मिडिल क्लास ट्रैप: कड़ी मेहनत के बावजूद क्यों नहीं भर पाती आम आदमी की जेब

टेन न्यूज नेटवर्क

National News (06/01/2026): भारत तेज़ी से दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है, लेकिन इस चमकदार तस्वीर के पीछे एक कड़वी सच्चाई छिपी है। देश का मध्यम वर्ग, जो अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। आज भी आर्थिक दबाव, कर्ज़ और असुरक्षा के दायरे में फंसा हुआ है। सवाल यह है कि सालों की मेहनत, नौकरी और कमाई के बाद भी आम आदमी आर्थिक रूप से मज़बूत क्यों नहीं बन पाता?

भारतीय समाज में आज भी पैसे और मृत्यु जैसे विषयों पर खुलकर बात करना अशुभ माना जाता है। नतीजा यह है कि परिवार के कमाने वाले सदस्य अपने निवेश, बीमा या बैंक खातों की जानकारी घरवालों से साझा नहीं करते। आंकड़ों के मुताबिक, बैंकों और बीमा कंपनियों में 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की लावारिस रकम पड़ी है। इसे विशेषज्ञ “बागबान सिंड्रोम” कहते हैं, जहां एक पीढ़ी की कमाई और बचत जानकारी के अभाव में अगली पीढ़ी तक पहुंच ही नहीं पाती।

सोशल मीडिया ने दिखावे की संस्कृति को और बढ़ा दिया है। मध्यम वर्ग का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ समाज में स्टेटस दिखाने के लिए महंगे मोबाइल, कार और भव्य शादियों पर भारी कर्ज़ ले रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आज लोग सफल होने से ज्यादा सफल दिखने पर ज़ोर दे रहे हैं। इसका नतीजा यह होता है कि 10 से 15 साल तक लोगों की कमाई सिर्फ EMI चुकाने में ही खत्म हो जाती है।

भारत में मध्यम वर्ग अक्सर सिर्फ एक बीमारी या हादसे की दूरी पर आर्थिक तबाही से खड़ा होता है। इसके बावजूद लोग हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस को फालतू खर्च समझते हैं। जब कोई गंभीर बीमारी आती है, तो सालों की बचत कुछ ही महीनों में खत्म हो जाती है और परिवार दोबारा गरीबी की ओर धकेल दिया जाता है।

कॉलेज की पढ़ाई खत्म होते ही ज़्यादातर लोग सीखना छोड़ देते हैं। टैक्स, निवेश और फाइनेंशियल प्लानिंग की बुनियादी जानकारी के अभाव में पढ़े-लिखे लोग भी “21 दिन में पैसा डबल” जैसे स्कैम और डिजिटल धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक वित्तीय साक्षरता नहीं बढ़ेगी, मध्यम वर्ग इस आर्थिक चक्रव्यूह से बाहर नहीं निकल पाएगा।

समाज में आज भी एक वर्ग ऐसा है जो मानता है कि “पैसा बुरी चीज़ है” या “अमीर लोग ईमानदार नहीं होते।” इस पॉवर्टी माइंडसेट के चलते लोग जोखिम लेने, नई स्किल सीखने और खुद को अपग्रेड करने से डरते हैं। धीरे-धीरे यह सोच उन्हें वहीं रोक देती है, जहां वे हैं।

इंसान किस परिवार और हालात में पैदा हुआ, यह उसके हाथ में नहीं होता, लेकिन अपनी आर्थिक स्थिति को बदलना उसकी जिम्मेदारी जरूर है। फिजूलखर्ची पर रोक, परिवार में पैसों को लेकर खुली बातचीत, सही बीमा और लगातार सीखते रहना, यही वे रास्ते हैं, जो मध्यम वर्ग को इस “मिडिल क्लास ट्रैप” से बाहर निकाल सकते हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख / न्यूज आर्टिकल सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी और प्रतिष्ठित / विश्वस्त मीडिया स्रोतों से मिली जानकारी पर आधारित है।यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। पाठक कृपया स्वयं इस की जांच कर सूचनाओं का उपयोग करे ॥


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