विश्वविद्यालय), लखनऊ ने मानसिक स्वास्थ्य, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में तनाव, चिंता, अवसाद, अनियमित दिनचर्या, असंतुलित खान-पान और शारीरिक निष्क्रियता अनेक मानसिक एवं शारीरिक रोगों की प्रमुख वजह बन चुके हैं। इन समस्याओं से बचने के लिए नियमित योगाभ्यास, प्राणायाम, ध्यान, संतुलित आहार और प्राकृतिक जीवनशैली को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाना अत्यंत आवश्यक है।
डॉ. हलप्पा ने बताया कि नियमित योगासन शरीर को लचीला और स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होते हैं, जबकि प्राणायाम मन को शांत कर एकाग्रता बढ़ाता है। वहीं ध्यान मानसिक तनाव, चिंता और नकारात्मक विचारों को नियंत्रित करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि यदि इन अभ्यासों को नियमित रूप से अपनाया जाए तो मानसिक स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है।
अपने व्याख्यान के दौरान उन्होंने मधुमेह, मोटापा, माइग्रेन, पीसीओएस सहित अन्य जीवनशैली जनित रोगों के प्रबंधन में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा की उपयोगिता पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों को समय पर सोने-जागने, पर्याप्त जल सेवन करने, पौष्टिक एवं संतुलित भोजन लेने, पर्याप्त नींद लेने तथा नियमित शारीरिक गतिविधियों को जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह दी।
व्याख्यान के बाद आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य, योगाभ्यास और प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे। डॉ. हलप्पा ने सभी जिज्ञासाओं का सरल, वैज्ञानिक और व्यावहारिक उत्तर देते हुए मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी अनेक भ्रांतियों को भी दूर किया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर सांख्ययोग एवं योग विज्ञान विभाग की ओर से मुख्य वक्ता डॉ. नवीन जी. हलप्पा को स्मृति-चिह्न एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
आयोजकों ने बताया कि यह व्याख्यान केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि भारतीय ज्ञान-परंपरा में निहित योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा की वैज्ञानिक उपयोगिता को समाज तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि स्वस्थ मन, स्वस्थ शरीर और संतुलित जीवनशैली ही स्वस्थ एवं समृद्ध समाज की मजबूत नींव हैं। साथ ही विश्वविद्यालय ने ऐसे आयोजनों के माध्यम से भारतीय ज्ञान-परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और समाजोपयोगी प्रसार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर रेखांकित किया।
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