जेवर एयरपोर्ट लिंक एक्सप्रेसवे टेंडर पर L&T को झटका, हाईकोर्ट ने नहीं दी राहत

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (03/10/2026): जेवर एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाली प्रस्तावित लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना के निर्माण टेंडर को लेकर लार्सन एंड टुब्रो (L&T) की कानूनी चुनौती फिलहाल सफल नहीं हो सकी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कंपनी की याचिका खारिज करते हुए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) के तकनीकी स्तर पर लिए गए निर्णय में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

इस मामले में विवाद का केंद्र L&T की बोली की कीमत नहीं, बल्कि बोली जमा किए जाने के समय कंपनी की पात्रता रही। कंपनी की ओर से करीब 252 करोड़ रुपये कम कीमत की पेशकश किए जाने की बात अदालत के सामने रखी गई थी। हालांकि, कोर्ट ने माना कि टेंडर प्रक्रिया में वित्तीय बोली तक पहुंचने से पहले तकनीकी और पात्रता संबंधी शर्तों को पूरा करना आवश्यक है।

अंतिम तारीख पर क्या स्थिति थी?

परियोजना के लिए निविदा जमा करने की अंतिम तारीख 7 सितंबर 2026 तय थी। अदालत के रिकॉर्ड में सामने आया कि L&T के खिलाफ उत्तर प्रदेश जल जीवन मिशन की ओर से लगाया गया प्रतिबंध उस तारीख तक प्रभावी था।

बाद में 14 सितंबर 2026 को इस प्रतिबंध पर रोक लगाई गई। यानी जिस तारीख को टेंडर के लिए पात्रता देखी जानी थी, उस समय प्रतिबंध प्रभावी था। अदालत ने इसी समय-सीमा को मामले में महत्वपूर्ण माना।

बाद में मिली राहत का पुराने टेंडर पर असर नहीं

सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठा कि यदि कंपनी पर लगा प्रतिबंध बाद में हटा या स्थगित हो गया, तो क्या इससे पहले जमा की गई बोली को पात्र माना जा सकता है?

अदालत के रुख के अनुसार, टेंडर में पात्रता का परीक्षण उस निर्धारित समय-सीमा के आधार पर किया जाता है, जिसमें बोली जमा की गई थी। बाद की तारीख में परिस्थितियां बदलने से उस समय मौजूद स्थिति अपने आप नहीं बदल जाती।

इसी आधार पर UPEIDA द्वारा L&T की तकनीकी बोली को आगे की प्रक्रिया से बाहर रखने के फैसले को बरकरार रखा गया।

252 करोड़ रुपये कम बोली की दलील भी नहीं बनी आधार

L&T की ओर से अदालत में यह बात रखी गई कि उसकी वित्तीय पेशकश करीब 252 करोड़ रुपये कम थी। कंपनी के पक्ष का प्रमुख आधार यह था कि कम कीमत वाली बोली को वित्तीय मूल्यांकन में शामिल किया जाना चाहिए।

लेकिन टेंडर प्रक्रिया में कीमत की तुलना तभी होती है, जब बोलीदाता पहले निर्धारित तकनीकी कसौटियों पर योग्य पाया जाए। इस मामले में अदालत ने इसी क्रम को महत्वपूर्ण माना और कम कीमत को तकनीकी पात्रता की कमी की भरपाई के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना।

जेवर एयरपोर्ट से जुड़ी कनेक्टिविटी परियोजना

जेवर में विकसित हो रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़ने के लिए यह परियोजना प्रस्तावित है। गंगा एक्सप्रेसवे तक बेहतर सीधी कनेक्टिविटी बनने से एयरपोर्ट तक पहुंच, माल परिवहन और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच संपर्क को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

परियोजना का महत्व सिर्फ यात्री आवागमन तक सीमित नहीं है। एयर कार्गो, लॉजिस्टिक्स और एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़ाव के कारण इसे क्षेत्र की भविष्य की परिवहन व्यवस्था के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब आगे की प्रक्रिया पर नजर

हाईकोर्ट के आदेश के बाद फिलहाल L&T की तकनीकी बोली को लेकर UPEIDA का निर्णय कायम है। इसका सीधा असर परियोजना की आगे की निविदा प्रक्रिया पर पड़ेगा।

हालांकि, L&T के खिलाफ मूल प्रतिबंध से जुड़े मामलों में कंपनी के लिए उपलब्ध अन्य कानूनी विकल्प अलग विषय हैं। हाईकोर्ट का मौजूदा आदेश मुख्य रूप से इस बात से जुड़ा है कि टेंडर की निर्धारित तारीख पर कंपनी की पात्रता क्या थी और UPEIDA द्वारा उसकी बोली को तकनीकी स्तर पर बाहर करना उचित था या नहीं। टेन न्यूज नेटवर्क इस मामले से जुड़े आगे के न्यायिक और परियोजना संबंधी अपडेट पर नजर बनाए हुए है।


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