स्वच्छता सर्वेक्षण पर सियासत तेज: AAP का आरोप- फर्जी डेटा के आधार पर मिल रही नंबर-1 रैंकिंग
टेन न्यूज नेटवर्क
New Delhi News (06 फरवरी 2026): स्वच्छता सर्वेक्षण (Swachhata Survey) को लेकर आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। नेता विपक्ष अंकुश नारंग और पूर्व महापौर डॉ. शैली ओबेरॉय ने संयुक्त प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि गुजरात के सूरत शहर को स्वच्छता सर्वेक्षण में नंबर-वन रैंकिंग फर्जी आंकड़ों (Data Manipulation) के आधार पर दी जा रही है और इसमें नगर निगम तथा भाजपा नेताओं की मिलीभगत है।
अंकुश नारंग ने कहा कि पिछले पांच वर्षों से सूरत में कूड़े के निस्तारण (Waste Disposal) की स्थिति बेहद खराब है, लेकिन इसके बावजूद स्वच्छता सर्वेक्षण में उसे लगातार नंबर-वन दिखाया जा रहा है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यह जनता को गुमराह करने की कोशिश है और इस पर भाजपा को शर्म आनी चाहिए। नारंग ने कहा कि इस मामले की विस्तृत जानकारी डॉ. शैली ओबेरॉय देंगी कि दिल्ली में किस प्रकार काम हुआ और सूरत में क्या हो रहा है।
डॉ. शैली ओबेरॉय ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि स्वच्छता सर्वेक्षण ‘मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स’ (MoHUA) द्वारा हर वर्ष कराया जाता है, जिसमें शहरों की सफाई व्यवस्था का मूल्यांकन कई पैरामीटर्स के आधार पर किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस सर्वे में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, सोर्स सेग्रीगेशन, वेस्ट प्रोसेसिंग और सैनिटेशन इंफ्रास्ट्रक्चर (Sanitation Infrastructure) जैसे मानकों पर डेटा लिया जाता है और उसी के आधार पर शहरों को रैंकिंग दी जाती है।
ओबेरॉय ने दावा किया कि 2023, 2024 और 2025 में सूरत नगर निगम को लगातार पहली रैंक दी गई, जबकि आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने ‘खजोद डिस्पोजल साइट’ का निरीक्षण किया तो वहां करीब 1.4 मिलियन मीट्रिक टन कूड़ा पड़ा मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पार्षद निरीक्षण (Inspection) के लिए पहुंचे तो उन्हें साइट में प्रवेश तक नहीं दिया गया। बाद में जबरन प्रवेश कर निरीक्षण किया गया, जिससे सर्वेक्षण के दावों पर सवाल खड़े हो गए।
उन्होंने कहा कि स्वच्छता सर्वेक्षण में भाग लेने वाले शहरों के लिए 100 प्रतिशत सॉलिड वेस्ट डिस्पोजल अनिवार्य है, लेकिन यदि साइट पर इतना कूड़ा मौजूद है तो सूरत ने यह मानक कैसे पूरा किया। ओबेरॉय ने मंत्रालय से मांग की कि सूरत सहित सभी शहरों के जमा किए गए डेटा का री-वेरिफिकेशन (Re-Verification) और री-इवैल्यूएशन कराया जाए, ताकि सर्वे की पारदर्शिता बनी रहे।
डॉ. ओबेरॉय ने आरोप लगाया कि जहां-जहां भाजपा की सरकारें हैं, वहां डेटा में हेरफेर कर शहरों को बेहतर रैंकिंग दी जा रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार ने कूड़ा मुक्त शहर बनाने के लिए जमीनी स्तर पर काम किया और नियमित निरीक्षण किए, जबकि सूरत में वास्तविकता छिपाई जा रही है।
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