यमुना प्राधिकरण के सामने किसानों की मांगों पर बनी सहमति, 3 सप्ताह में निपटेंगे SIT के लंबित मामले

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (30/10/2026): यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के किसानों की लंबित समस्याओं के समाधान को लेकर किसान संघर्ष मोर्चा और प्राधिकरण के अधिकारियों के बीच हुई वार्ता में कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी। बैठक में 250 से अधिक किसान प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। वार्ता के दौरान 10 प्रतिशत आबादी भूखंड, एसआईटी के लंबित मामले, 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा, पुनर्वास के मकानों की रजिस्ट्री और जेवर एयरपोर्ट प्रभावित परिवारों के युवाओं को रोजगार देने जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। अधिकारियों ने एसआईटी से जुड़े मामलों का आगामी दो से तीन सप्ताह में निस्तारण करने सहित कई मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई का भरोसा दिया। हालांकि, एयरपोर्ट प्रभावित परिवारों के युवाओं को स्थायी रोजगार देने के मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी।

गौरतलब है कि यह बैठक 21 अक्टूबर को यमुना प्राधिकरण कार्यालय पर हुए किसान आंदोलन के बाद आयोजित की गई। उस दौरान किसानों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था, जिसके बाद 12 किसानों को जेल भेजा गया था। हालांकि, अगले दिन सभी किसानों को रिहा कर दिया गया। इसके बाद किसान संघर्ष मोर्चा ने लंबित मांगों के समाधान के लिए अधिकारियों के साथ वार्ता की।

एसआईटी के 570 लंबित मामलों पर दो से तीन सप्ताह में कार्रवाई का आश्वासन

बैठक में एसआईटी से जुड़े लंबित मामलों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। किसान प्रतिनिधियों ने बताया कि शिफ्टिंग के 211, बादलपुर के 208 और अन्य 151 मामले लंबित हैं। इस पर मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने आश्वासन दिया कि इन मामलों में आगामी दो से तीन सप्ताह के भीतर आवश्यक कार्रवाई पूरी कर दी जाएगी।

10 प्रतिशत आबादी भूखंड का प्रस्ताव शासन को भेजा

10 प्रतिशत आबादी भूखंड की मांग पर अधिकारियों ने बताया कि इससे संबंधित प्रस्ताव शासन की मंजूरी के लिए भेजा जा चुका है। किसान सभा के जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने जानकारी दी कि इस मुद्दे पर 13 नवंबर को औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार सिंह के साथ बैठक प्रस्तावित है। किसान संघर्ष मोर्चा ने मांग की कि इस बैठक में तीनों प्राधिकरणों के अधिकारी भी किसान प्रतिनिधियों के साथ शामिल हों, ताकि लंबित मामलों पर प्रभावी चर्चा हो सके।

521 आबादी प्रकरणों की दोबारा सुनवाई की मांग

यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के 521 आबादी प्रकरणों का मामला भी बैठक में उठाया गया। किसान संघर्ष मोर्चा के अनुसार, पहले स्वीकृत 306 मामलों की जांच के बाद केवल 100 मामले सही पाए गए, जबकि 206 किसानों की लीज प्रभावित हुई। वहीं, 221 अन्य मामलों में से करीब 190 मामले निरस्त कर दिए गए। किसान प्रतिनिधियों ने सभी निरस्त मामलों की नियमानुसार दोबारा सुनवाई कराने की मांग रखी। इस पर अधिकारियों ने पुनः सुनवाई की प्रक्रिया शुरू कराने का भरोसा दिया।

64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे के 1,000 करोड़ रुपये बाकी

64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे के भुगतान पर अधिकारियों ने बताया कि कुल 4,200 करोड़ रुपये में से लगभग 3,200 करोड़ रुपये किसानों को वितरित किए जा चुके हैं, जबकि करीब 1,000 करोड़ रुपये का भुगतान अभी बाकी है। प्राधिकरण ने अपने हिस्से की बकाया राशि जल्द जारी करने और संबंधित कंपनियों से भी शेष भुगतान कराने के लिए प्रयास करने का आश्वासन दिया।

एयरपोर्ट प्रभावित युवाओं को स्थायी रोजगार पर नहीं बनी सहमति

जेवर एयरपोर्ट परियोजना से प्रभावित परिवारों के युवाओं को स्थायी रोजगार देने की मांग पर अधिकारियों और किसान प्रतिनिधियों के बीच सहमति नहीं बन सकी। अधिकारियों का कहना था कि एयरपोर्ट परियोजना में स्थायी प्रकृति के रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं हैं और अधिकांश कार्य वेंडर कंपनियों के माध्यम से कराए जाते हैं। वहीं, पुनर्वास योजना के तहत आवंटित मकानों की लंबित रजिस्ट्री जल्द पूरी कराने का आश्वासन दिया गया।

समयसीमा में कार्रवाई नहीं हुई तो फिर होगा प्राधिकरण का घेराव

बैठक के बाद किसान संघर्ष मोर्चा के नेता सुखबीर खलीफा ने स्पष्ट किया कि किसानों के अधिकारों से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान होने तक आंदोलन जारी रहेगा। सोरन प्रधान ने कहा कि लंबे समय से लंबित मामलों पर अधिकारियों ने अब गंभीरता दिखाई है। वहीं, डॉ. रुपेश वर्मा ने एसआईटी मामलों के दो से तीन सप्ताह में निस्तारण के आश्वासन को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब किसानों को उनका हक और न्याय मिलेगा।

किसान नेता वीर सिंह नागर ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समयसीमा में मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो हजारों किसान एक बार फिर यमुना प्राधिकरण का घेराव करेंगे। उन्होंने कहा कि किसान अपने अधिकारों की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे।

किसान संघर्ष मोर्चा के अनुसार, बैठक में बनी सहमति और अधिकारियों की ओर से दिए गए आश्वासनों का कार्यवृत्त तैयार कर लिया गया है। इसकी आधिकारिक प्रति प्राप्त होने के बाद इसे सार्वजनिक किया जाएगा। फिलहाल किसान संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं हैं और सभी मांगों पर जमीनी स्तर पर कार्रवाई का इंतजार करेंगे।


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