प्रधानमंत्री आवास के पास रेस कोर्स मस्जिद पर विवाद गहराया, 6 दिन में हटाने का नोटिस

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (21 October 2026): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के सरकारी आवास 7 लोक कल्याण मार्ग के पास स्थित ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद (Race Course Mosque) को खाली कराने के नोटिस पर विवाद गहरा गया है। भूमि एवं विकास कार्यालय की ओर से जारी छह दिन की समय-सीमा को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi), आम आदमी पार्टी (AAP) नेता अमानतुल्लाह खान (Amanatullah Khan) और कश्मीर के मुख्य धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक (Mirwaiz Umar Farooq) ने चिंता जताई है। वहीं, जमीयत उलेमा-ए-हिंद (Jamiat Ulama-i-Hind) ने इस नोटिस को दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में चुनौती देने की तैयारी की है। विवाद उस जमीन के स्वामित्व और स्थिति को लेकर है, जिस पर मस्जिद बनी हुई है।

ओवैसी ने केंद्रीय मंत्री से मांगा हस्तक्षेप

असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वर्ष 1977 से मस्जिद को गजट अधिसूचना में वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज बताया जा रहा है, तो दिल्ली वक्फ बोर्ड (Delhi Waqf Board) ने बेदखली के आदेश को चुनौती देने के लिए कदम क्यों नहीं उठाए। ओवैसी ने यह भी सवाल उठाया कि वर्ष 2023 से बोर्ड का गठन नहीं होने के बीच मस्जिद के मामले में प्रभावी हस्तक्षेप क्यों नहीं हुआ। इस मुद्दे पर अब कानूनी कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है।

मीरवाइज और अमानतुल्लाह खान ने भी जताई चिंता

मीरवाइज उमर फारूक ने मस्जिद खाली करने के लिए दी गई छह दिन की समय-सीमा की आलोचना करते हुए इसे चिंताजनक बताया। उन्होंने वक्फ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए और इस विवाद को मुस्लिम धार्मिक संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण से जुड़ी व्यापक बहस से जोड़ा। वहीं, दिल्ली वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान ने दावा किया कि यह मस्जिद आजादी से पहले की है और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) की अधिसूचित हेरिटेज सूची में शामिल है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लेंगे।

दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने मस्जिद खाली कराने के नोटिस के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट जाने की घोषणा की है। इससे पहले भी इस मामले को अदालत में चुनौती देने का प्रयास हुआ था, लेकिन याचिका उचित पक्षकार नहीं होने के आधार पर खारिज कर दी गई थी। अब इस बार मस्जिद समिति की ओर से AIMIM के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष डॉ. शोएब जमई (Dr. Shoaib Jamai) के याचिका दायर करने की संभावना जताई गई है। मस्जिद के इमाम मोहम्मद हारून (Mohammad Haroon) ने आरोप लगाया कि पिछले छह महीनों में दिल्ली वक्फ बोर्ड से कई बार संपर्क करने के बावजूद उन्हें ठोस मदद नहीं मिली। उन्होंने बिजली और पानी की आपूर्ति काटे जाने का भी दावा किया है।

मस्जिद के साथ झुग्गी बस्ती भी विवाद के दायरे में

भूमि एवं विकास कार्यालय का बेदखली नोटिस केवल मस्जिद तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सटी झुग्गी बस्ती भी इसकी जद में है। दिल्ली हाईकोर्ट ने बस्ती में रहने वाले लगभग 700 परिवारों को हटाकर करीब 45 किलोमीटर दूर सावदा घेवरा (Savda Ghevra) स्थित पुनर्वास कॉलोनी में भेजने की अनुमति दी है। अधिकारियों को पुनर्वास स्थल पर शिक्षा, परिवहन और स्वच्छता जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस स्थान को खाली करने के लिए अदालत की ओर से दिया गया छह सप्ताह का समय 6 अक्टूबर को समाप्त हो गया था। इस बीच जमीयत के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाकात कर बिजली-पानी की आपूर्ति बहाल करने, नमाजियों की पहुंच सुनिश्चित करने और मस्जिद व उससे सटे कब्रिस्तान की सुरक्षा की मांग की है।


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