नई दिल्ली (05 अप्रैल 2025): सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों के निर्माण, बिक्री और भंडारण पर लगे प्रतिबंध को एक साल और बढ़ा दिया है। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने यह आदेश वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर को देखते हुए दिया। कोर्ट ने कहा कि जब तक यह पूरी तरह प्रमाणित नहीं हो जाता कि ग्रीन पटाखे प्रदूषण नहीं फैलाते, तब तक पुराने आदेशों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
पीठ ने यह भी कहा कि दिल्ली की एक बड़ी आबादी ऐसी है जो सड़कों पर काम करती है और जिन्हें प्रदूषण का सबसे अधिक नुकसान होता है। हर किसी के पास एयर प्यूरीफायर लगाने का विकल्प नहीं होता। इसलिए सार्वजनिक स्वास्थ्य के मद्देनजर यह प्रतिबंध जरूरी है और इसमें कोई ढील नहीं दी जा सकती।
सुनवाई के दौरान मुकेश सिंह नाम के एक निजी इंजीनियर ने कोर्ट में पेश होकर दावा किया कि पटाखे पर्यावरण को साफ करते हैं। उन्होंने कहा कि पटाखों पर प्रतिबंध एक अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा है। उन्होंने याचिकाकर्ता एमसी मेहता पर भी गंभीर आरोप लगाए, जिसे कोर्ट ने तुरंत खारिज कर दिया। कोर्ट ने मुकेश सिंह को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें यह तक नहीं पता कि एमसी मेहता कौन हैं और पर्यावरण के लिए उन्होंने क्या-क्या योगदान दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ जुर्माना लगाया जा सकता है, लेकिन इस बार चेतावनी देकर छोड़ा जा रहा है।
जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा को NCR क्षेत्र में पटाखों पर स्थायी प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल अस्थायी प्रतिबंध पर्याप्त नहीं हैं। दिल्ली की तर्ज पर स्थायी प्रतिबंध की आवश्यकता है ताकि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर कई बार बेहद खतरनाक हो जाता है। जब AQI 400 के पार पहुंचता है, तब GRAP लागू किया जाता है। ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत प्रदूषण के स्तर के अनुसार कार्रवाई की जाती है, जिसमें चार स्टेज होती हैं और हर स्तर पर सख्त कदम उठाए जाते हैं।।
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