न्यू नोएडा में जमीन अधिग्रहण पर किसानों का बड़ा ऐलान, बोले- मांगें पूरी होने तक नहीं देंगे जमीन

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (02/11/2026): न्यू नोएडा के लिए अधिसूचित 13 गांवों के किसानों ने भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। गौतमबुद्ध नगर के मिल्क खंडेरा गांव में आयोजित महापंचायत में किसानों ने स्पष्ट किया कि नए भूमि अधिग्रहण कानून के सभी प्रावधानों को पूरी तरह लागू किए बिना वे अपनी एक इंच जमीन भी नहीं देंगे। पंचायत में किसानों ने 20,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर मुआवजा, 20 प्रतिशत विकसित आवासीय भूखंड और प्रत्येक प्रभावित किसान परिवार के बालिग सदस्य को रोजगार देने की मांग उठाई।

एडवोकेट ऋषि टाइगर और प्रिंस टाइगर के नेतृत्व में आयोजित इस महापंचायत में किसान संघर्ष मोर्चा और किसान सभा के पदाधिकारियों के साथ 13 गांवों के सैकड़ों प्रभावित किसानों ने हिस्सा लिया। पंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि किसानों के कानूनी अधिकारों और उचित मुआवजे की मांग पूरी होने तक भूमि अधिग्रहण की किसी भी प्रक्रिया को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

12 साल से सर्किल रेट नहीं बढ़ने पर जनप्रतिनिधियों को घेरा

महापंचायत को संबोधित करते हुए किसान सभा के जिला अध्यक्ष एवं किसान संघर्ष मोर्चा के नेता डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि गौतम बुद्ध नगर में पिछले 12 वर्षों से सर्किल रेट में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। किसानों की बेशकीमती जमीनों का अधिग्रहण बेहद कम कीमत पर किया जाता रहा है। अब नए नोएडा के नाम पर भी किसानों के साथ इसी तरह का व्यवहार किए जाने की आशंका है।

उन्होंने जनप्रतिनिधियों पर किसानों के मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों के अधिकारों और मुआवजे जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी चिंताजनक है। किसान संघर्ष मोर्चा लंबे समय से इस अन्याय के खिलाफ आंदोलन कर रहा है। इस संघर्ष में किसानों को जेल जाना पड़ा और कई मुकदमों का सामना करना पड़ा, लेकिन आंदोलन जारी रहा।

उन्होंने बताया कि किसानों के संघर्ष के बाद मुआवजे की दर 4,100 रुपये से बढ़कर 6,400 रुपये प्रति वर्ग मीटर हुई, लेकिन मोर्चे ने इसे अपर्याप्त मानते हुए स्वीकार नहीं किया। किसानों की मांग है कि जमीन का उचित मूल्य देते हुए मुआवजा 20,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर निर्धारित किया जाए।

6 प्रतिशत नहीं, किसानों को चाहिए 20 प्रतिशत विकसित भूखंड

किसान संघर्ष मोर्चा के नेता सूरन प्रधान ने कहा कि नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत प्रभावित किसानों को 20 प्रतिशत विकसित भूखंड दिए जाने की मांग है। उनका आरोप है कि प्राधिकरण किसानों के इस अधिकार की अनदेखी कर रहे हैं। आंदोलन के दबाव में भूखंड देने की बात तो की गई, लेकिन केवल 6 प्रतिशत भूखंड देने का प्रस्ताव सामने आया, जो किसानों की मांग और कानून की भावना के अनुरूप नहीं है।

उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी अधिग्रहित जमीन के बदले पूरा 20 प्रतिशत विकसित भूखंड मिलना चाहिए। इसके साथ ही प्रभावित परिवारों के प्रत्येक बालिग सदस्य को रोजगार उपलब्ध कराया जाए।

एयरपोर्ट प्रभावित किसानों को रोजगार देने का वादा पूरा नहीं हुआ

सूरन प्रधान ने जेवर एयरपोर्ट के लिए जमीन देने वाले किसानों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि भूमि अधिग्रहण के दौरान प्रभावित परिवारों को रोजगार देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज भी कई किसान रोजगार के लिए भटक रहे हैं। रोजगार अथवा 11 लाख रुपये देने से संबंधित प्रावधानों को भी प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और प्राधिकरण किसानों के वैधानिक अधिकारों को प्राथमिकता देने के बजाय बड़े व्यावसायिक हितों को तरजीह दे रहे हैं।

जमीन देने से पहले पूरी होंगी किसानों की शर्तें

किसान सभा के नेता सुशील ने कहा कि किसान अब किसी भी तरह के आश्वासन और वादों के भरोसे पीछे हटने वाले नहीं हैं। सभी प्रभावित गांवों के किसान अपने अधिकारों के लिए एकजुट हैं और मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रखेंगे।

महापंचायत के आयोजक एडवोकेट ऋषि टाइगर ने कहा कि पंचायत में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया है कि नए भूमि अधिग्रहण कानून के सभी प्रावधान लागू होने तक किसान अपनी जमीन नहीं देंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि गांवों में जबरन सर्वे, भूमि अधिग्रहण या अन्य कार्रवाई के लिए आने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों का विरोध किया जाएगा।

महापंचायत में उठीं किसानों की पांच प्रमुख मांगें

नए भूमि अधिग्रहण कानून के सभी प्रावधानों को पूरी तरह लागू किया जाए।

किसानों को 20,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा दिया जाए।

प्रत्येक प्रभावित किसान को 20 प्रतिशत विकसित आवासीय भूखंड उपलब्ध कराया जाए।

प्रभावित किसान परिवार के प्रत्येक बालिग सदस्य को रोजगार या कानून के तहत निर्धारित वैकल्पिक लाभ दिया जाए।

किसानों की सहमति और कानूनी अधिकारों की अनदेखी कर जबरन भूमि अधिग्रहण न किया जाए।

13 गांवों के आंदोलन को व्यापक बनाने की तैयारी

डॉ. रुपेश वर्मा ने सुनपुरा, खेड़ी और बनोटा समेत आसपास के गांवों के किसानों से भी आंदोलन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि नए नोएडा से प्रभावित सभी गांवों के किसानों को एक साझा मंच पर आकर अपने कानूनी और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई लड़नी होगी। किसान सभा और किसान संघर्ष मोर्चा इस मुद्दे पर लगातार संघर्ष कर रहे हैं और अब इस आंदोलन को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की जरूरत है।

महापंचायत में सरन प्रधान, सुशील, सुनपुरा के जय किशन, उम्मेद त्यागी, सलोनी सोलंकी, प्रधान मानसिंह, राधाचरण भाटी, नरेश नागर, बाबा करतार, लाल नागर, धर्मेंद्र एडवोकेट समेत सैकड़ों प्रभावित किसान मौजूद रहे।

किसानों का स्पष्ट संदेश: उचित मुआवजा, विकसित भूखंड और रोजगार सहित नए भूमि अधिग्रहण कानून के सभी अधिकार सुनिश्चित होने के बाद ही जमीन देने पर विचार किया जाएगा।


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