New Delhi News (20 January 2026): दिल्ली विधानसभा में नेता विपक्ष और आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता आतिशी मार्लेना ने अपने खिलाफ जारी विशेषाधिकार हनन नोटिस को लेकर सख्त रुख अपनाया है। विधानसभा सचिव को भेजे गए औपचारिक जवाब में उन्होंने सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने न तो सदन के भीतर और न ही बाहर कभी सिख गुरुओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणी की है। आतिशी ने नोटिस को अस्पष्ट और तथ्यहीन बताते हुए इसे राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित करार दिया।
दस्तावेज और अनएडिटेड वीडियो की मांग
आतिशी ने अपने जवाब में मामले से जुड़े सभी प्रासंगिक दस्तावेज, शिकायत की प्रति और सदन की कार्यवाही की प्रमाणित, अनएडिटेड वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि नोटिस में “सदन की कार्यवाही बाधित करने” जैसे गंभीर शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उनके कौन से शब्द या वक्तव्य आपत्तिजनक माने गए हैं। उनके अनुसार, बिना ठोस तथ्यों के इस तरह की कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है।
गुरुओं के अपमान का आरोप पूरी तरह खारिज
नेता विपक्ष ने साफ कहा कि 6 जनवरी को सदन में हुई उनकी टिप्पणी प्रदूषण और शासन व्यवस्था से संबंधित थी और उसमें सिख गुरुओं का कोई उल्लेख तक नहीं था। उन्होंने कहा, “मैंने अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में कभी भी सिख गुरुओं के प्रति अनादर नहीं दिखाया है।” आतिशी ने आरोप लगाया कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया, जिससे अनावश्यक विवाद खड़ा हुआ।
प्रक्रिया पर सवाल, नैसर्गिक न्याय की बात
आतिशी ने विधानसभा की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि नोटिस में दावा किया गया है कि अध्यक्ष की ओर से उन्हें अपनी बात रखने का अवसर दिया गया, जबकि वास्तव में ऐसा कोई संदेश या बुलावा उन्हें नहीं मिला। उन्होंने इसे नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए कहा कि बिना साक्ष्य और स्पष्ट आरोपों के कार्रवाई करना अनुचित है।
क्या है पूरा विवाद और आगे की राह
यह मामला 6 जनवरी 2026 को दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान प्रदूषण पर चर्चा के समय उठा, जब भाजपा विधायकों और विधानसभा अध्यक्ष ने आतिशी पर सिख गुरुओं के बलिदान को लेकर अमर्यादित टिप्पणी का आरोप लगाया। बाद में सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो को ‘आप’ ने डॉक्टर्ड बताया, जबकि विधानसभा अध्यक्ष ने फॉरेंसिक रिपोर्ट के हवाले से वीडियो को सही बताया है। अब विशेषाधिकार समिति आतिशी के जवाब और उनके द्वारा मांगे गए दस्तावेजों पर विचार करेगी। फिलहाल, यह मामला दिल्ली की राजनीति में सिख भावनाओं और सदन की गरिमा को लेकर तीखी बहस का विषय बना हुआ है।।
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