टेन न्यूज नेटवर्क
उत्तर प्रदेश में न्यू नोएडा, जेवर एयरपोर्ट और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के लिए तेजी से हो रहे भूमि अधिग्रहण के बीच एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठ रहा है—क्या हजारों करोड़ रुपये केवल नए शहर बसाने पर खर्च किए जाने चाहिए, या उसी निवेश का बड़ा हिस्सा गांवों और कृषि के विकास में लगाया जा सकता है?
उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में तेज़ी से शहरीकरण हो रहा है। नए शहर, औद्योगिक कॉरिडोर, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक्स हब विकास की नई तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं। लेकिन इसके साथ एक गंभीर चिंता भी जुड़ी है—क्या विकास की कीमत हमारी उपजाऊ कृषि भूमि चुकाएगी?
उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में से एक न्यू नोएडा (Dadri–Noida–Ghaziabad Investment Region – DNGIR) लगभग 209 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विकसित की जा रही है। इसके अलावा जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, गंगा एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और अन्य औद्योगिक कॉरिडोरों के आसपास भी नए शहरों, टाउनशिप और औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तार हो रहा है। इन परियोजनाओं के लिए बड़ी मात्रा में कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है।

ऐसे में स्वाभाविक प्रश्न है कि क्या इन्हीं हजारों करोड़ रुपये का बड़ा हिस्सा गांवों के समग्र विकास पर खर्च नहीं किया जा सकता?
यदि यही निवेश ग्रामीण क्षेत्रों में किया जाए तो सिंचाई व्यवस्था मजबूत हो सकती है, किसानों को आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराई जा सकती है, ग्रामीण सड़कें और स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर बन सकती हैं, कृषि प्रसंस्करण उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं तथा शिक्षा और डिजिटल सुविधाओं का विस्तार किया जा सकता है। इससे गांव आत्मनिर्भर बनेंगे और शहरों की ओर पलायन भी कम होगा।
दूसरी ओर, सरकारों का तर्क भी महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि नए शहर और औद्योगिक कॉरिडोर बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करते हैं, उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देते हैं, लाखों रोजगार सृजित करते हैं, कर संग्रह बढ़ाते हैं और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करते हैं।
फिर भी सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि उपजाऊ कृषि भूमि लगातार कम होती गई तो भविष्य में खाद्य सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका प्रभावित होगी। कृषि केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण सामाजिक व्यवस्था की आधारशिला है।
इसलिए विकास की बहस “गांव बनाम शहर” की नहीं, बल्कि “संतुलित विकास” की होनी चाहिए।
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और कृषि प्रधान राज्य के लिए अधिक व्यावहारिक मॉडल यह हो सकता है कि बड़े शहरों का विस्तार सीमित और योजनाबद्ध तरीके से किया जाए। प्रत्येक जिले में छोटे-छोटे ‘मिनी ग्रोथ सेंटर’ विकसित किए जाएं, उद्योगों को गांवों और कस्बों के निकट स्थापित किया जाए, कृषि भूमि का अधिग्रहण न्यूनतम रखा जाए तथा जहां भूमि अधिग्रहण अपरिहार्य हो, वहां किसानों को उचित मुआवजे के साथ स्थायी रोजगार, कौशल विकास और दीर्घकालिक पुनर्वास भी सुनिश्चित किया जाए।
मेरे विचार से यदि विकास पर 100 रुपये खर्च किए जाएं तो लगभग 60 से 70 प्रतिशत निवेश ग्रामीण एवं कृषि अवसंरचना पर तथा 30 से 40 प्रतिशत निवेश नए शहरी विकास और औद्योगिक परियोजनाओं पर किया जाना अधिक संतुलित मॉडल हो सकता है। इससे गांव मजबूत होंगे, कृषि सुरक्षित रहेगी और औद्योगिक विकास भी निरंतर आगे बढ़ेगा।
आज आवश्यकता विकास और कृषि के बीच किसी एक को चुनने की नहीं, बल्कि दोनों के बीच संतुलन स्थापित करने की है। आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश और भारत की वास्तविक समृद्धि इसी संतुलित विकास मॉडल पर निर्भर करेगी।
(यह लेखक के व्यक्तिगत एवं नीतिगत विचार हैं। इनका उद्देश्य सार्वजनिक विमर्श को प्रोत्साहित करना है।)
प्रिय पाठकों एवं दर्शकों, प्रतिदिन भारत सरकार , दिल्ली सरकार, राष्ट्रीय एवं दिल्ली राजनीति , दिल्ली मेट्रो, दिल्ली पुलिस तथा दिल्ली नगर निगम, NDMC, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र की ताजा एवं बड़ी खबरें पढ़ने के लिए hindi.tennews.in : राष्ट्रीय न्यूज पोर्टल को विजिट करते रहे एवं अपनी ई मेल सबमिट कर सब्सक्राइब भी करे। विडियो न्यूज़ देखने के लिए TEN NEWS NATIONAL यूट्यूब चैनल को भी ज़रूर सब्सक्राइब करे।
टेन न्यूज हिंदी | Ten News English | New Delhi News | Greater Noida News | NOIDA News | Yamuna Expressway News | Jewar News | NOIDA Airport News
Discover more from टेन न्यूज हिंदी
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
टिप्पणियाँ बंद हैं।