भारत के पड़ोस में बदलता धार्मिक समीकरण: आस्था, सत्ता और कूटनीति का गहरा संबंध
टेन न्यूज नेटवर्क
National News (06/01/2026): भारत के पड़ोसी देशों की धार्मिक जनसांख्यिकी केवल आस्था तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह अब राजनीति, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी प्रभावित करने वाला अहम कारक बन चुकी है। दक्षिण एशिया और उसके आसपास के देशों में धर्म की भूमिका लगातार मजबूत होती दिख रही है, जिसका सीधा असर क्षेत्रीय संतुलन और कूटनीतिक रिश्तों पर पड़ रहा है।
दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में बौद्ध धर्म का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। श्रीलंका में करीब 70 प्रतिशत आबादी थेरवाद बौद्ध धर्म को मानती है, जो वहां की राजनीति और राष्ट्रीय पहचान का अहम हिस्सा है। इसी तरह भूटान एक आधिकारिक बौद्ध राष्ट्र है, जहाँ शासन व्यवस्था और सामाजिक जीवन में बौद्ध दर्शन की गहरी छाप देखने को मिलती है। म्यांमार में भी लगभग 88 प्रतिशत आबादी बौद्ध है, हालांकि वहां ईसाई और मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय भी मौजूद हैं, जिनकी स्थिति समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बनती रही है।
भारत के पश्चिम और उत्तर-पश्चिमी पड़ोस में इस्लाम प्रमुख धर्म के रूप में स्थापित है। पाकिस्तान में लगभग 96 प्रतिशत और अफगानिस्तान में करीब 99 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है, जहाँ सुन्नी इस्लाम का वर्चस्व है। वहीं हिंद महासागर में स्थित मालदीव दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जहाँ पूरी आबादी सुन्नी मुस्लिम है और कानूनन किसी अन्य धर्म के सार्वजनिक पालन पर प्रतिबंध है। यह धार्मिक एकरूपता वहां की राजनीतिक और सामाजिक नीतियों में भी साफ नजर आती है।
नेपाल और बांग्लादेश का धार्मिक परिदृश्य थोड़ा अलग है। नेपाल भले ही अब आधिकारिक रूप से हिंदू राष्ट्र न हो, लेकिन आज भी लगभग 80 प्रतिशत आबादी हिंदू है, जो उसकी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाए हुए है। दूसरी ओर, बांग्लादेश में इस्लाम करीब 90 प्रतिशत आबादी का धर्म है, लेकिन हिंदू समुदाय वहां दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक समूह बना हुआ है, जो देश की बहुधार्मिक संरचना को दर्शाता है।
भारत का सबसे बड़ा पड़ोसी देश चीन धार्मिक दृष्टि से अन्य देशों से काफी अलग है। यहाँ बौद्ध और ताओ धर्म के साथ-साथ नास्तिकता या एथिज़्म को मानने वालों की संख्या काफी अधिक है। राज्य की नीतियों में धर्म की सीमित भूमिका और समाज में विचारधारात्मक विविधता चीन को इस क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान देती है।
इन देशों की धार्मिक संरचना केवल धार्मिक आस्था का प्रतिबिंब नहीं है, बल्कि यह उनकी विदेश नीति, आंतरिक सुरक्षा और सांस्कृतिक रिश्तों को भी दिशा देती है। आज के दौर में धर्म व्यक्तिगत विश्वास से आगे बढ़कर एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक कारक बन चुका है, जो भारत और उसके पड़ोसी देशों के संबंधों को गहराई से प्रभावित कर रहा है।
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