New Delhi News (28 May 2026): दिल्ली में दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने के एक गंभीर मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने आरोपी सास को जमानत देने से इनकार कर दिया है। यह मामला उस 19 वर्षीय नवविवाहिता से जुड़ा है, जिसने शादी के महज आठ महीने के भीतर कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी। न्यायमूर्ति Swarna Kanta Sharma की पीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्तिगत घटना नहीं, बल्कि समाज की एक “परेशान करने वाली सच्चाई” को उजागर करता है, जहां दहेज की मांग और घरेलू उत्पीड़न आज भी कई युवतियों की जिंदगी पर भारी पड़ रहे हैं।
मामले के अनुसार, मृतका पर उसके ससुराल पक्ष द्वारा कथित रूप से 3 लाख रुपये की दहेज मांग को लेकर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। आरोप है कि शादी के शुरुआती महीनों में ही उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया, जिसके चलते उसने आत्महत्या जैसा कदम उठाया। अदालत ने यह भी कहा कि इतने कम समय में वैवाहिक जीवन का इस तरह दर्दनाक अंत होना गंभीर चिंता का विषय है और इससे जुड़े आरोपों की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने कुछ अहम सबूत भी रखे गए, जिनमें एक ऑडियो रिकॉर्डिंग शामिल थी, जिसमें मृतका को अपने भाई से रोते हुए कथित उत्पीड़न की बात करते सुना गया। शिकायतकर्ता पक्ष ने यह भी दावा किया कि उसे धमकी दी गई और लगातार प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। वहीं, आरोपी सास ने अपनी जमानत याचिका में तर्क दिया कि वह घटना के समय मौजूद नहीं थी और पूरा विवाद पति-पत्नी के बीच किसी अन्य कारण से हुआ था, न कि दहेज की मांग को लेकर।
हालांकि दिल्ली पुलिस ने अदालत में दलील दी कि मामले में जुटाए गए सबूत और परिस्थितियां गंभीर हैं और आरोपी सास की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पुलिस ने कहा कि मृतका के पति की उम्र कम होने और परिवार के प्रभाव में होने के कारण पूरे मामले में सास की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। अदालत ने भी माना कि जांच के प्रारंभिक चरण में उपलब्ध सामग्री गंभीर आरोपों की ओर संकेत करती है, इसलिए जमानत देना उचित नहीं होगा।
अंत में हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में अदालत को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि यह सिर्फ एक पारिवारिक विवाद नहीं बल्कि एक युवा जीवन के असमय समाप्त होने का मामला है। अदालत ने कहा कि समाज में दहेज और घरेलू उत्पीड़न जैसी समस्याएं अब भी गंभीर रूप से मौजूद हैं और इन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता। इसी आधार पर सास की जमानत याचिका खारिज कर दी गई और मामले की आगे की जांच जारी रखने के निर्देश दिए गए।
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