बिल्डरों के भूजल दोहन से युवराज की मौत?, करप्शन फ्री इंडिया संगठन ने क्या आरोप लगाए

टेन न्यूज नेटवर्क

Noida News (20 जनवरी 2026): नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत को लेकर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। करप्शन फ्री इंडिया संगठन ने आशंका जताई है कि क्षेत्र में बिल्डरों द्वारा लंबे समय से किए जा रहे भूजल दोहन और अधूरी छोड़ी गई बेसमेंट खुदाई के कारण बने स्थायी जलभराव ने इस हादसे को जन्म दिया। संगठन ने इस पूरे मामले की गहन जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित कर जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

संगठन के अनुसार, सेक्टर-150 में एक बिल्डर द्वारा बेसमेंट की खुदाई करने के बाद उसे यूं ही छोड़ दिया गया, जबकि आसपास की सोसाइटियों और कई बिल्डरों द्वारा बीते दो-तीन वर्षों से सैकड़ों बोर के जरिए लगातार भूजल दोहन किया जा रहा है। इसके चलते इलाके में 1 से 2 किलोमीटर तक स्थायी जलभराव बना हुआ है। सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में पानी आखिर कहां से आ रहा है, जबकि यह न तो बारिश और न ही बाढ़ का परिणाम बताया जा रहा है।

करप्शन फ्री इंडिया संगठन ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासनिक अधिकारी अनुराग सारस्वत को सौंपा। संगठन के संस्थापक चौधरी प्रवीण भारतीय ने कहा कि सिस्टम की लापरवाही, संसाधनों की कमी और जिम्मेदार एजेंसियों की सुस्ती के कारण ही युवराज मेहता की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि यदि SIT जांच हो रही है तो उसमें यह भी शामिल किया जाना चाहिए कि सेक्टर-150, 151, 149, 153 और 163 में चल रहे निर्माण कार्यों के दौरान भूजल स्तर कम करने के नाम पर वर्षों से हो रहे दोहन ने इस स्थिति को पैदा किया है।

संगठन के संस्थापक सदस्य आलोक नागर ने मांग की कि SIT जांच के दायरे में उन सभी बिल्डरों को भी लाया जाए जो अवैध रूप से भूजल दोहन कर रहे हैं। उन्होंने युवराज मेहता की मौत के लिए जिम्मेदार पाए जाने पर बिल्डरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और प्राकृतिक संसाधनों के विनाश के आरोप में कठोर धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि एक्सप्रेसवे की सर्विस रोड के साथ बनी ग्रीन बेल्ट में दो-तीन वर्षों से लगातार जलभराव के कारण हजारों पेड़ सूखकर मर चुके हैं, जो पर्यावरणीय नुकसान का बड़ा प्रमाण है।

आलोक नागर ने आरोप लगाया कि करप्शन फ्री इंडिया संगठन लंबे समय से इस मुद्दे को उठाता आ रहा है, लेकिन भूजल विभाग और जिला प्रशासन के कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत के चलते अवैध भूजल दोहन पर रोक नहीं लग पाई। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी द्वारा सिटी मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में टीम गठित किए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

इस दौरान संगठन के कई पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे, जिनमें बलराज हूंण, जिलाध्यक्ष प्रेम प्रधान, रिंकू बैसला, ज्ञानवीर पहलवान, तेजवीर चौहान, धर्मेंद्र भाटी, मोहित कपासिया, भीष्म कुमार, पवन सिंह, अजीत नागर, रिंकू भाटी और कृष्ण कुमार सहित अन्य लोग शामिल थे। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।


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