Yamuna Authority में जमीन की अड़चन से ₹1,220 करोड़ का निवेश अटका

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (29/10/2026): यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में जमीन की उपलब्धता औद्योगिक परियोजनाओं के लिए चुनौती बन रही है। सहमति के आधार पर भूमि खरीदने की प्रक्रिया में कुछ छोटे भूखंडों पर सहमति नहीं बन पाने से बड़े प्रोजेक्ट प्रभावित हो रहे हैं। इसका असर न केवल औद्योगिक निर्माण की शुरुआत पर पड़ रहा है, बल्कि निवेश और रोजगार सृजन की संभावनाओं पर भी दिखाई दे रहा है।

सबसे प्रमुख मामला सेक्टर-8डी में सीएनएच इंडस्ट्रियल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की प्रस्तावित फैक्टरी का है। यमुना प्राधिकरण ने कंपनी को करीब 100 एकड़ जमीन आवंटित की है। यहां ट्रैक्टर और कृषि उपकरणों के निर्माण की इकाई स्थापित की जानी है। परियोजना में लगभग 1,219.81 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है, जबकि फैक्टरी शुरू होने पर करीब 1,200 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है।

2,950 वर्ग मीटर जमीन नहीं मिलने से अटका निर्माण

पूरी परियोजना के लिए जमीन आवंटित होने के बावजूद लगभग 2,950 वर्ग मीटर हिस्से पर अब तक कब्जा नहीं मिल पाया है। संबंधित किसान अपनी जमीन देने के लिए सहमत नहीं है। प्राधिकरण के अधिकारी लंबे समय से बातचीत के माध्यम से सहमति बनाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अभी तक इसका समाधान नहीं निकल सका है। जमीन का यह छोटा हिस्सा उपलब्ध नहीं होने के कारण फैक्टरी के निर्माण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है। ऐसे में परियोजना की आधारशिला रखने में भी देरी हो रही है।

कृषि उपकरण निर्माण से रोजगार बढ़ने की उम्मीद

सीएनएच इंडस्ट्रियल इंडिया की प्रस्तावित इकाई यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली परियोजनाओं में शामिल है। ट्रैक्टर और कृषि उपकरणों का उत्पादन शुरू होने से क्षेत्र में विनिर्माण गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है। साथ ही, बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। हालांकि, भूमि संबंधी अड़चन दूर होने के बाद ही परियोजना के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जा सकेगा।

गंगा लिंक एक्सप्रेसवे के लिए भी जमीन की बाधा

भूमि खरीद में आ रही परेशानी केवल औद्योगिक परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। गंगा लिंक एक्सप्रेसवे के निर्धारित मार्ग में रबूपुरा और कपना गांवों की कुछ आबादी आने के कारण जमीन की खरीद का काम भी पूरी तरह पूरा नहीं हो पाया है। इन स्थानों पर जमीन का कुछ हिस्सा अभी क्रय प्रक्रिया से बाहर है। इससे परियोजना के लिए आवश्यक भूमि जुटाने में अतिरिक्त समय लग रहा है।

सहमति नहीं बनी तो अपनाया जाएगा अधिग्रहण का रास्ता

यमुना प्राधिकरण के सामने चुनौती यह है कि विकास परियोजनाओं के लिए जरूरी जमीन उपलब्ध कराने के साथ किसानों की सहमति भी सुनिश्चित की जाए। अधिकारियों के अनुसार, पहले आपसी बातचीत के जरिए जमीन लेने का प्रयास किया जा रहा है। यदि संबंधित किसानों के साथ सहमति नहीं बनती है, तो नियमानुसार भूमि अधिग्रहण कानून के तहत जमीन लेने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

जमीन के सीमित हिस्सों पर अटकी सहमति अब बड़े निवेश और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समयसीमा को प्रभावित करने वाला मुद्दा बन गई है। ऐसे में प्राधिकरण के लिए भूमि संबंधी विवादों का समाधान निकालना जरूरी होगा, ताकि प्रस्तावित औद्योगिक इकाइयों और एक्सप्रेसवे से जुड़े विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा सके।


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