GREATER NOIDA News (22/01/2026): नोएडा के सेक्टर-150 में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की डूबने से हुई मौत के मामले में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए गंभीर रुख अपनाया है। NGT की प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने 20 जनवरी 2026 को प्रकाशित एक राष्ट्रीय समाचार के आधार पर इस प्रकरण को पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन से जुड़ा गंभीर मामला माना है।
NGT के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंटिल वेल की पीठ ने इस घटना को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए मूल आवेदन संख्या 52/2026 दर्ज किया। इस मामले की सुनवाई 22 जनवरी 2026 को की गई।
नोएडा के सेक्टर-150 स्थित एक व्यावसायिक स्थल पर जलभराव से बनी गहरी खाई में गिरने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई थी। घने कोहरे के कारण रास्ता स्पष्ट न होने से वह एक तीखे मोड़ पर नियंत्रण खो बैठे और पानी से भरी खाई में जा गिरे। यह स्थान मूल रूप से एक निजी मॉल परियोजना के लिए आवंटित किया गया था, लेकिन बीते एक दशक से यहां बारिश का पानी और आसपास की सोसायटियों का अपशिष्ट जल जमा होता रहा, जिससे यह इलाका स्थायी तालाब में तब्दील हो गया।
NGT के संज्ञान में आए दस्तावेजों और रिपोर्ट के अनुसार, सिंचाई विभाग ने वर्ष 2015 में इस क्षेत्र के लिए स्टॉर्म वॉटर मैनेजमेंट योजना तैयार की थी। योजना के तहत हिंडन नदी में पानी की निकासी के लिए एक हेड रेगुलेटर स्थापित किया जाना था। वर्ष 2016 में नोएडा प्राधिकरण ने इस योजना के सर्वे और डिजाइन के लिए सिंचाई विभाग को 13.05 लाख रुपये भी जारी किए, लेकिन तमाम सर्वेक्षण और निरीक्षणों के बावजूद योजना कागजों से आगे नहीं बढ़ सकी।
योजना के लागू न होने के कारण जल निकासी की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं बन पाई। परिणामस्वरूप भारी बारिश के दौरान आसपास की कई आवासीय सोसायटियों के बेसमेंट जलमग्न हो गए। नियंत्रित आउटलेट के अभाव में पानी लंबे समय तक जमा रहा, जिससे न केवल पर्यावरणीय खतरा बढ़ा बल्कि जनजीवन भी जोखिम में पड़ गया। स्थानीय निवासियों ने बार-बार नोएडा प्राधिकरण पर लापरवाही का आरोप लगाया, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
NGT ने प्रारंभिक रूप से माना कि यह मामला पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के उल्लंघन की ओर इशारा करता है। न्यायाधिकरण ने कहा कि यह प्रकरण पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन और संबंधित कानूनों के क्रियान्वयन में गंभीर चूक को दर्शाता है।
इस मामले में NGT ने नोएडा प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सिंचाई विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव और गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी को पक्षकार बनाया है। सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले शपथपत्र के माध्यम से अपना जवाब दाखिल करें।
न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई विभाग बिना अधिवक्ता के सीधे जवाब दाखिल करता है, तो उसे वर्चुअल रूप से न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर मामले में सहायता करनी होगी। इस प्रकरण की अगली सुनवाई 10 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है। यह मामला न केवल एक व्यक्ति की दुखद मृत्यु से जुड़ा है, बल्कि यह शहरी नियोजन, जल निकासी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। NGT की सख्त टिप्पणी से यह संकेत मिलता है कि पर्यावरणीय लापरवाही के मामलों में अब जवाबदेही तय की जाएगी।
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