मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ पर समाज की नाराज़गी, कोर्ट पहुंचा मामला
टेन न्यूज़ नेटवर्क
National News (09/01/2026): मनोज बाजपेयी की नेटफ्लिक्स पर आने वाली फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ के नाम को लेकर सोशल मीडिया और अदालतों में बड़ा विवाद शुरू हो गया है। लोगों का मानना है कि इस नाम के जरिए एक पूरे समाज को गलत तरीके से दिखाया जा रहा है, जिससे इंटरनेट पर काफी बहस छिड़ गई है। जैसे ही फिल्म का छोटा सा वीडियो यानी टीज़र सामने आया, लोगों ने इस बात पर गुस्सा जताया कि भ्रष्टाचार दिखाने के लिए एक खास जाति या समाज के नाम का इस्तेमाल क्यों किया गया।
फिल्म के नाम ‘घूसखोर पंडित’ पर लोग काफी नाराज हैं। उनका कहना है कि ‘पंडित’ एक सम्मानित शब्द है, जिसे रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के साथ जोड़ना गलत है। लोगों का कहना है कि अगर कहानी किसी एक भ्रष्ट आदमी के बारे में है, तो उसके लिए पूरे समाज के सरनेम का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे उस जाति के सभी लोगों की छवि खराब होती है।
यह मामला अब सिर्फ इंटरनेट पर बहस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कोर्ट-कचहरी तक पहुँच गया है। कई लोगों और संस्थाओं ने नेटफ्लिक्स इंडिया और फिल्म बनाने वालों को कानूनी नोटिस भेजे हैं। उनका आरोप है कि यह फिल्म जानबूझकर एक समाज की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का अपमान कर रही है और उनकी बदनामी कर रही है।
फिल्म से जुड़े लोगों का कहना है कि इसके हीरो मनोज बाजपेयी, लेखक और डायरेक्टर खुद भी ब्राह्मण समाज से हैं, इसलिए इसमें कुछ गलत नहीं है। लेकिन आम जनता का कहना है कि किसी समाज का हिस्सा होने का मतलब यह नहीं कि आप उसी समाज के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करें। कुछ लोग यह भी मान रहे हैं कि जानबूझकर ऐसा विवादित नाम रखा गया है ताकि फिल्म को फ्री में पब्लिसिटी मिले।
इस विवाद ने पुरानी नाराजगी को भी ताज़ा कर दिया है। लोगों को याद आ रहा है कि फिल्मों में पहले भी कई बार ब्राह्मणों का मज़ाक उड़ाया गया है, जैसे उनकी चोटी को लेकर मज़ाक बनाना या उन्हें लालची दिखाना। लोगों का कहना है कि रचनात्मक आज़ादी के नाम पर किसी भी समुदाय को बार-बार निशाना बनाना ठीक नहीं है।
अभी हालात ऐसे हैं कि सब यह देख रहे हैं कि क्या नेटफ्लिक्स इस फिल्म का नाम बदलेगा या फिर यह मामला लंबी कानूनी लड़ाई तक खिंचेगा। असली सवाल यह खड़ा हो गया है कि कलाकार की अपनी बात कहने की आज़ादी कहाँ खत्म होती है और समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारी कहाँ से शुरू होती है। हालांकि, कोर्ट यह तय करेगा कि क्या यह वाकई मानहानि का मामला है, लेकिन इस विवाद ने एक बड़ी बहस छेड़ दी है: क्या फिल्म बनाने वालों को सिर्फ चर्चा पाने के लिए विवादित नाम रखने चाहिए, या उन्हें समाज की भावनाओं का भी ख्याल रखना चाहिए?
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