NOIDA News (27/01/2026): सेक्टर-150 में कार के पानी में डूब जाने से इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के मामले में गठित विशेष जांच टीम (SIT) आज अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपने जा रही है। सात दिनों तक चली गहन पड़ताल, सैकड़ों पन्नों के दस्तावेजों की समीक्षा और दर्जनों अधिकारियों-कर्मचारियों के बयान दर्ज करने के बाद यह रिपोर्ट तैयार की गई है। रिपोर्ट को लेकर प्रशासनिक और पुलिस महकमे में बड़ी कार्रवाई की अटकलें तेज हो गई हैं।
SIT को नोएडा प्राधिकरण, पुलिस विभाग और जिला प्रशासन की ओर से करीब 600 पन्नों के जवाब और रिकॉर्ड सौंपे गए। इनमें जलभराव से निपटने की पूर्व योजना, स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम की वास्तविक स्थिति, कंट्रोल रूम की निगरानी व्यवस्था, आपातकालीन रिस्पॉन्स टाइम और मौके पर मौजूद अधिकारियों की भूमिका से जुड़े तथ्य शामिल हैं। टीम ने इन सभी पहलुओं का बारीकी से अध्ययन कर जिम्मेदारियों की स्पष्ट पहचान की है।
जांच के दौरान सबसे अहम और संवेदनशील मुद्दा यह सामने आया कि हादसे के बाद युवराज मेहता को कार से बाहर निकालने में लगभग दो घंटे का समय क्यों लगा। SIT की जांच में SDRF, पुलिस और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय की कमी, रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करने में अनावश्यक विलंब और कंट्रोल रूम की निष्क्रियता को गंभीर लापरवाही माना गया है। घटनाक्रम के पूरे समयक्रम को मिनट-दर-मिनट खंगालते हुए यह भी देखा गया कि शुरुआती एक घंटे में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी।
SIT रिपोर्ट में यह तथ्य भी उभरकर आया है कि जिस क्षेत्र में हादसा हुआ, वहां जल निकासी की स्थायी व्यवस्था पहले से प्रस्तावित थी, लेकिन वर्षों तक उस पर अमल नहीं किया गया। जांच में सामने आया कि प्लॉट आवंटन के समय से लेकर हादसे के दिन तक कई स्तरों पर जिम्मेदारी तय होती है। उस दौरान तैनात वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर जूनियर इंजीनियरों तक की भूमिका को रिकॉर्ड में लिया गया है।
सूत्रों के अनुसार SIT रिपोर्ट में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज हैं। रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपे जाने के बाद वह स्वयं इसका परीक्षण करेंगे। माना जा रहा है कि दोषी पाए जाने वालों पर निलंबन, विभागीय जांच, वेतनवृद्धि रोकने से लेकर आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने तक के सख्त निर्देश दिए जा सकते हैं।
रिपोर्ट में केवल जिम्मेदारी तय करने तक सीमित न रहकर भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस सुझाव भी शामिल किए गए हैं। जलभराव की समस्या से निपटने के लिए इमरजेंसी प्रोटोकॉल, कंट्रोल रूम की जवाबदेही, रेस्क्यू रिस्पॉन्स टाइम तय करने और ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करने जैसे बिंदुओं पर विशेष सिफारिशें की गई हैं। युवराज मेहता की मौत ने नोएडा के विकास मॉडल और आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री के फैसले पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि यह मामला सिर्फ रिपोर्ट तक सीमित रहेगा या जिम्मेदारों पर वास्तव में कड़ी कार्रवाई होगी।
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