रामलीला मैदान ऐछर बिरोड़ा में राम कथा का सातवां दिन: राम वनवास प्रसंग सुन भावुक हुए श्रद्धालु
टेन न्यूज नेटवर्क
Greater Noida News (13/04/2026): ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पाई-1 स्थित रामलीला मैदान ऐछर बिरोड़ा में धार्मिक रामलीला कमेटी के तत्वावधान में चल रही राम कथा के सातवें दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय कथावाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज ने अपनी ओजपूर्ण और भावनात्मक वाणी के माध्यम से रामायण के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया, जिसे सुनकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
कथा के दौरान उन्होंने राम वनवास का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। भगवान राम द्वारा अपने पिता के वचन की रक्षा और कुल की मर्यादा बनाए रखने के लिए पूरे राजपाट का त्याग कर वन जाने की कथा सुनकर कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। कथावाचक ने कहा कि यह प्रसंग त्याग, मर्यादा और कर्तव्य पालन का सर्वोच्च उदाहरण है, जिससे प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में प्रेरणा लेनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि राजा दशरथ ने अपने जीवन के अंतिम चरण में राज्य की जिम्मेदारी राम को सौंपकर स्वयं तप और भक्ति में जीवन बिताने का विचार किया था। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने कहा कि जीवन में जब तक शक्ति और सामर्थ्य है, तब तक जिम्मेदारियों को सही समय पर आगे की पीढ़ी को सौंप देना चाहिए और ईश्वर की भक्ति में मन लगाना चाहिए।
कथा के दौरान माता कौशल्या के धैर्य और त्याग का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने कहा कि जब राम को वनवास मिला तब भी माता कौशल्या ने किसी को दोष नहीं दिया, बल्कि अपने पुत्र को धर्म और मर्यादा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। इसी प्रकार लक्ष्मण के समर्पण और भाईचारे का वर्णन करते हुए कहा गया कि जब राम वन जाने लगे तो लक्ष्मण ने भी उनके साथ जाने का निश्चय किया और माता से अनुमति लेकर पूरे समर्पण के साथ चौदह वर्षों तक उनकी सेवा की।

कथा में यह भी बताया गया कि जब राम, सीता और लक्ष्मण वनगमन के लिए अयोध्या से निकले तो नगर के लोग अपने घरों से निकलकर उनके पीछे चल पड़े। इस प्रसंग का वर्णन इतना भावुक था कि पंडाल में उपस्थित कई श्रद्धालुओं की आंखों से आंसू छलक पड़े।
कथावाचक ने यह भी कहा कि रामायण में कैकेयी का पात्र भी महत्वपूर्ण है। यदि यह प्रसंग न होता तो राम कथा का विस्तार संभव नहीं होता और रामराज्य की स्थापना का मार्ग भी प्रशस्त नहीं हो पाता। उन्होंने बताया कि जीवन में कभी-कभी कठोर निर्णय भी बड़े उद्देश्य को पूरा करने में सहायक होते हैं।
कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया गया कि जीवन में धर्म, त्याग और कर्तव्य पालन को सर्वोपरि रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि हनुमान की तरह ईश्वर के नाम का स्मरण और भक्ति को जीवन का हिस्सा बनाना ही सच्चे सुख का मार्ग है।

राम कथा के इस आयोजन में हरवीर मावी मुख्य यजमान के रूप में मौजूद रहे, जबकि सह-यजमान के रूप में शेर सिंह भाटी और धीरज शर्मा शामिल हुए। दैनिक यजमान के रूप में विधायक नंद किशोर गुर्जर, सुरेंद्र शर्मा और अमित भाटी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में कई सामाजिक और धार्मिक व्यक्तित्व भी शामिल हुए। इनमें वरिष्ठ प्रचारक ईश्वर दयाल, स्वामी सुशील महाराज, प्रांत प्रचारक वेदपाल, जिला प्रचारक नेम पाल, राजकुमार, आयोजन समिति के अध्यक्ष आनंद भाटी, पंडित प्रदीप शर्मा, कुलदीप शर्मा, दिनेश गुप्ता, पवन नागर, ममता तिवारी, मनीष डावर, अतुल आनंद, फिरे प्रधान, सत्यवीर मुखिया, महेश शर्मा बदौली, उमेश गौतम, रोशनी सिंह, वीरपाल मावी, तेज कुमार भाटी, सुंदर भाटी, भगवत भाटी, ज्योति सिंह, अश्विनी शुक्ला, राकेश बैसोया, रश्मि अरोड़ा, गीता सागर, यशपाल नागर, चैनपाल प्रधान, अजय कसाना, पवन भाटी, राजेश नंबरदार और राकेश नंबरदार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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