दिल्ली में 1 नवंबर लागू होगा सख्त नियम, क्या है 10 सूत्रीय विंटर एक्शन प्लान

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (21 October 2026): दिल्ली (Delhi) में सर्दियों के दौरान बढ़ते वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 10 सूत्रीय विंटर एक्शन प्लान की घोषणा की है। इस योजना के तहत 1 नवंबर से वाहनों, कार्यालयों, निर्माण गतिविधियों और औद्योगिक इकाइयों पर सख्ती बढ़ाई जाएगी। सरकार का उद्देश्य गाड़ियों से निकलने वाले धुएं, सड़क की धूल, निर्माण कार्यों और औद्योगिक उत्सर्जन को नियंत्रित करना है। यह योजना 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेगी। इसे लागू करने के लिए दिल्ली सरकार केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM), दिल्ली पुलिस, दिल्ली मेट्रो और स्थानीय निकायों के साथ मिलकर काम करेगी।

दिल्ली सरकार का 10 सूत्रीय विंटर एक्शन प्लान

1. 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम

दिल्ली में 1 नवंबर से सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए घर से काम करने की व्यवस्था करने या प्रत्येक सप्ताह दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू करने का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा, पीक आवर में यातायात का दबाव कम करने के लिए कार्यालयों के समय में बदलाव किया जाएगा। नगर निगम के कार्यालय सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक और दिल्ली सरकार के कार्यालय सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक संचालित होंगे।

2. अधिकृत पार्किंग स्थलों पर शुल्क दोगुना

निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए दिल्ली के अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क दोगुना करने की योजना है। हालांकि, दिल्ली मेट्रो की पार्किंग सुविधाओं को इस व्यवस्था से छूट दी जाएगी। सरकार का मानना है कि पार्किंग महंगी होने से लोग निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित होंगे।

3. वैध PUC के बिना नहीं मिलेगा ईंधन

सरकार 1 नवंबर से ‘नो PUC, नो फ्यूल’ व्यवस्था के तहत 500 पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक से निगरानी करेगी। वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) के बिना वाहनों को ईंधन नहीं देने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य प्रदूषण मानकों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करना है।

4. गैर-BS-VI पेट्रोल-डीजल वाहनों की एंट्री पर रोक

दिल्ली के बाहर पंजीकृत ऐसे पेट्रोल और डीजल वाहनों को 1 नवंबर से राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं देने की योजना है, जो भारत स्टेज-VI (BS-VI) उत्सर्जन मानकों का पालन नहीं करते। हालांकि, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट मिलेगी। इसके साथ ही पुरानी गाड़ियों को हटाने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए परिवर्तन योजना और ईवी पॉलिसी 2026 के तहत वित्तीय प्रोत्साहन देने का भी प्रावधान है।

5. निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर प्रतिबंध

धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए 1 नवंबर से 31 जनवरी के बीच धूल फैलाने वाली तोड़फोड़ और खुले स्थानों पर सिविल निर्माण कार्यों पर रोक लगाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक सभी प्रकार के निर्माण और तोड़फोड़ पर व्यापक प्रतिबंध लगाने की योजना बनाई गई है। इन उपायों का उद्देश्य सर्दियों में हवा में धूल के कणों की मात्रा को कम करना है।

6. निर्माण स्थलों पर 100 प्रतिशत CCTV निगरानी

निर्माण स्थलों पर प्रदूषण नियंत्रण नियमों के पालन की निगरानी के लिए 100 प्रतिशत सीसीटीवी कवरेज अनिवार्य करने का प्रावधान रखा गया है। इसके साथ ही भवन निर्माण योजनाओं की मंजूरी के लिए सरकार के ‘मलबा ऐप’ पर पंजीकरण जरूरी होगा। इस व्यवस्था के जरिए निर्माण से निकलने वाले मलबे के प्रबंधन और नियमों के उल्लंघन पर नजर रखने की योजना है।

7. 3,000 किलोमीटर सड़कों का पुनर्विकास

सड़क की धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली सरकार ने 3,000 किलोमीटर सड़कों के पुनर्विकास का लक्ष्य रखा है। सरकारी जानकारी के मुताबिक, इनमें से 1,193 किलोमीटर सड़कों पर काम पूरा हो चुका है। इसके अलावा, कंक्रीट सड़क निर्माण का काम 31 अक्टूबर तक और बिटुमेन से संबंधित काम 15 नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

8. मेट्रो और बसों में बढ़ाए जाएंगे यात्री

सरकार सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली मेट्रो में प्रतिदिन 72 लाख यात्रियों और दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की बसों में 42 लाख यात्रियों तक पहुंचने का लक्ष्य लेकर चल रही है। कार्यालयों के समय में अंतर करने और सार्वजनिक परिवहन की सवारियों की संख्या बढ़ाने से सड़कों पर निजी वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

9. औद्योगिक प्रदूषण और 37 हॉटस्पॉट पर सख्ती

प्रदूषण नियंत्रण नियमों का उल्लंघन करने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई तेज की जाएगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 11,271 स्थानों के सर्वेक्षण के बाद 2,283 प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों को सील या बंद किया जा चुका है। इसके अलावा, 37 चिन्हित प्रदूषण और यातायात हॉटस्पॉट का सांसदों, विधायकों, पार्षदों और संबंधित अधिकारियों द्वारा साप्ताहिक निरीक्षण किया जाएगा। सरकार 15 प्रमुख सड़कों को जाम मुक्त बनाने की दिशा में भी काम कर रही है।

10. AI निगरानी और 24 घंटे कार्रवाई

प्रदूषण नियंत्रण नियमों के उल्लंघन की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी प्रणाली विकसित करने की योजना है। फिलहाल 334 प्रवर्तन टीमें दो शिफ्टों में चौबीसों घंटे काम कर रही हैं। इनमें नगर निगम, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद और दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड की 256 टीमें तथा दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति की 78 टीमें शामिल हैं। इन टीमों के जरिए प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर निगरानी और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

28 फरवरी तक लागू रहेगा विंटर एक्शन प्लान

दिल्ली सरकार का यह 10 सूत्रीय विंटर एक्शन प्लान 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक लागू रहने वाला है। इसमें निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने, निर्माण से होने वाले धूल प्रदूषण पर नियंत्रण, औद्योगिक उत्सर्जन की निगरानी और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने जैसे कदम शामिल हैं। योजना की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित विभाग इन उपायों को कितनी सख्ती और समन्वय के साथ लागू करते हैं।


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