MSX मॉल में अव्यवस्थाओं और कथित अनियमितताओं पर निवेशकों का आरोप

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (17/06/2026): ग्रेटर नोएडा स्थित एमएसएक्स मॉल (प्रा.) लिमिटेड, साइट-4 को लेकर निवेशकों, दुकानदारों और किरायेदारों ने गंभीर आरोप लगाते हुए प्रशासन एवं संबंधित प्राधिकरणों से हस्तक्षेप की मांग की है। एमएसएक्स मॉल शॉप ओनर वेलफेयर एसोसिएशन (पंजीकृत) के पदाधिकारियों का आरोप है कि मॉल प्रबंधन द्वारा निवेशकों और किरायेदारों के साथ कथित रूप से मनमाना व्यवहार किया जा रहा है तथा स्वीकृत रिजॉल्यूशन प्लान और विभिन्न न्यायिक आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है।

एसोसिएशन के अनुसार मॉल में आज भी कई बुनियादी सुविधाएं अधूरी हैं। ग्राउंड फ्लोर पर मौजूद एकमात्र वॉशरूम पूरी तरह विकसित नहीं है और उसकी स्थिति भी संतोषजनक नहीं बताई जा रही है। आरोप है कि सिनेमा क्षेत्र को छोड़कर अन्य फ्लोरों पर वॉशरूम की व्यवस्था नहीं है, जिससे आगंतुकों और व्यवसायियों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। निवेशकों का कहना है कि मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण मॉल में ग्राहकों की संख्या भी प्रभावित हो रही है।

दुकानदारों और निवेशकों ने यह भी आरोप लगाया है कि दुकानों के पंजीकरण, बिक्री और किराये से संबंधित प्रक्रियाओं में अनियमितताएं बरती गई हैं। उनका दावा है कि स्वीकृत रिजॉल्यूशन प्लान और लागू कानूनों की अनदेखी करते हुए कुछ दुकानों का गलत तरीके से पंजीकरण किया गया। साथ ही, वास्तविक स्वामियों की जानकारी और सहमति के बिना कई यूनिटों को किराये पर देने अथवा बेचने के आरोप भी लगाए गए हैं।

एसोसिएशन ने सफल रिजॉल्यूशन आवेदकों श्री माधव शरण अग्रवाल एवं श्रीमती अलका अग्रवाल की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मॉल के संचालन और निर्णयों पर कथित रूप से उनकी पुत्री गरिमा गुप्ता का नियंत्रण है, जबकि उनके प्रतिनिधित्व को लेकर कोई वैध प्राधिकरण पत्र सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराया गया है।

निवेशकों का आरोप है कि किरायेदारों से प्राप्त किराया, जिसे पहले बिल्डर, बाद में रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (RP) और वर्तमान में सफल रिजॉल्यूशन आवेदक (SRA) द्वारा एकत्र किया गया, वह विभिन्न न्यायालयी आदेशों के बावजूद वास्तविक निवेशकों तक नहीं पहुंचा है। उनका दावा है कि यह राशि करोड़ों रुपये में हो सकती है।

मॉल में सुरक्षा मानकों को लेकर भी गंभीर चिंताएं जताई गई हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इलेक्ट्रिकल और सिविल सुरक्षा नियमों का पूर्ण पालन नहीं किया जा रहा है। कई स्थानों पर खुले विद्युत तार, कॉमन एरिया में बनाए गए कियोस्क तथा आपातकालीन मार्गों में अवरोध जैसी स्थितियां सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकती हैं। इसके अतिरिक्त, शर्तों के साथ जारी किए गए कंप्लीशन सर्टिफिकेट की शर्तों के अनुपालन पर भी सवाल उठाए गए हैं।

