नोएडा के उद्योगों की आवाज: यूनिफाइड रेगुलेशन 2025 पर उठे सवाल | Noida Authority
टेन न्यूज नेटवर्क
NOIDA News (24/03/2026): नोएडा के औद्योगिक (Industrial) सेक्टर से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और नीतिगत (Policy) मुद्दों को लेकर आज सैक्टर-6 स्थित बोर्ड रूम में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) कृष्णा करुणेश (Krishna Karunesh) ने की, जिसमें नोएडा एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन (NEA) के पदाधिकारियों और प्राधिकरण के विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान उद्योगपतियों ने यूनिफाइड रेगुलेशन 2025 (Unified Regulation 2025) और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़ी कई जटिलताओं को विस्तार से उठाया।
एनईए अध्यक्ष विपिन कुमार मल्हन (Vipin Kumar Malhan) ने बताया कि औद्योगिक इकाइयों में कमर्शियल गतिविधियों को लेकर धारा 10B के तहत जारी नोटिसों की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक जटिल और महंगी हो गई है। पहले जहां शपथ पत्र देने पर राहत मिल जाती थी, वहीं अब 1% चार्ज और सर्वे प्रक्रिया लागू कर दी गई है, जिससे उद्यमियों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है।
बैठक में यूनिफाइड रेगुलेशन 2025 के तहत ट्रांसफर चार्ज (Transfer Charges) में 4% से बढ़ाकर 10% करने को लेकर भी तीखी नाराजगी जताई गई। उद्यमियों का कहना है कि यह वृद्धि करीब 250% है, जो उद्योगों के लिए भारी आर्थिक दबाव (Financial Burden) पैदा करती है। इसके साथ ही औद्योगिक भूखंडों के निर्माण और संचालन के लिए समयसीमा को 11 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष करना भी अव्यवहारिक बताया गया, खासकर तब जब एनओसी (NOC) और अन्य स्वीकृतियों में काफी समय लग जाता है।
एलएलपी (LLP) में कंपनी के परिवर्तन को लेकर सीआईसी शुल्क (CIC Charges) और डीड की अनिवार्यता को भी कानून के विपरीत बताया गया। उद्यमियों ने तर्क दिया कि एलएलपी एक्ट 2008 (LLP Act 2008) के अनुसार यह केवल संरचनात्मक बदलाव है, न कि स्वामित्व का हस्तांतरण, इसलिए अतिरिक्त शुल्क और शर्तें लागू करना उचित नहीं है।
इसके अलावा कई व्यावहारिक समस्याएं भी सामने रखी गईं, जैसे बिना जानकारी के कार्यशील प्रमाण-पत्र (Functional Certificate) न लेने वाले उद्योगों पर कार्रवाई, किराया अनुमति शुल्क का पूरे प्लॉट पर लागू होना, पुराने मामलों में ट्रांसफर डीड की जटिलता, वेंडर जोन (Vendor Zone) में अव्यवस्था, और सैक्टर-63 में टूटी सड़कों की समस्या। साथ ही, हाई नेटवर्क जैमर (Network Jammer) के कारण औद्योगिक क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क बाधित होने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया।
बैठक में यह भी मांग की गई कि शेयरहोल्डिंग परिवर्तन पर लगाए जा रहे ₹500 प्रतिदिन के जुर्माने को घटाकर ₹100 किया जाए और समयवृद्धि शुल्क को भी पुरानी नीति के अनुसार ही लागू किया जाए। उद्यमियों ने ई-निलामी (E-auction) के कारण बढ़ती जमीन की कीमतों और लीज रेंट (Lease Rent) में हो रही वृद्धि पर भी चिंता जताई।
सीईओ कृष्णा करुणेश ने सभी मुद्दों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए और आश्वासन दिया कि उद्योगों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
इस बैठक को उद्योगों और प्रशासन के बीच संवाद (Dialogue) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में नीतिगत सुधार (Policy Reform) की उम्मीदें बढ़ी हैं।
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