नौवीं में फेल छात्रों के लिए दिल्ली सरकार शुरू करेगी विशेष काउंसलिंग अभियान
टेन न्यूज नेटवर्क
New Delhi News (13 June 2026): नौवीं कक्षा में लगातार दो या तीन बार असफल होने वाले छात्रों के स्कूल छोड़ने की बढ़ती प्रवृत्ति को रोकने के लिए दिल्ली सरकार नई पहल करने जा रही है। इस योजना के तहत ऐसे छात्रों की पहचान कर उनकी सूची तैयार की जाएगी और फिर उन्हें तथा उनके अभिभावकों को सुविधाजनक समय पर स्कूल बुलाकर विशेष काउंसलिंग दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य छात्रों को पढ़ाई छोड़ने से रोकना और उन्हें दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है, ताकि उनका भविष्य प्रभावित न हो।
योजना के तहत स्कूल प्रशासन छात्रों और उनके अभिभावकों को शिक्षा पूरी करने के महत्व, रोजगार और करियर से जुड़ी संभावनाओं तथा पढ़ाई जारी रखने के लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी देगा। अधिकारियों का मानना है कि कई छात्र लगातार असफल होने के बाद आत्मविश्वास खो देते हैं और पढ़ाई छोड़ने का फैसला कर लेते हैं। ऐसे में व्यक्तिगत संवाद और सकारात्मक मार्गदर्शन के जरिए उन्हें दोबारा प्रेरित करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि वे नियमित रूप से अपनी शिक्षा जारी रखें।
यदि कोई छात्र नियमित स्कूल प्रणाली में पढ़ाई जारी रखने के लिए तैयार नहीं होता है, तो उसे राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) के विकल्प के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। सरकार चाहती है कि किसी भी छात्र की शिक्षा बीच में न रुके और उसे अपनी परिस्थितियों के अनुसार पढ़ाई पूरी करने का अवसर मिले। NIOS के माध्यम से छात्र अपनी सुविधा और लचीले ढंग से शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं तथा आगे की पढ़ाई और करियर के लिए आवश्यक योग्यता हासिल कर सकते हैं।
सरकारी स्कूलों के शिक्षकों का कहना है कि नौवीं कक्षा विद्यार्थियों के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण चरणों में से एक होती है। आठवीं तक नो-डिटेंशन नीति के कारण अधिकांश छात्र बिना रुके अगली कक्षा में पहुंच जाते हैं, लेकिन नौवीं में परीक्षा और मूल्यांकन का स्तर अचानक कठिन हो जाता है। जिन छात्रों की बुनियादी शैक्षणिक तैयारी कमजोर होती है, वे असफल होने के बाद खुद को दूसरों से पीछे महसूस करने लगते हैं और धीरे-धीरे पढ़ाई से दूरी बना लेते हैं। इसलिए उनके साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार और उचित मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है।
शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान ऐसे छात्रों के लिए एक प्रभावी विकल्प साबित हो सकता है जो किसी कारणवश पारंपरिक स्कूल व्यवस्था में सहज महसूस नहीं करते। NIOS उन्हें अपनी गति और सुविधानुसार पढ़ाई पूरी करने का अवसर देता है, जिससे वे दसवीं और आगे की शिक्षा भी जारी रख सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह व्यवस्था हजारों ऐसे छात्रों के लिए नया अवसर बन सकती है, जो सामान्य स्कूल प्रणाली से बाहर होने की कगार पर हैं।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल काउंसलिंग से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। इसके साथ छात्रों की बुनियादी शैक्षणिक क्षमता को मजबूत करना, अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराना, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहयोग बढ़ाना और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना भी जरूरी है। उनका कहना है कि असली सफलता तब मिलेगी जब बच्चों को ऐसा सकारात्मक और सहयोगी वातावरण मिलेगा, जहां वे आत्मविश्वास के साथ सीख सकें और अपने भविष्य को नई दिशा दे सकें। इसी उद्देश्य से दिल्ली सरकार की यह पहल ड्रॉपआउट दर कम करने और शिक्षा से दूर हो रहे छात्रों को दोबारा मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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