दुकानदारों ने आरोप लगाया है कि मॉल में व्यवसाय कर रहे कई प्रतिष्ठानों की बिजली आपूर्ति अचानक काट दी गई। आरोपों के अनुसार ग्राउंड फ्लोर की दुकान संख्या 133, 143-बी और सेकंड फ्लोर की दुकान संख्या 227 सहित कई यूनिटों की बिजली बाधित की गई। प्रभावित पक्षों का कहना है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा बिजली बहाल करने की सलाह दिए जाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया।

शिकायत में दुकान संख्या 118-ए की रजिस्ट्री लंबित रहने का भी मुद्दा उठाया गया है। आरोप है कि संबंधित फाइल, जिस पर क्षेत्रीय प्रबंधक UPSIDA के हस्ताक्षर हैं, उसे आगे की प्रक्रिया के लिए जारी नहीं किया गया। इसके चलते सरकारी राजस्व और स्टांप शुल्क का भी नुकसान होने की बात कही गई है।

एसोसिएशन ने दावा किया है कि कुछ निवेशकों और समिति सदस्यों पर अपने लंबित मामलों को वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया। साथ ही, FIR संख्या 599/24 का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया कि कुछ व्यक्तियों के साथ साजिशपूर्वक उत्पीड़न किया गया तथा एक कियोस्क को कथित रूप से समझौते की शर्तों के विपरीत हटाकर नुकसान पहुंचाया गया।

निवेशकों ने यह भी आरोप लगाया है कि कई दुकानों के ताले तोड़कर उन्हें बिना मालिकों की अनुमति के किराये पर दिया गया तथा कुछ मामलों में एक ही यूनिट को एक से अधिक बार बेचने की शिकायतें भी सामने आई हैं। इसके अलावा, UPSIDA द्वारा स्वीकृत नक्शे में कथित बदलाव, पार्किंग क्षेत्र के व्यावसायिक उपयोग, मरम्मत कार्यों के लिए पार्किंग के इस्तेमाल और अतिरिक्त पार्किंग स्पेस को किराये पर देने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।

मॉल के बुनियादी ढांचे को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि प्रस्तावित पांच लिफ्टों के स्थान पर केवल दो लिफ्ट संचालित हैं, जबकि कई एस्केलेटर भी कार्य नहीं कर रहे। इसके अतिरिक्त केंद्रीय वातानुकूलन (सेंट्रलाइज्ड एयर कंडीशनिंग) प्रणाली का भी प्रभावी उपयोग नहीं किया जा रहा है।

एसोसिएशन का यह भी दावा है कि वर्चुअल स्पेस में निवेश करने वाले अनेक निवेशकों को किराये की राशि नहीं मिल रही है। इसमें हॉल, फूड आउटलेट और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों से संबंधित निवेश शामिल बताए गए हैं। साथ ही, कई वेंडर्स का लाखों रुपये का भुगतान भी लंबित होने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि भुगतान के बदले ऐसी व्यावसायिक जगहों की पेशकश की जा रही है, जिन पर संबंधित पक्षों का वैध अधिकार नहीं है।

एमएसएक्स मॉल शॉप ओनर वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव एवं समिति सदस्य गुरदीप सिंह लांबा ने बताया कि मॉल से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर 25 से अधिक निवेशकों ने न्यायालयों में मामले दायर कर रखे हैं। उन्होंने प्रशासन, न्यायिक संस्थाओं और संबंधित विभागों से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।

हालांकि, इस पूरे मामले में लगाए गए सभी आरोप निवेशकों, दुकानदारों और एमएसएक्स मॉल शॉप ओनर वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से लगाए गए हैं। टेन न्यूज ने इन आरोपों पर मॉल प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए संबंधित अधिकारियों और प्रबंधन से संपर्क करने का प्रयास किया है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी थी। मॉल प्रबंधन का पक्ष प्राप्त होते ही उसे भी समाचार में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा, ताकि पाठकों के समक्ष मामले का संतुलित और तथ्यात्मक पक्ष प्रस्तुत किया जा सके।


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